Monday, June 5, 2017

तेल ही तेल

सर का भी अजब हाल है।बिल्कुल किचन टाइप।जिस वक़्त किचन में जिस तेल।का बोलबाला होता है उसी तेल की सरहज सर पर विराजती है।किसी ज़माने सर पर सरसों के तेल का एकछत्र राज था।कुछ लोग तो इतना लगा लेते की दो ठौ पराठे तल जाएँ।एक आध की कनपटी से तेल ऐसे बहता जैसे कोई पुरानी टूटी लाख कसने पर भी राल की तरह पानी बहा रही हो।
खैर फिर तिल्ली का तेल और एक से एक अजब नाम वाले फलों के तेल सर पर आ गए।जितना ज़िन्दगी में बादाम देखे न होंगे उससे ज़्यादा बादामो का तेल बालों को पिला डाला।नारियल का तेल तो जाड़ो में अपने आप में ईमानदार इंसान की तरह बालों को अकड़ा देता।जाड़ो में नारियल तेल से भीगे बाल सलाखों की तरह खड़े रहते।पैराशूट पर बैठे भले न हो मगर पैराशूट नारियल तेल पूरे बदन पर विराजा है।
कभी पलट कर झाँकिये की कितने तरह के तेल भी आपके बाल पी चुके हैं।मगर मजाल है की किसी तेल ने झड़ते बालों को रोकने की ज़हमत की हो।हमे तो लगता है जो बाल झड़ रहे होते हैं वोह तेल की फिसलन से और आसानी से झड़ जाते हैं।नवरत्न की तो बात ही क्या करनी,पिपरमिंट को भी कमबख़्तो ने सर में लगवा दिया।इनका बस चले तो जले डीज़ल को भी चवन्नी बढ़ाकर अमिताभ के हाथ बिकवाकर सर में ठुस्वा दें।हम तो तेल लगाते ही नही,बीमारों जैसी शक्ल लगने लगती है

ज़रा सा ठंडा तेल बालों में लग गया तो और सर दर्द।हमे मूली के पत्तो पर पैर पड़ने से ही जुखाम नही होता है बल्कि पिपरमिंट मिले तेल के सम्पर्क में अगर बाल आ गए तो नाक पनारे की तरह चलने लगती है।इनसे तो दूरी ही भली।वैसे आप तेल लगाइये,सर में लगाइये,या जहाँ मन करे लगाइये।अंदरखाने की खबर दे दे रहें हैं,वरना कहियेगा इत्ता पढ़ा मिला क्या,,,,तेल सीबीआई के छापे से भी बचाता है।।

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