ज़मीन जब मोहब्बत की माँग करती है, तो किसी इंसान में ऐसे बीज रोप देती है, जिसके चलने से मोहब्बत फ़िज़ाओं में फैल जाए । वह कुछ इंसानों को ऐसे दरख़्त में तब्दील कर देती है, जिनसे ज़माना सांस पाता है । आज जब हमें लग रहा कि नफरत बुलंद हो रही,तब ऐसे इंसान कहते हैं कि दोस्त ज़मीन पर तो उतरो,मोहब्बत तुम्हारा इंतेज़ार कर रही है ।
यह फैसल भाई हैं और उनके सहयात्री,जो "बृज 84 कोसी परिक्रमा" कर रहे हैं । इनका मकसद अपने हृदय में प्रेम को जगाना है, यह बताना भी है कि चाहे जब लौटिए,शांति और समृद्धि के लिए प्रेम की ओर ही आना होगा ।
26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक चलने वाली यह यात्रा ऐसे अनुभव को खुद में समेटे है कि आप हैरत करेंगे । फैसल भाई का कहना है कि कोई भी दिल प्रेम से खाली नही है, बस उसके अन्दर के प्रेम को अपने आने की सूचना पहुँचानी है । प्रेम कभी मरता नही है, हमारे न आने से वह खामोश भले हो जाए मगर जब कोई उसे आवाज़ देगा,तो इंसान के अन्दर का प्रेम बोल ज़रूर उठेगा ।
खुदाई ख़िदमतगार की इस "बृज 84 कोसी यात्रा " यात्रा को देखते रहिए । जितना हो सके इसके मकसद को आगे बढ़ाइए और अपने हृदय में प्रेम के दीये को जलाए रखिये । यकीनन नफरत बुरी तरह हारेंगी और प्रेम घर घर महकेगा क्योंकि प्रेम के साथ कृष्ण जी हैं, जहाँ प्रेम है, वहीं कृष्ण जी हैं, इसलिए देर सबेर प्रेम का परचम लहराएगा ।
सभी यात्रियों को मुबारकबाद और शुभकामनाएं की वह उस मकसद तक पहुँच रहे हैं, जिसके ख्वाब हम सब देखते हैं । आपकी मेहनत बहुतों के दिलों का सुक़ून है । यह जो थककर आप झपकी लेते हैं, यह हमारे जागने की प्रथम सूचना है । आपके कदम इस मिट्टी के रँग, खुशबू और ख़मीर को एक दिन ज़रूर उभारेंगे.....
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