वह बचपन क्या जिसमें आँसू न हों।अगर हर ख्वाहिश पूरी हो जाए तो कितना सादा सा वक़्त हो जाए।आँखों से नमक न निकले तो जिस्म की मिठास में कीड़े पर जाए।जब कोई बच्चा किसी चीज़ के लिए झल्लाकर रोता है तो एक अलग सा एहसास होता है, पहला एहसास बराबरी का होते है।अमीर और गरीब दोनों का बच्चा ख्वाहिश के लिए एक जैसे चीखता है।एक जैसे रँग के आँसू बहाता है।यही आँसू जो सबसे बड़ा प्रतीक हैं बराबरी का,झल से झील के जैसे बह उठते हैं।आँसू जो दिल को करीब लाते हैं।जो पत्थर से दिल पर अपना निशान छोड़ जाते हैं।जो बिना धब्बे डाले सारा दर्द बहा ले जाते हैं वह होते हैं आँसू।एक खूबसूरत लम्हे को कैद करते हैं आँसू।जब कोई बच्चा स्कूल में कदम रखे या न रखे की कशमकश में रो रहा होता है तो वह होते हैं खूबसूरत आँसू।जब कोई माँ बच्चे की ख़ुशी में रो देती है तो वह होते हैं बेशक़ीमती आँसू।आँसू एक ही वक़्त में विनाश और निर्माण की पहचान होते है।हर आँसू आने वाले वक़्त को सींच रहा होता है।करीब से देखिये तब आँसू आपको सतरंगी इंद्रधनुष सा बुनते हुए दिखेंगे।नमकीन पानी भरी भरी आँखों की खूबसूरती दिखेगी।आँसू की बड़ी खासियत होती है यह एक ही वक़्त में आपको मज़बूत और सामने वाले को कमज़ोर कर रहे होते हैं।यह हर गम को चुपके से सरका देने का रास्ता हैं।यह हर दर्द को मिटा देने का मरहम हैं।मुझे आसुंओं से बेहद लगाओ है।वह आँख ही क्या जिसमे आँसू न आए।वह दिल ही क्या जो न रोए।वह बचपन ही क्या जो न ललचाए।इसलिए सहेज के मत रखिये,बह जाने दीजिये इन खूबसूरत आँसुओ को।©
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