Friday, June 16, 2017

अली की शहादत

जिन्हें लगता था की उनको खन्जर से खत्म कर देंगे,आज वह कहाँ हैं पता नही।जो यह समझते हैं की किसी को क़त्ल करके वह जीत जाएँगे असलियत में वह हार रहे होते हैं।एक मज़बूत विचार वाले व्यक्ति का क़त्ल उसे और ज़्यादा दिलों में बिखेर देता है।दिलों में बिखरते ही वह पुश्त दर पुश्त नीचे ज़िंदा होता चला जाता है।

उनकी पीठ में धोखे से जो खन्जर घोपा गया,उसने जिस्म को भले ही नुकसान पहुँचाया हो मगर रूह को इतना आज़ाद कर दिया की वह ज़मीन के हर हिस्से में बिखर गई।उन्हें शहीद करने वालों को लगा था की चलो आज से इनका क़िस्सा खत्म,मगर कमअक्लो ने यह नही सोचा की आज से वह सूरज की तरह चमकेंगे।उनकी चमक इन जुल्मियों को अँधा कर देगी।पीठ पर उनके ज़ख्म हुआ मगर वह नासूर ज़ख्म देने वालो के लिए बन गया।

हज़रत अली की शहादत यक़ीनन दिलों में रंज पैदा करती है।मुझे लगता था की आखिर क्यों नही उस वक़्त मस्जिद की दीवारें दरक गईं।जब हज़रत अली दर्द से दांत कस्ते होंगे तब क्यों नही मस्जिद की मीनारे ढह गईं।आखिर अरब कैसे यह बर्दाश्त कर गया।तब मुझे शहादत का फलसफा समझ आया।बहुत बार हाँ बहुत बार ख़ुदा जब ज़िंदा जिस्म से काम ले चुकता है और उसका काम पूरा नही हुआ होता,तब वह ऐसे जिस्म को शहीद करता है।

यह शहादत फिर हज़ारों साल तक ज़ुल्म,बेइंसाफी के खिलाफ लड़ने की रौशनी देती है।हज़रत अली की शहादत ने मक्के,मदीने,बसरा,दमिश्क सबकी गलियों में ज़ुल्म के खिलाफ लोगों को एक कर दिया।उनके ख़ून का एक एक क़तरा ख़ुदा के इंसाफ की गवाही बनने को बेताब हो गया।मुझे हैरत है की हज़रत अली उस माटी से निकल कर दुनिया भर में बस गए।सबने इल्म के बादशाह के सामने सर झुका लिया।

आज उनकी शहादत पर इतनी तो गाँठ बांध लो की कल भी ज़ुल्म से लड़ने के लिए शहीद होना पड़ता था,आज भी शहीद होना है।कल भी चालबाज़ लोग क़त्ल को आखरी हथियार समझते थे,आज भी समझते हैं।कल भी इंसाफ पसन्द को धोखे से,मक्कारी से बदनाम करने का चलन था,आज भी है।कल भी बादशाही मशीनरी अवाम की आवाज़ को दबाने उठती थी,आजभी सरकारी मशीनरी अवाम की आवाज़ को कुचलती है।कल से आज सिर्फ आबादी की गिनती बढ़ी है, वरना हालात वैसे ही हैं।

जिन्हें आज ज़ुल्म से लड़ना है, अवाम की आवाज़ बनना है।बेइंसाफी को ज़मीदोज़ करना है वह हज़रत अली से सीखें।अपना दिल बड़ा करें,किरदार की बुलन्दी को समझें और बेख़ौफ़ सीना तानकर,ज़ुल्म की आँख में आँख डालकर मुकाबला करें।शहादत अगर आ भी गई तो शाही तख्त पर बैठे खास लोगों की ही चूले हिलेंगी।उनकी दीवारें चिटखेंगी।वह तुम्हारे बहते ख़ून में हमेशा के लिए खत्म हो जाएँगे।बस एक बार अली को दिल में उतार लो साथी।।।।

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