आज यह बता दूँ की राजनीती के बिना कुछ भी नही है।आप ताउम्र बढ़िया लिखते रहें मगर राजनीती को न छुए तो यह मान लें की आपके शब्द सिर्फ मज़ा देंगे,बदलाव की ताक़त नही देंगे।खासकर एक्टिविस्ट और सोशलवर्कर बड़े ध्यान से समझ लें की राजनीति के सिवा वोह कोई नया काम नही कर पाएँगे।अगर आप समाज में कुछ बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं तो जितनी जल्दी हो सके राजनीति को समझना और उसकी ज़रूरत को सीख लें।सारी ज़िन्दगी थैला टाँगकर आप सिर्फ अपनी उम्र ही काट पाएँगे।आखरी विकल्प तब भी राजनीति ही होगी।बहुत से राजनैतिक दल हैं, जितनी जल्दी हो सके अपने विचारों के करीब राजनैतिक दल को पकड़ लें,बिना इसके कुछ होने वाला नही है।
मैं बड़े बड़े सोशल एक्टिविस्ट को जानता हूँ जो दो चार लोगों के लिए तरस रहे हैं।उन्होंने खूब थैले टांग कर समाजसेवा की मगर वोह अपने लोगों में ताक़त का एहसास नही करवा पाए।जिससे उनके पीछे चलने वाली भीड़ कब किसी और का वोटर हो गई यह जान भी नही पाए।दुनिया का कोई भी विचार बिना राजनीती के नही फैला है।
बड़े ध्यान से सुनो,आज मै कह दे रहा हूँ की जहाँ भी हो अपना एक राजनैतिक रूप धरो।राजनीती आज नही तो कल,कल नही तो परसों,तुम्हे ताक़त देगी।वोह ताक़त भले कामो में लगाना।तुम्हारी ताक़त तुम्हारे मदद के हाथों को बढ़ा देगी।तुम वोह सारे काम कर पाओगे जिनके लिए तुम्हे आज दूसरो का मुँह देखना पड़ता है।यह जो राजनीती है यह बहुत ताक़तवर चीज़ है।इसके होने से तुम्हारे कमज़ोर साथियो को ताक़त मिलेगी,उन्हें एक ख्वाब दिखेगा,एक रास्ता दिखेगा,वह हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे।
यहाँ बहस की बात नही,यहाँ तुम्हे मैं बताना चाहता हूँ की सत्ता का शीर्ष हो या विपक्ष की चौखट,सबसे तुम्हारे लोग संगठित होंगे।उनको मज़बूत सहारा मिलेगा।अलानी फलानी NGO को दवा,कपड़े,खाना बाटने दो,तुम सब अपने हित की विचारधारा के साथ जुड़ो।जब तुम सत्ता में होंगे तो तुम लाखों NGO के बराबर काम कर लोगो।लोग तुम्हे गलत,निरीह,भृष्ट दलों को दिखाएंगे,तुम विचलित मत होना बस राजनैतिक रस्सी को थामे रहो।बुराई तो सब ही जगह है, वहाँ खड़े हो जहाँ तुम ताक़त से हर बुराई से निपट सको,वोह सिर्फ राजनीती है।लोग बुरा कहेंयही लोग कल तुम्हारे पीछे सिफारिशों का पुलिंदा लिए खड़े मिलेंगे।
वक़्त की ज़रूरत को समझो और राजनीती की अहमियत भी।एक निरीह लीडर की अवाम भी कमज़ोर और डरी हुई होती है।मज़बूती से खड़े होकर,राजनैतिक झण्डा फहरा दो,उसके लहराने से निकली हवा बहुतों को ठंडक देगी।बस ख्याल रखना मज़हब,जाति, कट्टरता के साथ पनपे राजनैतिक दल से हो सके तो दूर रहो।फिर भी अगर तुम्हे ताक़त मिले तो,सोच कर कदम उठाओ।मेरा यक़ीन करो घर से बाहर तक सिर्फ राजनीती है तो क्यों न एक स्टैंड लो।यह बात आम लोगो के लिए नही है, यह हर उसके लिए है जो दो क़दम मुल्क़ और अपनों के लिए चलना चाहता है।पूरा इतिहास खंगाल डालो और देखो राजनीती है जिसने विनाश और निर्माण किया है।एक सिरा थाम लो और वैतरणी पार कर जाओ मित्र।©
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Friday, September 9, 2016
राजनीती ताक़त देगी
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