Tuesday, October 15, 2019

रुक जाओ

आप नही पढ़ेंगे अगर हम लिखें की नौकरी जा रहीं हैं । आप ध्यान भी नही देंगे मुझपर अगर मैं कहूँ की अर्थव्यवस्था मुँह के बल गिर रही है । आप को न यह पढ़ना पसन्द है और न ही इसपर सोचना,क्योंकि आप मज़े में हैं । मज़ा भी यह कि दूसरे धर्म के छक्के छूटते दिख रहें हैं, तो चलो खींस निपोड़कर मुस्कुराया ही जाए  । दूसरों की बर्बादी के लिए सरकार चुनते हुए,खुद किस क़दर बर्बाद हो गए,आपको यह सुनना भी पसन्द नही है ।

हमारा क्या है, चाहे जितने झींगुर बोलें,चाहे जितने भेड़िये घेर लें,चाहे जितने बिज्जू बदन को नोचें,सच तो बोलना है, बोलेंगे,सच पर चलना है, चलेंगे । सच यह है कि आजतक किसी कौम, किसी जाति,किसी धर्म को मटियामेट करने का ख्याल ही मन मे नही आया,वोट तो बहुत दूर की बात है ।

पचासों इस्लामी मुल्क थे,खूब इस्लामी कट्टरपन कुछ मुल्कों के सर चढ़कर बोला, पलट कर देख लीजिए बर्बाद हो गए । ईसाई मुल्क भी देख लीजिए,जब ईसा की निंदा पर सर में कीलें ठोक दी जाती थीं,तब यह देश भी बर्बाद ही हुए,यह तरक्की पर तब आए, जब हर एक को साथ लाए । इस्लामी मुल्क जो कट्टरपन को ढोते रहे,बर्बाद हो गए । अब आपकी बारी है, धर्म सर चढ़कर बोल रहा है, बरबादियाँ दरवाज़े तक आ चुकी हैं और धर्म का नशा है कि और मदहोश कर रहा है । मकसद क्या है, बस दूसरे धर्म को जूतों की नोक पर रखना,भले ही यह करने में मुँह के बल गिरकर अपना पूरा वजूद ही बर्बाद कर दें ।

जो लोग अपनी तरक्की में किसी दूसरे को रोड़ा समझते हैं, वह मक्कार किस्म के लोग होते हैं । अभी वक़्त है, दिलों से नफरत,जलन को निकाल फेकिये,वरना बर्बाद हो जाइयेगा । एक होइए, य न भी एक होइए मगर आपस मे नफरत मत रखिये । ऐसे लोगों को नेतृत्व दीजिये,जो दिलों को न बांटता हो,जो नफरत को न बढ़ाता हो और जिसे काम करना आता हो । कट्टरपन और ताक़त का नशा दुनिया मे अच्छे अच्छे देश बर्बाद कर चुका है,सम्भल जाइये,इससे पहले की मिट जाइये । मिलकर,एक होकर, एक दूसरे का साथ देकर,खूबसूरत भारत का निर्माण करें,क्योंकि अंत मे यही शांति पर सबको लौटना है....

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