Friday, June 23, 2017

हम सब खत्म होंगे

एक दिन यह भी आएगा जब भीड़ जुटकर हैशटैग लिखने वाले को मारेगी।वह चीखकर कहेगा की उसके नाना को अंग्रेज़ों ने बागी कहकर तोप से उड़ा दिया था।तब भीड़ कहेगी लो अब हम भी उड़ा देंगे।फिर वह दर्द में चिल्लाकर कहेगा की उसके दादाओं को अंग्रेज़ों ने दसयों साल जेल में डाल दिया की तुम भारत को आज़ाद कराओगे।तब भीड़ कहेगी हम तुम्हे जेल भी नही देखने देंगे।

यह सच है अब सरकार,शासन से दूर लोग भीड़ बन चुके हैं।हमारे अपने भीड़ बन चुके हैं।पता नही कब,कहाँ कौन मेरा नाम ले और सबकी भावनाओ चिथड़ा चिथड़ा हो जाएँ।बेचारे अपनी टूटी फूटी भावनाओ को रफ्फू करने के लिए हमारे ख़ून का सहारा लेंगे।बड़ी ख़ुशी होगी जब किसी के बेक़रार दिल को सुक़ून देने के लिए मेरे ख़ून की ज़रूरत होगी।

मुझे अब कोई शिकायत नही,मुझे पता है भीड़ के पागल होते हालात से मेरे करीबी भी मायूस हैं।वह इसे गलत कह रहें हैं मगर वह हमसे ज़्यादा मजबूर हैं।वह बेचारे अपने घरों में बन्द कमरों में भी इनकी आलोचना नही कर सकते क्योंकि खूनी भीड़ के मोहरे उनके घरों तक पहुँच चुके हैं।उनके जासूस है।हम तो कम से कम खुलकर इन्हें बुरा भला तो कह सकते हैं।हमे अपने दोस्तों को देख बड़ी ख़ुशी होती है की कल जब भीड़ हमे कुचल कुचल कर मारेगी तो यह कम से कम अफसोस में तो होंगे ही।

हम उन चालाक लोगों से रत्ती भर भी बात नही करना चाहते जो भीड़ के अन्याय और अधर्म को किसी दूसरी भीड़ के अन्याय और अधर्म से मिलाकर सब कुछ सही साबित करदे।काश जब मेरे जिस्म के टुकड़े हों तो वह बोटियाँ हमारे घर न आए।वह इनके खानों में चली जाए।इनके आलू के साथ मेरी टाँग की बोटी इनकी ज़बान को बढ़िया ज़ायका देगी।

अब एक ऐसी हुकूमत है जो हमारी नही है।उसे हमारे ख़ून से लहलहाने का मौका मिलता है।मुझे ताज्जुब है की वह क्यों नही एक साथ बीस करोण लोगो को मारने का हुक्म दे देती है।हिम्मत से काम लें उन्हें सिर्फ और सिर्फ यही लिए चुना गया है और चुना जाता जाएगा।तो अपनी आर्मी लगाकर,यह प्राइवेट वाली नही,असली वाली लगाकर,एक साथ उड़वा दें।अगर उन्हें या उनके मानने वालों को यह इलज़ाम लगता है तो ज़रा दिखा दें की लिजलिजी सरकार ने एक बार भी अधर्मी भीड़ के राक्षसी होने पर अफसोस जताया हो।

वैसे इतना यक़ीन हमेशा रहेगा चाहे सारे घोड़े खोल लो,यह देश गाँधी,बुद्ध से ही पहचाना जाएगा।इसकी खासियत अनेकता में एकता ही रहेगी।चाहे एक एक को मार डालो हमे जब तुम पीट रहे होगे तब भी हम वही महसूस कर रहे होंगे जो मेरे नाना दादा कर रहे थे।उन्होंने उस वक़्त मुल्क़ के लिए मौत चुनी थी,हम आज चुन रहे हैं।चाहे सब वहशी हो जाए फिर भी हमारे देश की माटी वैसी ही नरम और उपजाऊ रहेगी।यहाँ धर्म भले अधर्म में बदल जाए मगर मुल्क़ वैसा ही खूबसूरत रहेगा जिसकी हवा हमे अंत तक लगेगी।काश इसी ज़मीन में मारा जाऊँ,इसकी खूबसूरती बरकरार रखने के लिए मारा जाऊँ।ज़िन्दगी का क़र्ज़ मिट जाए।हमारा ख़ून मोहब्बत की फसल का खाद पानी ही बनेगा।

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