Monday, May 30, 2016

संघर्ष पथ

वह यूपी के मामूली से गाँव में,बेहद मामूली परिवार में पैदा हुई।बाप बेटे चाहते थे,एक के बाद एक तीन लड़कियो के बाद छ लड़के पैदा हुए जिनमे वह सभी लड़को से बड़ी थी।दिल्ली के इन्द्रपुरी की झुग्गी झोपड़ी में नौ भाई बहनों मे पली बढ़ी।दिमागी सीलन,पिछड़ेपन,सामाजी तौर पर अछूत दँश को सहते हुए लड़की होना किसी गुनाह से कम नहीं था।वही लड़की को एक धुन थी की आईएएस बनकर अपने समाज को आगे बढ़ाना है।वह सब दूर करना है जो उसने झेला है।वह आईएएस नही बन सकी।बीएड के बाद साधारण टीचर रहकर लॉ में एडमिशन ले लिया ताकि अपनों के लिए लड़ पाए।वह तमाम मुश्किलो से लड़ी।हर एक गलत को जवाब दिया।यहां तक उस दौर के वरिष्ठं नेता राजनारायण को उनकी ही सभा में उसने अपने तीखे सवालों से खामोश कर दिया।इतना सख्त विरोध किया उस मामूली सी लड़की ने की राजनारायण वापिस जाओ के नारे से हाल गूँज गया।उसी निर्माण काल में एक गुरु ने उसे गुन सिखाया।वह IAS बनकर सिस्टम के पेंच की जगह पूरा सिस्टम ही बन गई।डाकघर में नौकरी करने वाले जिस बाप ने नौ बच्चों में लड़को के मुकाबले लड़कियो को नकारा, उसकी इस बेटी ने इतिहास रच दिया।संसद की चौखट पर जब उसके पसीने की बदबू से एलीट महिलाओ ने नाक पर रुमाल धर कर उसे नीचा दिखाया।तब उसने सियासत और समझ की वह खुशबू बिखेरी की एलीट क्लास ध्वस्त हो गया।उसका उगना और छा जाना हमारे लोकतन्त्र का जादू ही था।मैं बात कर रहा हूँ मायावती की।उनके संघर्ष की।कभी ना टूटने वाली जीवटता की।सीखे वह लोग जिन्हें समाज को आगे बढ़ाना है।दो चोटी धरकर मायावती ने किसी ज़माने में पैदल और साईकिल से चलकर अगड़ो से जूझकर मिसाल रखी थी।कमज़ोर के गले की आवाज़ बनकर वह मुल्क़ में गूँजी थी।आज फ़ख्र से हाथ हिलाती माया के पीछे वह संघर्ष है जो ज़्यादा बाहर नही आया।माया का बचपन वह था जिसका उसने कभी चीख चीख कर ढिंढोरा नही पीटा।मेहनत से देश के सबसे बड़े स्टेट की सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठकर दिखा दिया।मैं राजनीती की जगह लीडरशिप पर बात कर रहा हूँ।लीडरशिप पैदा करना एक बड़ी कला है।बतौर लीडर मायावती के संघर्ष और विकास की दास्तान इतिहास के सुनहरे वरखों में दर्ज हो चुकी है।आगे बढ़िए।इनसे संघर्ष सीखिये।संगठन की कला सीखिये,कभी कमज़ोर होने का एहसास मत पालिए।तमाम कमियों को दरकिनार कर अच्छी चीज़ों को उतारिये।इनकी गलतियों से बचिए और खूबसूरत लीडरशिप दुनिया के सामने रखिये।©

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