कुछ औरते जिस्म को बेच कर पेट पालती हैं।तो कुछ अपने जिस्म से बेजोड़ मेहनत करके घर पालती हैं।कुछ दिमाग का ज़बरदस्त इस्तेमाल करके परिवार पालती हैं।मेरे लिए यह सब तरह की औरतें एक सबक हैं।सीखने का सबक मगर मेरे लिए आज भी वह औरत हीरोइन है जो टेबल फैन लगाकर या कभी हाथ का पँखा लिए मोहल्ले भर के कपड़े ख़ामोशी से सिलकर बच्चों को पढ़ाती है।दूसरों की बची कतरन से अपने बच्चों का जिस्म ढकती है।अपने बच्चों को बिना गरीबी का एहसास दिलाए वह उन्हें आगे बढ़ने की ताक़त देती है।अपने घरेलू हुनर से तिनका तिनका जोड़कर नायाब तरक्की का बीज बोती है।परम्पराओ में ज़बरदस्त जकड़ी यह औरत दूसरों के कुर्तों पैजामो को अपने हुनर से ढालती है।चिकन की साड़िया काढती है।कुरेशिय से अमीर घरों के लिए फूल और बूटे चुनती है।कैंची से अपने बच्चों के मुस्तक़बिल की परेशानियो को काटती है।सबसे बड़ी खूबसूरती की सब्र और सादगी की बेमिसाल मूरत।ना शिकायत ना रोना बस एतबार की कल जो आएगा वह सुनहरा होगा।हमने हज़ारों की तादात में ऐसी मेहनती औरतो को देखा है जिनके बच्चों ने वह ऊंचाई पाई है की दुनिया रश्क करे।यह वह औरते थी जो किसी फैशन इंस्टिट्यूट में नही गई।जिन्होंने स्कूल में वक़्त नही मिला ।वोह जब उनका घर गरीबी में जूझा तो उन्होंने सुई,कुरेशिय,सिलाई मशीन,कैंची और धागे को थाम कर अपने बच्चो और परिवार की ज़िन्दगी बुन डाली।मेरी कहानियो में यही औरत हीरोइन होगी।जो न रोई, न माँगा,न इज़्ज़त को ठेस पहुंचाई, न परिवार का गुरूर तोड़ा।ख़ामोशी से बन्द दरवाज़ों में वह सिल दिया जिसकी सिलवटे आज भी कोई तोड़ नही सका।जब यह बूटे काढ़ रही होती हैं तो किसी को नहीं पता यह सब्र में डूबा झुका हुआ सर किस सर को उठाने के लिए लगा है।इन लोहे से मज़बूत और जापानियों से ज़्यादा हुनरमन्द औरतों को आप कस्बो,पुराने शहरों में देख सकते हैं।इनके बनाए नगीने इनके बच्चे जब तरक्की की उछाल मारते हैं तो उनकी इसी माँ की सूई कहीं दूर चमक में खो जाती है और हम सब उन हुनरमन्द उंगलियो को भूल जाते हैं।आज जब एक औरत के हाथ वही पीतल के बेंत वाली कैची देखी तो सब दिखने लग गया।©
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