Wednesday, June 1, 2016

लेफ्टन लेफ्ट

कुछ हो न हो लेफ्ट यानि वामपंथ ने एक बड़ा काम किया है।लेफ्ट ने कला,संस्कृति और साहित्य को जितना सींचा है उतना शायद ही किसी ने किया हो।मैं ताज्जुब करता हूँ यह इतनी खूबसूरती से लफ़्ज़ों पर पैर रखते हुए इतना आगे निकल गए की दूसरी कोई भी विचारधारा इनके आगे धूँधली हो गई।रँगमंच हो तो उसमे सबसे ज़्यादा काम लेफ्ट से प्रभावित लोगो ने किया।फ़िल्म हो या साहित्य जितना नामचीन और ज़ायकेदार इन्होंने लिखा है शायद ही किसी ने लिखा हो।गाने,शेर ओ शायरी,ग़ज़लें, गीत,संगीत सबमे लेफ्ट का झंडा सबसे ऊँचा है।अगर नाम लिखने बैठूँ तो हसरत मोहानी, मजाज़ से होते हुए लाखो नाम लिख डालू तो आप सर पकड़ लें।अक्सर कम समझदार कह देते हैं की लेफ्ट ज़मीनी नहीं हैं, इन्होने भारत की आत्मा को नही छुआ तो भय्या हमारी सांस्कृतिक आत्मा को लेफ्ट के सिवा किसने छुआ।जिन्होंने सारी ज़िन्दगी अपने आप को संस्कृति का रक्षक कहा वह तो संस्कृति से कोसो मीलो दूर थे।वामपंथ को हम राजनीती से अलग देखें तो जितना आम और कमज़ोर लोगो से जुड़कर इन्होंने काम किया उतना तो किसी ने नही किया।इतिहास,भूगोल,विज्ञानं,साहित्य,भाषा,कला पर जितना इन्होंने लिख डाला है उसे तो अभी दूसरी विचारधारा के लोग पढ़ भी नही पाए हैं।यहाँ तक बड़े बड़े एग्ज़ाम में आप बिना लेफ्ट लेखक पढ़े शायद ही पहली सीढ़ी पार कर पाए।इसलिए कहते हैं दुष्प्रचार से बचें और सच्चाई को अपनी आँखो से देखें।मैं दावे से कह सकता हूँ की हमे सांस्कृतिक और साहित्यिक अमीर लेफ्ट विचारधारा ने बनाया है।थोड़ा इनसे मतभेद हो सकता है मगर इनके पहाड़ जैसे काम को नज़रअंदाज़ करना बेवक़ूफ़ी ही होगी।मैं लेफ्ट के युवाओं को देखता हूँ तो सिहर जाता हूँ, इतना ज़बरदस्त ज्ञान और इतनी तगड़ी समझ।जब लड़के अपनी गली का भूगोल नही बता पा रहे होते हैं तब यह आपसे वियतनाम,फलस्तीन,क्यूबा के भूगोल पर बहस कर रहे होते हैं, देख कर अच्छा लगता है।बिना जलन के,दल,विचार,धर्म की जंज़ीरों के बिना अगर लेफ्ट से कुछ सीख पाइए तो समझ सीखिये।इनकी समझ ही आपको समाज के लिए राइट बना देगी।बस कुछ विवादित नाम लेकर आप चुपके से सरक लेते हैं, यही बुरा है।जिससे जितना सीख पाइए सीखिये।©

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