Thursday, June 9, 2016

कल आज कल

पढ़ाई पूरी करके उसे बेहतरीन नौकरी मिली।दुनिया को बदल देने वाला यह दिमाग ज़्यादा दिन नौकरी में नही टिका।उसका मन नौकरी की जगह सोशल वर्क में जा टिका।उसे लगा एक्टिविज्म ही उसको सुकून देगा।उसने एक्टिविज्म को जब थामा,तब उसे स्टेज से पूर्व अधिकारी कहकर मिलवाया गया।वह सोचे की आखिर वह तो एक्टिविस्ट है फिर काहे का पूर्व अधिकारी।
मन की भड़ास और अनुभवो को साझा करने के लिए उसने लेखन की ओर रुख किया।जब उसने लेखन की तरफ रुख किया तो उसे स्टेज से सोशल वर्कर कहा गया।लेखको की भीड़ में वह सोशल वर्कर था।जब कलम से भी उम्मीद जाती रही तो उसने बदलाव के लिए राजनीती की तरफ दिल लगाया।जब उसने राजनीती में कदम रखा तो उसे लेखक कहा गया।जब थक कर वह घर पहुँचा तो उसे बेवक़ूफ़ कहा गया।घर से बाहर दोस्तों में पहुँचा तो शातिर चालाक कहा गया।जब बच्चों में पहुँचा तो बड़ा कहलाया।जब बड़ो में पहुँचा तो बच्चा कहलाया।अजब हाल है।
वह जो था,वह है नही,जो है, उसे माना नही गया।हम सब इंसान को आज जो है वह मानते ही नही।उसके कल से आज की शिनाख्त करते हैं।वह कल क्या था उसके आज पर साया बन के मंडराता रहता है।हमारी आदत हो जाती है इंसान को उसके पिछले काम से इंट्रोड्यूस करवाने की।वह आज जो है, उसे कल पता चलता है।यह जो लफ्ज़ पूर्व है ना यही आज को धुन्धला देता है।कुछ पूर्व के कीर्तिमान में इतने गदगद होते हैं की आज में मगरूरियत से जीते हैं।कुछ का पूर्व उनके न चाहते भी पीछे लगा रहता है।हम भी आज को आज देखने में कहाँ खुश होते हैं।हो सकता है यह कन्फ्यूज़न पैदा करे,फिर भी बस इतना जो आज है वही को अहमियत दें।कोई पहले क्या था,उससे उबर आइये।बीता हुआ वक़्त अच्छा हो या बुरा वह आजकी जगह नही ले सकता।इसलिए आज को आज की तरह देखिये कल की तरह नहीं।©

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