हो सके तो दो दिशाओं में रखे दिलों की एकसी धड़कन पर कान रखना,दोनों से एक सा संगीत उभर रहा है,ऐसा संगीत जो ईश्वर ने इनके दिलों के सिवा भला कहाँ सुना होगा।जब एक तरफ राबिया बसरी थी तो दूसरी तरफ मीरा थीं।
राबिया ने रेत पर पाँव धरा और निशान मीरा के पाँव के उभरे।बसरा की गलियों में राबिया ने मोहब्बत को मुट्ठी में भर कर उछाला और प्रेम की आँधी यहाँ मीरा के आँचल में आ गई।सर से दुपट्टे को खींच राबिया ने चीखकर कहा की हाँ मुझे उससे मोहब्बत है जिसके सामने सब झुकते हैं तो मीरा ने सर से घूँघट को उलट कर कान्हा से प्रेम का एलान कर डाला।अजब थीं यह दो औरतें, अजब था इनका प्यार।दोनों ने ज़माने से बगावत की और दोनों ने मोहब्बत की,मोहब्बत उससे जिससे क्या औरत क्या आदमी सब डरते हों,पूजते हों।
राबिया एक हाथ में आग और एक हाथ में पानी की बाल्टी लिए चली जा रहीं थीं, की किसी आदमी ने कहा राबिया इश्क़ में किस क़दर बहक गई हो जो आग और पानी साथ लिए जा रही हो।पलट कर राबिया ने कहा मैं आज दोज़ख में पानी डालकरउसकी आग बुझाकर उसे ठंडा कर दूँगी और जन्नत में आग लगा दूँगी।उस फ़र्क़ को मिटा दूँगी जो एक को नज़रे झुकाने पर मजबूर करे और एक को गुरूर भरी नज़र दे।पैर को छन छन पटकते जब राबिया इश्क़ हक़ीक़ी में जा रहीं थीं तो उसकी छनक यमुना के कनारे रखी बाँसुरी में हरकत पैदा कर रही थी।
दूसरी तरफ रेगिस्तान से प्रेम में मतवाली मीरा सब छोड़कर गोकुल पहुँच गईं।गोकुल में गोपाल की चौखट के पीठाधीश ने मीरा से यह कहकर मिलने से इंकार कर दिया की वह पुरुष हैं और किसी महिला से नही मिलते।मीरा ने पलट कर कहलवा दिया की वाह,मैं तो समझती थी की इस पृथ्वी पर केवल एक ही पुरुष है और वह है मेरे कान्हा।।यहाँ तो और भी पुरुष हैं।यह जवाब सुन मीरा के पास नँगे पाँव भागकर आए पीठाधीश की तड़प वृंदावन में उठी मगर महसूस बसरा में की गई।
ऐसा नही है की मुझे इश्क़ नही या इसका एहसास नही मगर मैं आजभी मीरा और राबिया के दिल में उठी मोहब्बत से बाहर ही नही आ पा रहा हूँ।ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की ज़ंज़ीर तो तोड़े मगर अपनी रौशनी से कई सदियों को जोड़ दे।जिसको पढ़ भर लेने से दिल की बेचैनी सुक़ून में बदल जाए।एक ऐसा इश्क़ जिसके सामने आसमान झुक जाए और उसपर पलथी मारे बैठा ईश्वर,बाहें खोल ज़मीन पर उतर आए।जिसमे डर न हो,जिसमे लालच न हो,जो हो तो और कुछ न हो,ऐसा इश्क़।।मैं फरहाद,मजनू,रोमियो से पार मीरा और राबिया की धूँधली शक्ल देख रहा हूँ।वह मुस्कुरा रहीं हैं और शब्द यहाँ बहते चले जा रहें हैं....
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