दो का दो ,दो दूनी नौ
नही सर दो दूनी चार
निकल जाओ कक्षा से
....
राम जी बनारस में पैदा हुए
नही सर वह तो अयोध्या
निकल जाओ तुम भी
....
अहमदाबाद देश की राजधानी है
नही सर वह तो दिल्ली
अबे तुम भी निकल लो कक्षाद्रोही बे
....
सर आप यह सबको गलत पढ़ा रहें,जो टोक रहा उसे निकाल दे रहें,हम इसकी शिकायत प्रिंसपल से करेंगे
अबे तुम्हे तो मरना होगा,वह भी प्रिंसिपल के हाथ हाहाहाहा
.....
जो पढ़ा रहें हैं, पढ़ लो,करोणों लोग वही पढ़ रहें,बस तुम्है स्मार्ट बन रहे हो ।ई जान लो प्रिंसिपल जी और हमसे स्मार्ट ह्याँ कोई नही ।कच्छा भक्त बनो,ओह सॉरी कक्षा भक्त बनो या फिर कक्षाद्रोही । पढ़ो या मरो ।केवल दुई विकल्प हैं....सब मिलकर बोलो जय श्री.....अच्छा रहन दो,ई तो क्लास है.. ओए चपरासी सब बिद्यार्थी जन की रस्सी खोल दो,पढ़ाई हो गई,स्मार्ट क्लास आज पूरी भई ।जो निकाल दिए गए हैं, उनका सरीर दिखना नही चाहिए यहाँ,वरना....
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, August 2, 2018
कक्षाद्रोही
Labels:
hafeezkidwai
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment