चन्द्र शेखर आज़ाद ने जिस रिवाल्वर से खुद को शहीद किया था वोह उनकी लाई हुई थी,जो खुद बंदूख चलाना सीख रही थीं।वोह जो अपने पति के साथ कन्धे से कन्धा मिलाती हुई उनसे बहुत आगे निकल गई।वोह जिसने क्राँति के सबसे शिखर पुरुषों को अपने ख़ून से तिलक लगाया था।जिसकी चलाई गोली जनरल हैली को नीचे गिरा निकल गई।जो उस वक़्त नही डरी।जिसके सभी साथी एक के बाद एक फाँसी के तख़्ते पर झूलते रहे,मगर वोह नही डिगी।
वोह थीं दुर्गा भाभी।वही दुर्गा भाभी जो एक वक़्त में क्रांतिकारीयों को हर तरह की मदद पहुँचा रही थीं।उन्हें हथियार पहुँचाती तो कभी खाना।कभी कपड़े तो कभी ख़त।उनके ज़ख्मो पर मरहम तो माथे पर हौंसला देती।मायूस होते दिलों को जीत की ललक के लिए तड़पाती।खुद जलकर लोहे को आकार देती रहीं।जब सभी साथी शहीद हो गए तो वोह अकेली हो गईं।
इस अकेलेपन में उठाए कदम ने ही दुर्गा भाभी को गढ़ा।उन्हें निखारा।जानते हैं वोह क्या था,वोह था दुर्गा भाभी का स्कूल।दुर्गा भाभी ने लखनऊ में आकर स्कूल खोला।महज कुछ बच्चों से उन्होंने गुलामी को तोड़ने की नीव डाली।जब तक लड़ सकी लड़ी,फिर तैयार करने में जुट गई।दुर्गा भाभी को दूसरे में हौंसला और हिम्मत भरने में महारत हासिल थी।उन्होंने सोचा की भारत का मुस्तक़बिल यह बच्चे हैं, इनकी परवरिश बेहद ज़रूरी है।बच्चों में देशप्रेम और मानवता की ललक जगाना दुर्गा भाभी का मकसद बन गया।दुर्गा भाभी के उठाए मज़बूत कदमों का यह लखनऊ गवाह है।लाहौर के भगवती चरण बोहरा के घर से क्राँति की मशाल थामे दुर्गा भाभी लखनऊ में कभी न बुझने वाली मशाल दे गई।आज उस स्कूल को देखता हूँ तो मायूसी ज़रूर होती है उसकी हालत पर मगर उसकी बुनयाद दुर्गा भाभी की तरह हौसला देकर,मुस्कुरा देती है।
आज दुर्गा भाभी के जन्म दिन पर उन्हें याद कीजिये।सोचिये यह जो आज़ादी मिली है, इसमें किसका ख़ून बहा है।किसने अपने घर उजाड़ कर आपको यह भरा पूरा मुल्क़ दिया है।वोह कौन लोग थे जो बिना परवाह किये अपनी जान को दाँव पर लगाए थे।उनमें अपने लोगों के लिए किस क़दर मोहब्बत थी।वोह मुल्क़ को एक देखते।दुर्गा भाभी ने मोहब्बत,सब्र,इज़्ज़त,इंकलाब,मेहनत,तामीर,तालीम की वोह इमारत रखी जो आज भी रौशन है।बस अगर मुल्क़ से वाक़ई मोहब्बत हो।वाक़ई दिल कहता हो की यह आज़ादी के सिपाही सच्चे थे,वाक़ई रूह कहे की हमारा मुल्क़ तरक्की करे,तो एक बार फिर से मोहब्बत से रहिये।दिलों को एक करिये।नफ़रत को हराईए।साबित करिये नफ़रत,साम्प्रदायिक और फूट डालने वाले पापी,देशद्रोही,राक्षसी लोग हैं।आप सब एक रहिये तब ही तो दुर्गा भाभी की क़ुरबानी को सलाम कर पाइएगा।तब ही आप देशप्रेमी हैं।तब ही आपकी और भारत की आत्मा एक है।तब ही आप और मैं, हम हैं।यही,हम भारत हैं।©
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, October 6, 2016
दुर्गा भाभी
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hafeezkidwai
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