आओ तुम्हे तुम्हारे दिल से मिलवाता हूँ।वही दिल जो दिन भर बेहिचक,बिना रुके,बस धड़क रहा है।उसकी धड़कन तुम्हारे अच्छे बुरे कामो से नही रूकती।वोह तुम्हारे चरित्र का भी मोहताज नही है।उसका काम है की गोश्त में तहों फंसी नसों में ख़ून पहुँचाना।
हिप्पोक्रेटन स्कूल से दिल के दरवाजों को खोलने का जो सिलसिला चला वोह आजतक जारी है।तुम भी अपने दिल को हर वक़्त अपने साथ रखते हुए उतने ही अंजान हो जितना कोई दूसरा।दिल की परतों में उतरो तो देखो कैसे वोह सिकुड़ रहा है।उसका सिकुड़ना उसकी हार क़तई नही है।उसका सिकुड़ना उसके फैलने की वजह है।
मैं जब कहूँ अपनी नज़रें नीची करके दिल की जगह पर देखो,तो तुम्हे वहाँ फूल की खुशबू भी आएगी।सड़े जानवर की बदबू भी आएगी।तुम देखना तुम्हे वहाँ मक्खन सा पिघलता हुआ कुछ दिखेगा,वहीं तुम्हे पत्थर भी नज़र आएँगे।कभी तुम्हे लगेगा की रुई का गोला रखा है तो कभी एक कांटा सा चुभेगा।
यह जो दिल है न यह बड़ा थियेटर आर्टिस्ट है।तुम्हारा दिमाग जैसा सोचेगा उसे कई सौ गुना बढ़ाकर यह दिल स्टेज पर परफॉर्म करेगा।शुरआती दिनों में वैज्ञानिको ने कहा की दिल का काम हवा को नसों में पहुँचाना है।फिर आने वाली जेनरेशन को लगा यह थ्योरी गलत है।उन्होंने कहा की नही यह हवा नही,यह ख़ून को पहुँचाता है।मगर दोनों लोग तुम्हारे दिल की नसों में उलझे रहे।कोई गहराई में डूबी चीजों में क्यों नही कूदा।
क्योंकि उन्हें पता है की यह इतना बड़ा थियेटर आर्टिस्ट है की अगर हमने कहा की यह पत्थर सा कठोर है, तो वोह मोम बन जाएगा।हमने कहा की यह फूल सा कोमल है, तो वोह कांटा बन जाएगा।यह दिल किसी के बस में नही है।
यह आँसू देखकर रोए ज़रूरी नही।यह मुस्कुराहट देख हँसे ज़रूरी नही।यह वैसे नही देख सकता जैसे कोई दूसरा देखना चाहता है।दिल सिर्फ और सिर्फ आपकी भावनाओं,दिमाग,सोच से अपने रँग,रूप,किरदार को बदलता है।अगर दिमाग को खुशबू पसन्द है तो यह महकाएगा।अगर नफ़रत पसन्द है तो यह भड़काएगा।अगर इंसानियत पसन्द है तो यह ज़िन्दगी की अहमियत सिखाएगा।अगर ख़ून पसंद है तो यह लोगों को बाँटना बतलाएगा।
आपका दिल आपकी सोच को पर्दे पर उतार कर खुद दिन भर धड़कता हुआ किरदारों में खेलता रहेगा।मर्ज़ी आपकी है की आपको खुशबू पसन्द है या सड़ाँध।दिल को तो बस कैरेक्टर में आना है।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, December 8, 2016
यह जो दिल है
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hafeezkidwai
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