आओ तुम्हे हम गर्भ फाड़ना सिखाएँ।यह बड़ी कमाल की विधा है।आने वाले दौर में जिन्हें यह आता होगा,वोह अखबारो के पहले पन्ने पर जगह पाएँगे।वोह सियासत के शिखर पर पहुँचेंगे।इसमें भविष्य सिर्फ यहीं नही है।समन्दर पार तो इसमें सुनहरा कल है।काले झण्डे थामे जब तुम पेट फाड़कर गर्भ निकालोगे तो वोह रोमांचक वीडियो करोणों लाईक बटोरेंगा यूट्यूब पर।
हाँ तो सबसे पहला काम अपने दिल को काली चादर से ढक दो।दिल बेईमान है ,हो सकता है मौके पर लरज़ जाए,और तुम अपनी कला का प्रदर्शन ना कर पाओ।दिमाग की सुनना, वोह बड़ा शातिर है।हर माहौल में ढल जाता है।हाँ दूसरी बात घर से निकलते वक़्त अपनी सारी डिग्री विग्री को आग लगा देना,यह कोई काम की नही हैं।एक बार पलट कर देखना की तुम किस तरह के घर से हो,उसके ठीक विपरीत वाली गर्भवति महिला का पेट फाड़ना है।तो हाँ महिला के ठीक विपरीत धर्म का हथियार उठाना।याद रखना उसकी नोक बहुत तेज़ हो।
एक बार अपनी माँ या बहन या बीबी को ज़रूर देख लेना।ताकि जब तुम तलवार या त्रिशूल की नोक पर गर्भ को टांग कर विजयी मुद्रा में निकलोगे तो तुम्हारी कलाई लचके ना।भीड़ को देखकर ज़रा भी मत घबराना।यह तुम्हारे ही लोग हैं, जो चाहकर भी तुम्हारी तरह जिगरे वाला काम नही कर सकते।मगर यह नारे लगाकर,तुम्हारी शौर्य गाथा बड़े चाव से सुनाएँगे।यह बुज़दिल लोग हैं जो गर्भ को तलवार पर टाँगकर नही चल सकते,इसलिए यह जो जहाँ है, वही से तुम्हारा समर्थन करेगा।
तुम यक़ीन जानो अगर ईश्वर ने तुम्हारे इस काम की तुम्हे सज़ा भी दी तो ये भी मानो उतनी ही सज़ा इन नारेबाज़ो समर्थको को भी मिलेगी।ईश्वर न्याय करता है।हाँ तो एक बार और जब तुम यह करने चलना तो घर में पले जानवर या सड़क पर मिलने वाले जानवरों से आँख मत मिलाना,उन्हें शर्म आ जाएगी।तुम दिल में नफ़रत की अंगेठी को दहकने देना।जब तुम नफ़रत में होंगे तो तुम वोह सब कर जाओगे,जो तुम शैतानियत में सोचते हो।तुम्हे इंसान कीट पतंगे नज़र आएँगे।तुम बस इंसान मत बनना वरना यह काम कर नही पाओगे।
मेरी सुनो रास्ते दो हैं।या तो गर्भ को तलवार त्रिशूल की नोक पर टाँग कर जश्न मनाओ या तो हाँ या तो मोहब्बत के लिए निकल जाओ।हर आने वाले बच्चे के लिए खूबसूरत दुनिया बनाओ।अपने बच्चों के लिए ख़ून से सनी ज़मीन मत बनाओं।जितना हो सके सम्प्रदायिक,खूनी, वहशी,दँगाई से दूर रहो।वरना तलवारों और त्रिशूलों पर गर्भ लटकते लटकते कब आपका ख़ून उसमे मिल जाएगा पता भी नही चलेगा।और हाँ ईश्वर का न्याय होगा,जिसमे गर्भ टाँगने वाला और उसे टाँगे हुए को मौन समर्थन देने वाला,दोनों एक ही पलड़े पर होंगे।
यह एक मज़हब या धर्म का विषय नही है।यह हर उसका चेहरा है जो गाहे बगाहे दूसरे के ख़ून पर क़हक़हे लगाता है।आओ मोहब्बत से आगे बढ़े।आओ अपने बच्चों की खूबसूरत ज़मीन तैयार करें।आओ सब खूबसूरत और नरम बनाने के लिए बेचैन हों।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Wednesday, October 19, 2016
वहशी
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