Thursday, June 30, 2016

वोह जो ये हैं

वह मीठा है।वह वैसा(हाथों का इशारा) है भाई समझा करो।अरे उसमे लचक है।अरे उसके पेच ढीले हैं।हम अपनी गन्दी ज़हेनियत के साथ नामकरण किया करते हैं।जो थोड़े मुँहफट हुए कह दिया की वह गे है।हे राम या ख़ुदा कौन से दिन आ गए।घोर कलियुग।हम सब गे को अभी तक एक्सेप्ट नही कर सके हैं।आजभी वह छुप कर मन मसोस कर जी रहे हैं।चाह के भी चाह नही पा रहे हैं।हो सकता है हमारी मान्यताओ के हिसाब से यह फिट न बैठे फिर भी उनका अपना वजूद है।आपको किसी की चाल में मज़ाक सूझ सकता है।आपके लिए यह तफ़रीह होगा मगर एक बार संजीदा होकर देखिये।अगर कोई एहसास पल रहा है तो उसे जगह देना हमारा फ़र्ज़ है।क्या गलत है की कोई लड़का किसी लड़के से प्यार करे।वह प्यार किस हद तक जाए यह वह दोनों तय करें, हम या आप नही।एक करीबी कह रहे थे की अगर गे को छूट मिल गई तो पूरी सोसाइटी  इसमें लपेट जाएगी।तो भय्या जिसे ज़्यादातर लोग चाहे उसे क्यों रोका जाए।नौजवान जो शायद इसे अपनी पसन्द से चुनते हैं उन्हें मेरा पूरा समर्थन।जैसे हम हर एक को जीने का एक खुला माहौल देते हैं वैसे ही इन्हें भी दिया जाए।किसी गे का मज़ाक उड़ाने से पहले अपने वजूद को देखिये जो परम्पराओ का गुलाम है।जब आप अपने घर में बड़ो के बताए सारे रास्ते नही अपनाते वैसे ही यह एक कदम बढ़ कर नए रिश्ते बनाकर परम्परा तोड़ते हैं इसमें गलत क्या।
अब रही प्रकृति की बात तो अगर यह प्रकृति के विरुद्ध है तो इसे प्रकृति को रोकने दे आप दरोगा मत बने।अगर कोई लड़का आपको प्रपोस कर दे तो आप मना करें या मान जाए ऐसा खुला माहौल बनाए।एक बार दूसरे के मन में उठ रहे एहसास को इज़्ज़त दे शायद यही प्रकृति चाहती है।जब अपने हर चीज़ को आगे बढ़ कर अपनाया है तो इसे भी जगह दीजिये।मज़ाक तो मत ही बनाए।कुछ लोग कहते हैं की अगर आपको गे इतने ही पसन्द हैं तो खुद क्यों नही हो जाते तो वह सुन ले की अगर उन्हें लड़की इतनी ही पसन्द है तो वह लड़की क्यों नही हो जाते।मेरा सिर्फ इतना मानना है की अगर आपको,हमको आसानी से ज़िन्दगी जीने का हक़ है तो इन्हें भी उतना ही हक़ है।जो धर्म का हवाला देंगे वह पहले अपने गिरेहबान में देखें की वह धर्म का कितना पालन करते हैं।धर्म मज़ाक बनाने को रोकता है।झूठ,मक्कारी,फ़रेब समेत तमाम गुनाह से रोकता है तब वह रुकते नही और गे के मामले में दरोगा बन जाते हैं।हम,आप और वह गे अपनी अपनी ज़िन्दगी के मालिक हैं उनपर बंदिशे लगाकर हम अपनी ही कमज़ोरी को बढ़ा रहे हैं।जिस समाज में एक पूरी कम्युनिटी छुप छुप के जिए उस कम्युनिटी पर लानत है।एक बार बस एक बार दिल पर हाथ रख कर सोचिये की हमारा समाज कितना खूबसूरत है, तो इसमें हर एक को मुस्कुराने का पूरा हक़ है।सबको खिलखिलाकर हँसने का मौका दीजिये जिसमे सबकी ख़ुशी हो।बिना शर्म वह आपके सामने अपनी पसन्द चुन सकें और अपनी ज़िन्दगी को खूबसूरत बनाए।©

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