हल्की हल्की गर्मी तो कभी हल्की ठण्ड।बारिश भी भिगो भिगो करके दिमाग को ताज़ा कर देती।यह मौसम आज का नही है, सदियों से हैं।आषाढ़ की खूबसूरती और ताज़गी ने हमेशा हमारे दिमाग की बन्द तहों को खोला है।बहुत करीब से देखिये तो जुलाई में खुलने वाले स्कूल उसी परम्परा का हिस्सा हैं जो कहती है की यह मौसम नए बीज के अंकुरण का है।
आषाढ़ की पहली पूर्णिमा इसीलिए तो वेद व्यास को आज ही जनमती है।संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान और महाभारत के रचयिता वेद व्यास के जन्म में छुपी इस पूर्णिमा की गुत्थी बड़ी ही गहरी है।धरती पर मानव जन्म से इन दिनों को ज्ञान अर्जन के सर्वश्रेष्ठ दिनों में गिना जाता रहा है।यह सच भी है जुलाई में रोपा ज्ञान धान की फसल की तरह अच्छी पैदावार करता है और ज़्यादा समय तक ज़हन में रहता है।
आजके दिन गु और रु को समझने का भी दिन है।गु है अंधकार और रू है उसे रोकने वाला।तभी तो वह है गुरु और आज है पूर्णिमा।प्रकाण्ड विद्वान के जन्म की पूर्णिमा जिसने अपने रचे पदों को ऐसे शिष्यों को कंठस्त करा दिया की वह रचनाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी आज ज़मीन के छोटे से हिस्से पर रहने वाली सबसे बड़ी आबादी में फैल गया।यानि महर्षि वेद व्यास का जन्म।यानि व्यास पूर्णिमा।यानि गुरु पूर्णिमा।
आज उन हर गुरु को याद कीजिये जिन्होंने कान उमेठे।जिन्होंने छड़ियों से अपने ज्ञान को हमारे दिमाग की जगह हथेली में ठूंसा।उन्हें भी याद कीजिये जिन्होंने हमे इंसान बना दिया।हर एक के हिस्से में भले वेद व्यास न हों मगर हर एक के हिस्से में गुरु ज़रूर रहें हैं।अब वह गुरु चाहे जिसे अँधेरा समझते हों,उन्होंने उसे दूर तो किया है।मेरे लगभग सभी गुरु मानवता के बड़े पैरोकार रहे।हम सबकी ज़िन्दगी में गुरुओं की छाप दिखती ही है।आज गुरु पूर्णिमा पर हर उसको भी याद करने का वक़्त है जिसने हमे कुछ भी सिखाया।यह गुरु हमारे छोटे छोटे वेद व्यास ही तो हैं।गुरु पूर्णिमा को अंदर झांकिए और हो सके तो इंसान बन जाइये।क्योंकि गुरु शिष्य परम्परा सिर्फ इंसानों में हैं और इंसान होने की पहली शर्त ही मोहब्बत,समर्पण,त्याग है।बधाई सभी गुरुओं को......
No comments:
Post a Comment