Friday, December 30, 2016

ओह 2017

तुम चले गए।जैसे हमेशा जाते थे।कुछ खटास ,कुछ मिठास,कुछ नमकीन छोड़ गए।तुम्हारा जाना हमेशा खला।दिल में इस वक्त सिर्फ़ और सिर्फ तुम हो।मेरे इस दिल,धङकन और सांसों में सिर्फ तुम हो।मै मजबूर हूँ हमेशा की तरह ।
मै चाहूं या ना चाहूं मगर वह आएगा और उसके आने पर तुम्हारा जाना तय है।यही तो विरह है।तुम यकीन मानों अगर मेरे बस में होता तो मै उस दौर,उस साल को कभी ना जाने देता जिसमें मै बेसाख्ता हँसता था।जो जी में आए करता था बिना घबराए ,बिना बेचैनी के मगर वह भी चला गया।बहुत से चले गए और अब तुम भी जा रहे हो जाओ ।अब मै नए साल का इस्तेकबाल कर रहा हूँ बिना किसी हसरत के।तुम्हें अलविदा 2016, तुम्हारी ही दी ताकत से कह पा रहा हूँ सलाम 2017।
बस अब तुम भी इम्तिहान ना लेना।तुम नतीजा सुनाना नए दोस्त।तुमसे वादा बाकी सबको पीले पन्नों में भुलाकर सिर्फ तेरा हुआ हूँ।मैं कोई नए वादे कभी नही कर सका।बस तुम जैसे चाहना मोड़ते जाना।मुझे तुम्हारे काँटों या फूलो से कोई परहेज़ नही।मैं नही कहता की 2017 तुम सिर्फ खुशियाँ लाना,तुम जैसे चाहो आओ।तुम्हारा स्वागत है।तुम चाहो तो शुरआत से आखरी तक आँखों को आँसुओं से भर दो,तुम्हारी मर्ज़ी।मैं सच बताऊँ तुमको लेकर मुझे कोई हलचल या उम्मीद या मायूसी नही है।मुझे पता है मुझे क्या करना है।उस करने में अगर तुम साथ रहे तो ठीक वरना अगला साल सही।
हाँ एक बात तो कहेंगे की मैं पिछले गुज़रे हर साल से बेहद खुश रहा हूँ।सभी सालों में रोया भी हूँ।जीता हूँ तो बहुत बार हारा हूँ।यानि सब तरह के मज़े रहे।तो तुम भी एक सा स्वाद मत देना।मैं जब जीत रहा होऊँगा तो तुम हमे ज़बरदस्त हराना ताकि हम ज़िन्दगी के चटखारे ले सकें।जब रोज़ हार रहा होऊं तो एक बार जिता देना ताकि मुस्कुरा सकूँ।खैर मेरी फेहरिस्त का क्या तुम खुद बड़े वाले बौड़म,अल्हड़,फक्कड़ हो 2917।।।।जो दिल में आए करना।बस इतना बेहद मुबारक ए नए साल।💐💐💐

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