कल क्या है? १४जनवरी और क्या।हां और क्या कुछ भी तो नही सिवाय इसके की इसमें एक इंसान पैदा हुआ था।आपकी नज़र में वह शायर होगा ,नेता होगा ,समाजसेवी होगा या फिर कामरेड होगा।मेरी नज़र में वह था इंसान जो होना बेहद कठिन काम है या कहें साधना है।जी वह इंसान थे कैफी आज़मी ।उनका दिल मासूम था।हर दर्द पर आसूं थे।वह आसूं आगे चलकर गज़ल बनते और उनकी टीस बनती नज़्म ।जब हम सब ख्वाब देखते की मुम्बई जैसी चकाचौंध मिले तब उस ऊचाई को और सारी शान ओ शौकत को छोड़ कर वह गांव आ गए।उस गांव जिसे हम सब तरक्की के नाम पर कब का छोड़ चुके हैं ।अपनें मिजवां गांव की तरक्की के लिए इस इंसान नें ज़मीन और आसमान एक कर दिया।कैफी तुम्हें लिखें तो कितना लिखें ,महसूस करें तो कितना महसूस करें ।बस दोस्त तुम मुझे इतना आईना दिखाओ की मुझे अपना चेहरा भी अच्छा लगने लगे तभी तो मै भी इंसान बन पाऊगा।कैफी वादा है तुम्हारे ख्वाबों का हिंदुस्तान बनाएंगे।तुम ऊपर से मुस्कुराना मै नीचे खुशी खुशी पसीना बहाकर मुस्कुराता हुआ हिंदुस्तान बनाएंगे।वादा। ॥#हैशटैग #hashtag
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