Tuesday, June 14, 2016

एल्बम में साज

यह जो मैं सामने ब्लैक एन्ड व्हाइट फ़ोटो एल्बम लिए बैठा हूँ,तुम देख कर हंस रहे हो।तुम्हे पता भी है की इसमें क्या है।यह जो सबसे ऊपर तस्वीर है मेरे दादा की है, तुम क्या जानो दादा की तासीर।वह दादा जिन्होंने बिरतानियो को खूब छकाया था।बड़े रौबदार थे।ज़बरदस्त इल्म के साथ सामने वाले को अपना बना लेने का उनका हुनर खूब काम आता था।उनके बगल में यह जो सफेद दुपट्टे में चेहरे पर सिलवटों वाली औरत है यह मेरी दादी हैं।इन्होंने जो दुपट्टा ओढ़ रखा है उसमे खुद ही कामदानी का काम बनाया था।बड़े मज़े में दादा की तस्वीर को देखकर कहती थीं की यह जो तुम्हारे दादा इसमें काली शेरवानी पहने हैं इसका चौथा बटन मेरी नकाब का है।मैंने तागा था।यह जो काली सफेद पुरानी सी तस्वीरें ,जिनकी हैं न यह लोग बेहद रँगीन होते थे,हमारी तरह फीके नहीं।यह जो तुम्हे तस्वीरों में पुराना सा घर दिख रहा है न यह बेहद खुशमिजाज़ लोगों का ठिकाना था।बगल वाले पेज पर जो दादा के छोटे भाई की तस्वीर है,वह उस ज़माने में ठकुराइन से मोहब्बत कर बैठे थे।आगे की तस्वीर में ठकुराइन ठाकुर के साथ पलंग पर बैठी दिखेंगी।तुम्हे क्या लगता है मैं क्यों यह पन्ने पलट रहा,पता है यह एल्बम मुझे देखना ज़िन्दगी का सबसे खुशनुमा काम लगता है।इसके पहले पेज से आखरी पेज तक कई कई ज़माने क़ैद हैं।तुमसे कहे जाते हैंकी इस खानदानी एल्बम को सम्भाल कर रखना और इसके आखरी के ख़ाली पन्नों में मेरी तस्वीर भी चस्पा कर देना।कम से कम सारे खानदान से मिल तो लूँगा।इसे दीमक से बचाना अगर वह दीमक लग जाए तो उससे हाथ पकड़ कर कहना यह जो आखरी तस्वीर है, इसने अपनी पूरी उम्र में दीमक लगा दी थी।अब तो बख्श दो उसे।एल्बम में ही सही अब तो उसे अपनों के साथ सुकून से रहने दो।मेरी पूरी दुनियाँ हैं यह एल्बम।बस इन्हें महसूस तो करो,तस्वीरें खुद तुमसे बाते करेंगी।कहकहे लगाएंगी,शिकवा करेंगी,बस तुम आँसू बहाकर मेरा एल्बम गीला मत कर देना।©

No comments:

Post a Comment