Saturday, November 9, 2019

हज़रत मोहम्मद

जब लड़कियो को ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दिया जाता था।जब औरतों को हर हुक़ूक़ से महरूम रखा जाता था।इल्म से मायूस थी वह ज़मीन। जिहालत का ही बोलबाला था। इंसानी रिश्ते रोज़ टूट और बिखर रहे थे।आपसी नफरत आसमान छू रही थी। इंसान इंसान को ही गुलाम बना रहा था। उन गुलामों को मेले में खरीदकर,उनकी जिंदगियां दूसरे की चौखट पर बांध दी जाती थीं । जहाँ मौत तक उन्हें जानवरों की तरह अपने जैसे इंसानों की खिदमत करना था । बेइंसाफी और बेईमानी तख्तों पर बैठ मज़लूमो पर हँस रही थी।तब वह रौशनी बन कर आए

उन्होंने इंसान को इंसान बनाया। लड़कियो की ज़िन्दगी की बात की,उन्हें बराबरी पर लाने की पुरज़ोर कोशिश की और उनकी इज़्ज़त व अज़मत की वकालत की। गुलाम को मालिक के साथ  बराबर में खड़ा कर दिया। बेइंसाफी और बेईमानी का गला घोटा।भाई को भाई की मोहब्बत दी।इंसानियत को आसमान तक बुलंदी पर लेकर गए। हर एक से लरज़कर, झुककर,उसकी इज़्ज़त करके सही बात पर कायल करते हुए अपना कारवाँ बनाया ।वह थे हज़रत मोहम्मद।

वही रसूल जो हातिम ताई के खानदान की बेटियो को देख तख्त से खड़े हो जाते थे। जिन्होंने अपनी खुद की बेटी की हमेशा इज़्ज़त की और पहली बार बेटियो को बाप की जायदाद में एक बड़ा हिस्सा फ़र्ज़ किया। यह वही हज़रत मोहम्मद हैं जिनपर कूड़ा फेंका जाता था।रास्ते में काँटे बिछा दिए जाते थे फिर भी बिना उफ़्फ़ किये हर फर्द को गले लगाया। कूड़ा फेंकने वाली की इज़्ज़त की और अपना बना लिया । कांटे डालने वालों की ज़िंदगी के कांटे चुनने लगे और फिर एक दिन उनके भी दिल हज़रत मोहम्मद के सामने नरम पड़ गए । जिसने दुनिया को जिहालत से निकाला उन हज़रत मोहम्मद को याद कर लें। हज़ारों साल पहले जिन्होंने पानी की फिक्र करते हुए कहा कि झरने के किनारे बैठे हो,तब भी पानी बर्बाद मत करना,बताइए कौन था जो उस वक़्त पानी की फिक्र कर रहा था । अफसोस होता है की दुनिया के नाम पेश करके उदाहरण देने वालों ने भी हज़रत मोहम्मद को नही पढ़ा। न उनपर बात ही कि,न उन्हें जाना ही ।

समाजवाद और तमाम विचार बहुत बाद में आए,हज़रत मोहम्मद ने उस वक़्त कह दिया कि अमीर गरीब के बीच कमाई का अंतर बहुत नही होना चाहिए,काम कोई भी कोई करे मगर हैं सब भाई, बराबर,किसी का किसी पर ज़ोर नही । व्यापार में एक चुटकी भर लाभ लो,यह नही की अनजान को बेवक़ूफ़ बनाकर लूट लो । घर मे इकट्ठा न करो चीज़ें, अनाज वगैरह,पड़ोस में कोई भूखा सोया,तो तुम्हारे पेट का अनाज हराम है । अनाथ बच्चों के सामने अपने बच्चों को इतना लाड न करो कि उन्हें अपने माँ बाप याद आए । फल के छिलके बाहर मत फेको की किसी को कसक हो कि यह खरीद नही सका । बताइए उस दौर में इससे बढ़कर मानवता की कौन सी लकीर थीं ।उन्हें आप इस्लाम,पैगम्बर से अलग हट कर तो पढ़ ही सकते हैं।देखिये उनमे और इन मुसलमानो में कितना फ़र्क है।हज़रत मोहम्मद को पढ़ना और ज़िन्दगी में उतारना एक बड़ा कदम है।जो कमज़ोर अक़्ल वालों के लिए मुमकिन नही है।

दोस्ती,रिश्ते,गरीब,हक़,फ़र्ज़,पानी,पहाड़,ज़मीन,बड़े,बच्चे,बूढ़े,औरत,कमज़ोर,लाज़ार,खानपान,इल्म,मेहनत,मज़दूर सब पर  बारीक़ से बारीक़ निगाह रखने वाले हज़रत मोहम्मद की ज़िन्दगी को पढ़ लीजिये।देख लीजिये।परख लीजिये।जैसे हर आदर्श को अपनाते हैं वैसे ही हज़रत मोहम्मद को भी देखिये और अपनाइये ।

 उनकी ज़िन्दगी में गुँथी फिलॉसफी को समझिये क्योंकि एक बार यह डोर पकड़ ली तो काफ़ी कुछ हाथ आ जाएगा ।जो पैग़म्बर मानकर हज़रत मोहम्मद को बस रट रहें हैं उनसे इतर,उनकी ज़िन्दगी की बारीक़ी में झाँकिये आपको वह सूत्र मिलेगा जो शिखर पर ले जा सकेगा...

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