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कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, May 31, 2018
Sunday, May 27, 2018
Saturday, May 26, 2018
Nehru
वैसे इसे मत पढ़िए तो बेहतर है।आपको बड़ी तक़लीफ़ होगी।एक ऐसे शख्स को याद करके जिसे आपने हमेशा गिरोह के पन्नों में पढ़ा...
जब दो टुकड़ों में देश मिला।वोह इसका रोना नही रोए।रियासतो का झगड़ा मिला।वोह इसका रोना भी नही रोए।शुरुआत में ही महात्मा का साथ छूठा।वोह इस ज़बरदस्त झटके के बावजूद भी मायूस होकर नही बैठे।अपनो ने जी भर कोसा।इसपर भी रोना नही रोया।दुनिया ने शक से देखा।उन्होंने उफ़्फ़ तक नाकि।मज़हबी रँग से उनपर कीचड़ फेका गया।वोह इसपर भी पलट कर नही मुड़े।तमाम विचार वादियों ने उनमे अपने आप को नापाकर खूब आलोचना की।उन्होंने तब भी इनमे से किसी एक को भी देशद्रोही या अपने रास्ते का कांटा नही कहा।बहुतों ने उनकी जड़ो में दही डालने का काम किया,उन्होंने उन्हें भी साथ रखकर दुनिया के सामने लोकतन्त्र और धर्मनिरपेछता की वह मिसाल रखी जिसे आज भी कोई तोड़ नही पाया।
17 साल देश के शीर्ष पद पर रहे मगर कभी अपने आलोचको को नही दबाया।अडिग अपने काम करते ही रहे।देश की हर उस चीज़ जिसपर तुम फ़ख्र कर सकते हो,उसकी बुनियाद रखी।देश की भुजाओं को जिसने हर दिशा में फैला दिया।जिसकी छाँव में सब धर्म,सब विचार फलते फूलते रहे,उन्होंने किसी को जबरन नही रोका,इसी आज़ादी का तो ख्वाब बुना था।वह आधुनिक तो थे ही मगर उनमे ज़बरदस्त आध्यात्म भी था जो आपको नही दिखेगा।उनकी ज़िन्दगी के तमाम रँग बिखरे पड़े हैं, हर एक अपने मतलब का रँग लिए मतवाला फिरता है।
आपने तो उन्हें कुछ खास किताबो से जाना जिसपर उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में कभी रोक नही लगाई,जमकर अपनी आलोचना करने के मौके दिए।मैं मानता हूँ की गलतियां हुईं होंगी।निर्माण के मार्ग पर बहुत बार गलतियाँ होती हैं मगर इसका मतलब यह नही की वोह व्यक्ति पूरा गलत है।हो सकता है एक बेहतर मुल्क़ की तस्वीर बनाते में आपके धर्म को चोट पहुँची हो मगर उससे ज़्यादा ज़रूरी उन्होंने इसे एक किया।आज जो पाकिस्तान और आपमें फ़र्क है, जिसे आपको छोड़ पूरी दुनिया महसूस करती है।वह यह है की पाकिस्तान को नेहरू जैसा व्यक्तित्त्व नही मिला।वोह देश अस्थिर और असफल है।नेहरू ने हमे स्थिर किया और दिशा दी।
हाँ बात बात पर पहले पहले कहने वाले अगर देश के पहले प्रधानमंत्री को इज़्ज़त से याद कर लेंगे तो उनकी देशभक्ति कम नही पड़ जाएगी।मुझे भी लगता है जिसका कट्टर हिन्दू मुस्लिम विरोध करें,यानि वोह ही सही था।नेहरू में छिपी हर तरह की समझ को समझना मामूली बात नही है।नेहरू चन्द पन्नों के मोहताज नही।जो खुद मोटी मोटी किताबों को लिख गया हो उन्हें स्कूल के कोर्स के दो पेज से निकाल कर लोग अपनी ज़हनी कमज़ोरी और तंगनजरी के सिवा कुछ नहीं दिखाते।आज ही के रोज़ आपने एक कामयाब तारीख़ बना कर आखरी साँस ली थी।
आज नेहरू की पुण्यतिथि है, हमे पता है उन्हें याद करने में बहुतों की साँस फूलने लगेगी।हर वोह व्यक्ति उन्हें याद करने में कतराएगा जो आपने धर्म के तो करीब है मगर देश से दूर है।नेहरू जब तक हम हैं तब तक भले अकेले आपको याद करें,करते रहेंगे।मेरे देश के निर्माता आप ही हैं।कोई इसका चाहकर,जितना रूप बदलने की कोशिश करे,ज़र्रे ज़र्रे में पड़ी नेहरू की छाप को खत्म करने में उनके मुँह से ख़ून आ जाएगा,मगर वोह यह बिल्कुल भी मिटा नही पाएँगे।आज आपकी बहुत बहुत बहुत याद आती है पण्डित जवाहर लाल नेहरू।
Wednesday, May 23, 2018
क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम
"तुम हो प्रेम के घनश्याम ,मै प्रेम की श्याम-प्यारी।।
रोये श्याम-प्यारी,साथ बृजनारी,आओ मुरलीधारी।।"
कान्हा को याद करते हुए जब उनकी कलम चलती तो यमुना का पानी झूमकर उन्हें वज़्ज़ू करवाता।मस्जिद की मुँडेर पर बैठने वाला जब कृष्ण के चरणों की धूल पर कलम घिसता है, तब मुल्क़ की मोहब्बत का मुस्तक़बिल बनता है।वोह जिसे ज़माने ने भुला देना बेहतर समझा क्योंकि याद करते तो उसके जैसा दिल कहाँ से लाते।आज उनकी पैदाइश पर अगर उनके हमारे मुल्क़ के लिए लिखे गीतों को ही याद कर लेते तो बड़ा काम हो जाता।
आज़ादी की लड़ाई की तपिश में तड़पने वाले इस कवि के दिल को महसूस करना हमारी ज़िम्मेदारी थी।हमने उन्हें बंगाल के दायरे में क़ैद कर दिया।हम आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों को दायरों,खाँचो में बाँटने के आदी हो चुके हैं।वह हैं क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम,जिनको हमेशा याद रखना चाहिए मगर क्या करें हम बड़े व्यस्त हैं।इस व्यस्तता में भी अगर आज हम उन्हें याद करलें तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान दौड़ जाए।उनकी सबको जोड़ती कलम महक उठेगी।उसकी खुशबू हो सकता है हमारे आँगन को भी महका ही दे।
पदम् भूषण क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम को याद करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि कुछ गिने चुने नामो में वह एक हैं, जो दिलों की नफ़रत पर राख डालकर उसमे फूलो की नरमी उड़ेलते हैं।उनके बारे में ढूंढकर पढ़िए ।आज उनके जन्मदिन पर खुश होईये,लोगों से उनके बारे में पूछिये,इससे दिल में नफ़रत के फफोले फूटेंगे और सुक़ून,मोहब्बत और तरक्की के रास्ते खुलेंगे ।फिर कह रहें अपने दिल से हर तरह की नफ़रत को जड़ से खत्म करदें वरना नस्ले भुगतेंगी इसको।हमारे पास नफ़रत खत्म करने खूबसूरत वजहों में से एक क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम भी तो हैं....
Tuesday, May 22, 2018
गामा पहलवान
गामा बचपन में हमारे लिए एक क़िस्सा भर थे।गामा पहलवान हमारे यहाँ मुहावरे की तरह इस्तेमाल होते।जैसे माइकल जेक्सन,हिटलर यह नाम से ज़्यादा मुहावरे थे।मुझे कुश्ती नही पसन्द मगर यह याद है जब नानीअम्मी ने कहा की गामा ने बंटवारे के वक़्त खुद पाकिस्तान में खड़े होकर बहुत से हिन्दुओ की जान बचाई और अपने खर्चे से हिंदुस्तान भेजा।
यहाँ तक एक परिवार के लिए अपनी कुश्ती का सामान गिरवी रख दिया।अपनी चादरें जाने वाली औरतों को देदी।गामा ने कहा था की काश हमारा जिस्म बड़ा होता तो उसकी नाप के कपड़े बड़े होते,जो ज़्यादा लोगों के काम आते।अपने घर का अनाज तक जाने वालों को देकर खुद हफ़्तों कुछ नही खाया।महीनो अपनी गली की रखवाली करता रहा यह दुनिया का मशहूर पहलवान गामा।
यह किस्से सुनकर गामा के लिए दिलचस्पी पैदा हुई।वोह गामा की इसलिए इज़्ज़त करती थीं की वोह पहलवान होकर भी बड़े नरम दिल के थे।आज के दिन गामा ने दुनिया को अलविदा कहा था।मुझे जहाँतक याद है, ज़्यादातर पुराने घरों में कभी न कभी गामा का नाम आया होगा।गामा ज़िन्दगी में कभी नही हारे।उनकी ज़िन्दगी के बहुत से किस्से सुने जो अभी वैसे ही याद हैं।उनको क्या लिखें सिवाए इसके की आपकी प्रतिभा का क्षेत्र कोई भी हो अगर उसमे मोहब्बत और नरमी उतर आए तो आप दुनिया के दिलों पर राज करेंगे....
हम फिर कह रहें हैं अपने सख़्त होते दिल को नरम करो,इसमें मोहब्बत पैबस्त करो,नफ़रत को अलविदा कहो, क्योंकि नफ़रत करने की हर वजह बासी फ़रेब है ।सबके लिए दिल को खोल दो ताकि ज़मीन तुम्हे देख मुस्कुराए,जैसे एक वक़्त पर गामा पर मुस्कुराती थी...गामा आपको आपके जिस्म से बड़े दिल के लिए लाखो सलाम
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Wednesday, May 16, 2018
Tuesday, May 15, 2018
काँग्रेस हार
ऐ काँग्रेस के लोगों अगर आज नही कहा तो समय मेरा भी अपराध लिखेगा ।जब आप हारते हैं, तब लगता है समृद्ध और सहिष्णु भारत से एक ईंट खिसक जाती है ।आपकी हार, सिर्फ सरकार का आना जाना भर नही है, आपकी हर एक दूसरी संस्कृति का फैल जाना है, जहाँ सबके हिस्से की साँस नही है।
हम मानते हैं की आपसे वही गलतियाँ होती हैं, जो दूसरों से होती हैं ।आप उतने ही भृष्ट हो सकते हैं, जितने की दूसरे मगर आपकी गलतियाँ हम ही नही,हमारी पीढ़ियाँ भी भुगतती हैं ।
काँग्रेस के लोगों आपके नेता को कोई कुछ भी कहे, उन्होंने इतने विपरीत विषैले माहौल में भी शालीनता नही खोई और वह डिगे भी नही ।मगर क्या आप अपने नेता से सीखते हैं ।आप मेहनती हैं मगर कई बार इम्तेहान में आप पूरी किताब याद करलें मगर वह उत्तर याद न करें जो हमेशा आते हैं, तो फेल हो जाएँगे ।इसे मेहनत की हार नही कहेंगे,यह रणनीति की हार है ।जिसे दूर किया जा सकता है ।
मैं जब काँग्रेस के लोगों,तुम्हे देखता हूँ,तो यक़ीन जानो ख़ुशी होती है की एक ही सही,अभी हमारी आवाज़ तो ज़िंदा है ।मैं तुम्हे हिन्दू मुस्लिम जाति धर्म सबसे आज़ाद उड़ते देखना चाहता हूँ ।
तमाम तरह की हार और कुठारघाट के बावजूद आप लोग जूझ रहें हैं, यही हमारे देश का महान लोकतन्त्र है ।यह जनता जिसने आपको खूब पलकों पर बैठाया है, जब इसे वास्तव में लगेगा की आप बनाने वालों में से हैं, तो एक झटके में आप भी सत्ता में होंगे ।निराशा मत पालिए,जब आपकी सत्तर सालों की सत्ता ध्वस्त हो सकती है तो इनकी पाँच सालों की सत्ता को जनता दरका भी देगी ।
इधर आपको हर एक सलाह देगा,की यह करो या नही करना चाहिए था ।इन सबसे इतर अपने आप पर भरोसा रखिये ।मज़बूत होईये ।एक रहिये ।अपने झगड़ों को भूलकर सिर्फ काँग्रेस के प्रति वफ़ादार होईये,क्योंकि काँग्रेस के साथ वफ़ादारी आपको बहुत से मोर्चों पर खुद बखुद वफ़ादार बना देगी ।
आप इक संघर्षपूर्ण इतिहास से ताल्लुक़ रखते हैं, उसे पढ़िए ।आज के रास्ते बनाइये ।
हम सब भी गाली खाते हैं, आप भी खाते हैं, हमारे अपने हमे नोचते हैं फिर भी आँधी में हर तरफ हम देख रहें बहुत से लोग मज़बूती से खड़े हैं ।लड़ रहें,जूझ रहें ।आपके लिए अच्छा है की देश में हमदर्दी का माहौल है ।यह देश प्रेम को हमेशा अपनाता रहा है ।अपनी ज़बान से प्रेम और जोड़ने का ज़िक्र कीजिये ।अपने ही आदर्शों पर चलिए ।अपने ही नायकों की ज़िन्दगी को रौशनी बनाइये ।यह देश आपको फिर वह सब देगा जो पहले भी दे चुका है ।घमण्ड,बदला,नफ़रत इनका जीवन लम्बा नही हो सकता।आप मेहनत कीजिये ।अच्छी रणनीति बनाइये ।विपक्ष खुद में एक सरकार होती है, यह जीकर दिखा दीजिये।जिस तरह हम कभी इस माटी से मायूस नही हुए वैसे ही आपसे भी हमेशा बेहतर की उम्मीद है।
सभी काँग्रेस के लोगों यह संघर्ष का वक़्त आपसे क़ुरबानी माँग रहा ।सब लोग आपको उल्टा सीधा भला बुरा कहेंगे ।आप खुद पर विश्वास रखकर अपने रास्ते बुनिये ।लोकतन्त्र में सभी आवाज़ों की ज़रूरत है, उनमे से दूसरी आवाज़ हैं आज आप,कल पहली होंगी ।आपके लिए शुभकामनाएं ।सत्ता प्राप्त पार्टी को बधाई की देश के महान लोकतन्त्र ने उसे अपने सेवा के लिए चुना ।
Sunday, May 13, 2018
Saturday, May 12, 2018
मौलाना हसरत
हम तो क्या भूलते उन्हें ए हसरत,
दिल से वोह भी हमे भुला न सके।।
......मगर हमने भुला दिया हसरत को।कुछ वक़्त पहले उनके जन्मदिन पर जब हम उनकी मज़ार पर थे तो शहर वहाँ से गायब था।आज भी ग़ायब रहा।"इंक़लाब" का नारा बुलन्द करने वाले तो कबके उन्हें भूल चुके।कृष्ण से अथाह मोहब्बत रखने वाले हसरत को कृष्ण भाइयों ने भी भुला दिया।मैं हसरत मोहानी की कब्र पर घन्टो रहा।नँगे पाँव उनकी मज़ार के इर्द गिर्द उनकी बुनी ग़ज़लें गुनगुनाता रहा।
पाँव में पहुँचती ठंडक ने दिमाग में तूफान सा ला दिया की हसरत क्यों खामोश लेटे हो।उठकर इस शहर से क्यों नही कह देते की तुम्हे फिर ज़रूरत है हसरत की।लखनऊ में मौलवी अनवार की बाग़ और उनके पैतयाने लेटे हसरत मोहानी हमारे इंतज़ार में ही थे।कोई आए और कहे हसरत बहुत लेट चुके अब उठो और शहर को जगाओ।देखो बेग़म हसरत भी अपने हाथों में लगा आटा धोकर मुल्क़ की बेचैन साँसों को थामने खड़ी हो गई हैं ।
मौलाना हसरत आज़ादी की लड़ाई की वोह शख्सियत हैं जिनके बगैर आज़ादी की बुनयाद अधूरी है।फिर कह रहे हैं इनको भूल कर, दरकिनार करके सिर्फ खोखलापन ही हाथ आएगा।इन्हें पढ़िए,सीखिये,जब समझ न आए तो पूछिये।तमाम मौलानाओं के गढ़े दायरे को देखिये मौलाना हसरत मोहानी कैसे तोड़ते हैं।
मज़हब को सुर्ख़ छींटे देकर कृष्ण से इंक़लाब तक के सफ़र को पढ़िए।एक हाथ में क़लम,दूसरे में बाँसुरी और नमाज़ के लिए झुकता हुआ सर और अंग्रेज़ों की आँखों में आँखे डालने वाली चढ़ी हुई सुर्ख़ आँखे,एक इंसान में हज़ार इंसानों की खूबी ही तो मौलाना हसरत मोहानी होना है।उनकी कलम,ज़िन्दगी,संघर्ष को जब देखेंगे सर खुद बखुद झुक जाएगा।जिन्हें उनका कुछ नही पता वह जगजीत सिंह की गाई हुई "रात दिन आँसू बहाना याद है" ग़ज़ल याद करके इसे लिखने वाले मौलाना हसरत मोहानी को याद कर सकते हैं ।आज पुण्यतिथि पर रोज़ से ज़्यादा याद आ रहे हैं आप...
Friday, May 4, 2018
मनवा बेचैन
जब बेचैनी बढ़ती है और दूर कुछ छूटता हुआ नज़र आता, जो लाख कोशिशों में पकड़ में नही आता, तब जोश मलीहाबादी के इन अल्फाज़ो में हमेशा डूब जाता हूँ,बहुत बचपन से यह लफ़्ज़ मुश्किलों में थामे रखते रहें हैं.....
बोल इकतारे झन झन झन झन,
काहकशां है मेरी सुंदन,
शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन,
नूर का तड़का मेरी चिलमन,
तोड़ चुका हूं सारे बंधन,
पूरब पच्छम उत्तर दक्खन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,
मेरे तन में गुलशन सबके,
मेरे मन में जोबन सबके,
मेरे घट में साजन सबके,
मेरी सूरत दर्शन सबके,
सबकी सूरत मेरा दर्शन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,
सब की झोली मेरी खोली,
सब की टोली मेरी टोली,
सब की होली मेरी होली,
सब की बोली मेरी बोली,
सब का जीवन मेरा जीवन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,
सब के काजल मेरे पारे,
सब की आँखें मेरे तारे,
सब की साँसें मेरे धारे,
सारे इंसां मेरे प्यारे,
सारी धरती मेरा आंगन,
बोल इकतारे झन झन झन झन