पूरा बाग़ ज़बरदस्त फलों से लदा हुआ था।कोई पेड़ बाकि नही रहा जिसकी डालों को फलों ने झुका न रखा हो।पूरी फसल को देख बाग़ का मालिक ख़ुशी से झूम उठता।मगर धीरे धीरे उसने देखा की बाग़ के कुछ फल खाकर लोग मर रहे हैं।मालिक ने फौरन ही अपनों से राय लेना शुरू की।पता चला की बाग़ में कुछ पेड़ों के फल ज़हरीले हैं।अब पूरा फलों से लदा बाग़ उसे आँखों में चुभने लगा।
उसने हुक्म दिया की सारे फल तोड़ दिए जाएँ।सब फल तोड़कर ज़मीन पर बिछा दिए गए।उसने उन फलों को कुचलवा कर खत्म कर दिया।अब वोह सुकून में था की उसने बाग़ के ज़हरीले फल खत्म कर दिए।
अब सुनिए की क्या यह तरीका सही है।
अगली फसल में फिर निकलेंगे ज़हरीले फल।उसका क्या।तरीका तो यह था की ज़हरीले पेड़ की पहचान की जाती और उसे काट दिया जाता।ऐसे आगे निकलने वाले फलों को भी कोई नुकसान न होता।
अगर समस्या की जड़ पर चोट नही की गई तो हम सिर्फ अपना वक़्त ही काटेंगे।जड़ काटना मुश्किल और लम्बा काम है जबकि फसल को काटना बड़ा आसान।एक झटके में खड़े खड़े फसल काटने के फैसले लिए जा सकते हैं मगर ज़हरीले पेड़ को काटना लम्बा वक़्त माँगता है।रिसर्च माँगता है।
दूसरी उतावला आदमी सारी फलों की फसल को गिराकर कह सकता है की उसने बड़ा काम किया है जबकि वोह बाग़ में ज़हरीले पेड़ काटता तो उसे यह करते कौन देखता।
अब अपनी ज़िन्दगी में झाँकिये।अगर कुछ बुरा लग रहा है तो उसकी जड़ को पकड़िये और ख़ामोशी से धीरे धीरे खत्म करने की कोशिश कीजिये।अपनी बुराइयों को अलल ऐलानियां दूर करने का परचम मत लहराये।ख़ामोशी से अपने आपको हर बुराई से दूर रहने को तैयार कीजिये।
जितना हो सके खुदपर मेहनत कीजिये।आपकी ही ज़िन्दगी दूसरे के लिए सबक बनेगी।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Friday, December 2, 2016
जड़ पर प्रहार
Labels:
hafeezkidwai
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment