Monday, October 21, 2019

हिटलर गांधी

जब आप हिटलर और गाँधी दोनों की परछाई ओढ़ना चाहते हैं, तो लगता है कि आपमें कुछ तो ख़ाली है, जिससे आप हर एक को भ्रम में रख रहें । हिटलर की सनक और गाँधी की धमक दोनों एक जिस्म में कहाँ रह सकती हैं । हिटलर के कपड़े और कपड़ों से खाली गाँधी की काया में से दोनो को पकड़ेंगे तो बौखल ही लगेंगे ।

गाँधी और हिटलर ऐसी दो नावें हैं, जिनकी अकेले अकेले सवारी करना ही क्या कम दुशवार है,जो ऐसी दो विपरीत नावों की एक साथ सवारी करना परम् मूर्खता ही दर्शाएगी । जो लीडर इन दोनों के गुणों को खुद में पैवस्त करेगा,वह ज़मीन का सबसे बौखल इंसान ही होगा या तो खुद को जनवाने पहचनवाने वाला कमज़र्फ इंसान ।

मैं दुनिया के तमाम लीडर देखता हूँ,वह गाँधी को ज़ुबान पर रखते हैं और हिटलर को मन में, तब लगता है कि क्या खुद का कुछ इनमें है भी,या बस खाली डब्बा ।

गाँधी की बात करना जितना आसान है, उतना ही कठिन है उनके रास्ते पर चलना । हिटलर की बात करना जितनी कठिन है, उतना ही आसान है उसके रास्ते पर चलना । यह दो विपरीत ध्रुव हैं, विपरीत नावें हैं ।

खुद में रखना है तो किसी एक का गुण रखिये,किसी एक कि तरह बनिये, कोई एक सिम्त की नाव पर चलिए,कहीं तो पहुँचियेगा । दोनों नावों की सवारी कहीं नही पहुँचाएगी, यह आज़ादी की लड़ाई के एक मज़बूत स्तम्भ साबित भी कर चुके हैं । हिटलर और गाँधी, एक साथ कहीं भी नही पहुँचेंगे । अलग अलग इनके बड़े आसमान हैं, जिस आसमान को इनकी मौत के बाद भी सम्मान मिले, उस आसमान को चुनिए ।

आपको लग रहा होगा कि मैं यह कौन सी फालतू बात लेकर बैठा हूँ,मेरा यक़ीन करो,उस आदमी को गौर से देखो जिसमें गाँधी और हिटलर दोनो की छींटे हों,वह खाली है, डब्बा है, वह तुम्हे कहीं भी नही पहुचाएगा,वह सिर्फ झांसा भर है, एक दिन मंझदार में छोड़ जाएगा,तब डूबोगे,ऐसे हर इंसान,लीडर,दोस्त,व्यवहारी से दूरी बना लो । जो विस्तार देगा,वह गाँधी है, जो संकुचित करेगा,वह हिटलर है, जो मूर्ख बनाएगा,वह दोनों को एक जिस्म में ढालेगा । फैसला आपका की आप खुद को विस्तार देंगे या संकुचित करेंगे या मूर्ख बनेंगे ।

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