Saturday, May 24, 2014

wo thi amrita

वो थी अमृता। …………… रेडिओ प्रोग्राम 
आज  अक्खां  वारिस शाह ,कितो कब्रा  वियो नू.......... झूम गए  ना आप पंजाबी में सूफियाना कलाम। पंजाबी को शायद ही किसी ने अमृता प्रीतम से ज़्यादा मोहब्बत की हो। सैकड़ो कहानी,कविताय ,उपन्यास लिखने वाली अमृता ने जो कुछ भी किया टूटकर किया। लिखा तो टूटकर,गया तो टूटकर और मोहब्बत की तो टूटकर।  एक घंटे आपके साथ मई हु हफ़ीज़ प्रोग्रम्म "वो थी  अमृता" में आप सुन रहे है ********* रेडियो पर… 
गाना। …………………………………… 
पता नहीं क्यों लोग शीरी फरहाद की कस्मे कहते है। मोहब्बत में लैला मजनू की सदाय  देते है। अमृता की  मोहब्बत भी तो है।  तड़प की मोहब्बत,कसक की मोहब्बत,बिना  शिकवे की मोहब्बत अमृता साहिर की मोहब्बत ,पंजाबी उर्दू की मोहब्बत ,लिखावट और जज़्बात की मोहब्बत,सूफियाना और शायराना मोहब्बत।सुनते है आगे अमृता की दस्ताने मोहब्बत उन्ही की ज़बानी। ………… 
गाना। …………………………………
अमृता ने लिखा एक बार डेल्ही में दुन्या भर के राइटर्स का सेमिनार हो रहा था ,उसमे साहिर और हमें भी  बैज दिए गए। मगर शरारतन या कहे मोहब्बत की वजह से साहिर ने मेरा और  साहिर के नाम का बैज लगा लिया। स्टेज पर एक जनाब आए और माफ़ी मांगते हुए कहा "अरे अमृता जी गलती से आपको गलत बैज दे दिया गया है...अभी सही करवाते है" इतने में टपक से साहिर ने जवाब दिया " गलती आपसे हुई थी मगर हमने सही कर ली है आप इत्मीनान   है "कितनी शिद्दत की मोहब्बत थ.रूहों की मोहब्बत नामो से खेल रही थी.
गाना। ………………………………
अमृता उस रात के ज़िक्र में कभी कुछ न लिख सकी जिस रात साहिर ने दुनिया को अलविदा कहा था। अमृता को रात २ बजे बुल्गारिया में खबर मिली की साहिर इस दुनिया से कूच गए। वह पूरी रात फोन के पास बैठी रोती  रही। अमृता ने एक जगह कहा भी " हमें लगता है खुद से गलती हो गई। उस दिन हमने जो बैज बदले थे। उन्ही नामो का धोखा हो गया फरिश्तो को। अमृता उस रात के बाद हर रात साहिर के ख्यालो में  जागती रही। 
गाना। ……………………………
जब साहिर की मौत की खबर अखबारों में छपी तो आपको पता है एक बड़े अख़बार ने क्या किया। अमृता की बड़ी सी तस्वीर पहले पेज पर छपी उसमे अमृता की आँखे आंसुओं से भरी हुई थी और हेड़लाईन थी सहिर………। साहिर.......सहिर………… दुनिया की उस भीड़ में भी अमृता और साहिर की मोहब्बत आसानी से पहचानी जा सकती थी।  ……………………………। 
ये थी दस्ताने इ मोहब्बत दो कलम कारो की  हफ्ते इसी रोज़ इसी वक़्त फिर हज़िर होंगे एक नयी दिलकश दास्ताँ के साथ …इस गाने के साथ अलविदा देज्ये अपने दोस्त हफ़ीज़ को ………………। 
गाना …………………………।