Wednesday, May 4, 2016

टीपू सुल्तान

जब किसी एक की हार से सब गुलाम हो जाए तो समझ जाइये वह कितना ज़रूरी किरदार रहा होगा।वह जिसने मुल्क़ के लिए अपनी जान देदी।जिसे अपनों ने धोखा दिया।वह लड़ा आखरी तक।चाहता तो समझौतों का रास्ता हमेशा उसके लिए खुला था।वह जिसका दिमाग सदियों आगे का था।जिसने बारूद पर हाथ रख कर उसे हवा में उड़ने का हुनर दिया।दुनिया का पहला रॉकेट जिसकी सोच से शक्ल में आया।जिसके ज़िंदा होने के एहसास भर से बिरतानियो की रूह काँपती थी।वह था सुल्तान फ़तेह अली खान यानि टीपू सुल्तान।हो सकता है टीपू सुल्तान आपको बुरा लगे क्योंकी आप अपने मज़हब को लेकर नाज़ुक मोड़ पर हैं।अब तो आपको सारी अच्छाई और बुराई अपने मज़हब से ही नज़र आती है।अब आपको हर वह शख्स बुरा लगता है जिसने कभी भी भूलकर सख्त निगह से आपके मज़हब को देखा ।टीपू सुल्तान की हज़ारों अच्छाइयों,खूबियों पर मज़हबी तंगी भारी पर गई।इस ज़मींन से अथाह मोहब्बत करने वाला और मैसूर के लिए हमेशा लड़ने वाला आपको अपनी मज़हबी साँचो से बुरा लगने लगा।आज ही के दिन उस जाबांज़ सुल्तान को शहीद किया गया था।वह भी मैसूर को जीतने के लिए ।उसकी एक हार ने हमें गुलामी में डाल दिया।अब पढ़िए उसे धोखा किसने दिया था।मैं तो कहता हूँ मुल्क़ की तरक़्क़ी के लिए टीपू को पढ़िए,उसकी ऊँची सोच को देखिये और अपने गुलाम दिल ओ दिमाग से आज़ाद होकर अपनाइये।हिंदुस्तान की बुलन्दी टीपू सुल्तान भी चाहता था और हम आप भी।ज़रा सा उसकी शहादत की इज़्ज़त अगर दिल में आए तो याद कर लीजिये जैसे औरों को याद करते हैं।टीपू के बनाए रॉकेट से दुनिया ने मिज़ाइल तक का सफर कर डाला और हम-आप मज़हबी साँचो में टीपू को तौलने में लगे हैं।सब कुछ छोड़कर अपनी सोच को तेज़ करिये।टीपू सुल्तान हम सबमें हैं, हर मुल्क़ के लिए मरने वाले में हैं।उसे महसूस कीजिये।

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