Tuesday, March 31, 2020

हिन्दू मुस्लिम और कोरोना

हमने बचपन में बहुत गिद्ध देखे,देखते देखते गिद्ध ख़त्म भी हो गए । अब समझ आया,वह खत्म नही हुए,बल्कि कुछ इंसानों में बदल गए और डांगर की जगह इंसान को ही खाने लग गए ।

गिद्ध मरे जानवर खाते थे,यह नए गिद्ध हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत फैलाकर ज़िन्दा इंसान खाने लगे हैं । गिद्ध कोसों मीलों दूर से डांगर खोज लिया करते थे,यह नए गिद्ध भी कोसों मीलों दूर से मुद्दे ढूंढ ही लाते हैं, जिससे इन्हें भोजन मिल सके ।

नए गिद्धों का जो भोजन है अगर वह ज़रा भी समझदार हो तो अपनी कमज़ोरियों को दूर करे और परेशान मत हो,बस इंसानियत के लिए लगे । ख़ुद को निखारें, गलतियों को सुधारें और निरन्तर अपने पर काम करें बिना कान धरे । एक दिन यह गिद्ध भी बदलकर कोई और जीव हो जाएँगे और मानवता से खतरा मिट जाएगा ।

 बस खुद की गलतियों,कमियों को सुनो और धैर्य से सुधार करो,आलोचनाएं सृजन का पथ बनाती हैं । जो आलोचना में नफरत भी गूंथे दे रहें,उनकी तरफ ध्यान ही मत दो,बस ख़ुद पर मेहनत करो,मेहनत का कोई तोड़ नही,डरो मत,विचलित मत हो,जवाब मत दो,खुद को सुधारो और देश-मानवता के लिए सोचो,बस,सेवा करो,सेवा करते करते मर भी जाओ,तो ग़म मत करो । चीज़ें सुधरेंगी,हमारा देश बड़ा ही खूबसूरत है,इसकी खूबसूरती बरक़रार रखने और बढ़ाने में जूटो, गिद्धों पर से ध्यान हटाओ।
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Monday, March 30, 2020

हिन्दू मुस्लिम कोरोना

देश के दुश्मन को पहचानिए, यह सही वक्त है इन्हें पहचानने का ।

हर वह इंसान जो इस मुश्किल आपदा के वक़्त भी हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत फैलाए,वह देश का दुश्मन है । जो न्यूज़ चैनल और प्रचारक माफ कीजियेगा,इन्हें हम पत्रकार नही कह सकते,यह प्रचारक ही हैं,इनमे से जो भी भारत की खबरों के स्थान पर केवल दूसरे देशों की खबरों को परोस रहें,यह भी देश के दुश्मन ही हैं ।
जो सिर्फ पाकिस्तान की बात करें इस मुश्किल वक़्त में भी उन्हें पहचानने में कोई मूर्ख ही असफल होगा ।
जो भी हो,चाहे हिन्दू या चाहे मुसलमान,अगर इस वक़्त वह देश के लोगों की फिक्र नही कर रहा । वह देश का दुश्मन ही है । इनसे पीछा छुड़ाइये, यह एक दिन आपको और हमको भी निगल जाएँगे ।

इस वक़्त देश को हर एक के सहयोग की ज़रूरत है । घरों में रहिए,मन मे हर एक के लिए संवेदना और प्रेम रखिये । हम हर मुश्किल हालात से जूझ लेंगे । मुश्किल हालातों में भी जो अपने हिन्दू मुसलमान एजेंडे में लगा रहे,वह किसी भी वक़्त आपकी खाल की भी बोली लगा लेगा,इनके मुँह से इंसान के सड़े हुए खून की भभकी आती है, इनसे दूर हो जाइए,यह यक़ीनन कोरोना से बहुत खतरनाक हैं ।

लोगों की मदद कीजिये । सरकार को सहयोग दीजिये,सरकार की कमी भी बताइए ताकि सुधार हो सकें और अच्छाई को भी बताइए ताकि वह निरन्तर चलती रहे। घर मे रहिए,संवेदना,सहिष्णुता,प्रेम,सेवा और त्याग को अपनाए रखिये,यही भारत है और भारत जीतेगा,नफ़रतें हारेंगी ।

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Sunday, March 29, 2020

कोरोना की कहानी

कोरोना : यार तुम पैदल क्यों भागे चले जा रहे हो ? मैं तो साबुन से हाथ धोने से ही मर जाता हूँ,थोड़ा मुझसे दूर बैठो तो मैं तुम्हे छू भी नहीं पाऊँगा, फिर भी क्यों भाग रहे हो मित्र ?

इंसान : भूख से,तुम आकर भी जीवन नही ले पाओगे मगर भूख प्राण खींचे बिना नही जाएगी ।

कोरोना : यार भूख भी 14 दिन तक तुम्हारे प्राण हर नही पाएगी । तब काहें भाग रहे हो ?

इंसान : काम से,14 दिन तक भूख से तो लड़ सकता हूँ मगर बताओ,उसके बाद इस जर्जर निशक्त शरीर से कौन काम लेगा । जब स्वस्थ शरीर काम के लायक नही तो 14 दिन भूख से लड़ते शरीर को काम की क्या ही गारंटी,इसलिए जा रहा हूँ 

कोरोना: जाओ,ईश्वर से प्रार्थना की अगर मैं तुम्हारे मार्ग में कभी आ भी जाऊं, तो तुम्हारे पाँव के छाले के नीचे दबकर वीरगति को प्राप्त होऊं ।

इंसान : ए कोरोना,तुम परेशान मत हो,इस शरीर ने बहुत कुछ देखा है । हम व्यवस्था के शिकार हैं, यह हमारे जीवन का हिस्सा है,एक अदद साँस के लिए भागो,भागो और भागो । तब तक भागते रहो, जब तक मर न जाओ,मरने से बचने के लिए भागो,ए कोरोना,यार हम गोल गोल घूम रहें, यही तो हमारा भाग्य है और यही है हमारी खोज शून्य ।
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Saturday, March 28, 2020

लॉक डाउन 4th day

पलायन जानते हैं क्यों होता है । अविश्वास के कारण । अपने रहने वाले स्थान पर आपको सुरक्षित रहने का विश्वास ख़त्म हो जाए,तो पलायन शुरू हो जाता है । पलायन स्पष्ट सन्देश है कि उन्हें व्यवस्था पर भरोसा नही है ।

इस अविश्वास को कोई रोक सकता है तो केवल सरकार,शासक, सत्ता । वह भरोसा दिलाए की हम तुम्हे भूखा नही रहने देंगे । यह बातें सिर्फ कहने और मोबाइल नम्बर की झड़ी लगा देने से नही होंगी,करने से पूरी होंगी । जिसे पहले ही दो दिन खाना नही मिलेगा,वह 21 दिन का भरोसा करे तो करे कैसे ।

कितना पहले से कहा जा रहा था कि भारत की स्थिति भयावह होगी,मगर हम सबके मज़ाक उड़ रहे थे । जागरूकता की बात पर राहुल गांधी को निशाना बनाया जा रहा था । अब सब कुछ सामने है ।

मैं उनकी तरफ मुँह भी करना नही पसन्द करता जिन्हें इन सैकड़ो किलोमीटर पैदल भागते लोगों पर अफसोस नही हो रहा । ज़रा एक बार कल्पना करो कि तुम्हारे घर का सारा राशन खत्म हो गया,न पैसे हैं और न पैसों का कोई जुगाड़,तो भय्या पलायन ही करोगे । उस जगह पलायन करोगे जहाँ मरने का ही भले सुक़ून हो ।

सरकार जो मिनटो में बड़े बड़े इवेंट कर लेती है । डिफेंस एक्सपो जैसे खर्चीले काम करने में झिझकती नही है । वह फौरन सड़क के किनारे वही टेंट लगाए ,जिसमे लोग ठहर सकें । आप अपने लोगों से हमदर्दी कीजिये । उनकी तक़लीफ़ को समझें,मुश्किल वक़्त है, यह सभी को पता है मगर इसे और मुश्किल मत बनाएँ ।

इन सब मुश्किल हालात पर पैदल भागते लोगों पर वह ज्ञान देने मत उतरें प्लीज़,जिनके घरों में 20 दिन का राशन और दो महीने का पैसा इकट्ठा है ।

सरकार और प्रभावी लोगों इस महामारी और त्रासदी दोनों को रोकने में लगिये । न बन सके तो विपक्ष के लीडर्स को सलाहकार बनाइये । सब मिलकर हल निकालिए,रास्ता ज़रूर निकलेगा ।

घर मे रह रहे लोग अच्छे पकवान मत खाओ । ज़रूरत से ज़्यादा मत खाओ । बहुत लोग भूखे भाग रहें हैं, उनके दुःख में अपने निवाले कम कर दो ताकि तुम्हारा राशन भी दस की जगह बीस दिन चले । 

कोरोनो पर बात ही क्या करें,जब जाँच तक नही हो पा रहीं । बस प्रार्थना कीजिये कि सब बचे रहें,बने रहें । सरकार को सहयोग दीजिये,सवाल तो बाद में होंगे मगर अभी सिर्फ और सिर्फ सहयोग । सरकार भी हर एक से सहयोग ले,यहाँ अपनी घिनौनी राजनीति न ठेले,हो सके तो आर्थिक त्रासदी से निपटने के लिए,अभी से ही मनमोहन सिंह,चिदम्बरम,ज्योंड्रेंज़ जैसों की मदद लें । बचा लीजिये मिलकर लोगों को,बाकी जिनके हाथ मे कुछ नही है, वह घर पर रहकर आप अपना कर्तव्य पूरा करें । घरों में रहें,सुरक्षित रहें ।
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Friday, March 27, 2020

पलायन

पलायन जानते हैं क्यों होता है । अविश्वास के कारण । अपने रहने वाले स्थान पर आपको सुरक्षित रहने का विश्वास ख़त्म हो जाए,तो पलायन शुरू हो जाता है । पलायन स्पष्ट सन्देश है कि उन्हें व्यवस्था पर भरोसा नही है ।

इस अविश्वास को कोई रोक सकता है तो केवल सरकार,शासक, सत्ता । वह भरोसा दिलाए की हम तुम्हे भूखा नही रहने देंगे । यह बातें सिर्फ कहने और मोबाइल नम्बर की झड़ी लगा देने से नही होंगी,करने से पूरी होंगी । जिसे पहले ही दो दिन खाना नही मिलेगा,वह 21 दिन का भरोसा करे तो करे कैसे ।

कितना पहले से कहा जा रहा था कि भारत की स्थिति भयावह होगी,मगर हम सबके मज़ाक उड़ रहे थे । जागरूकता की बात पर राहुल गांधी को निशाना बनाया जा रहा था । अब सब कुछ सामने है ।

मैं उनकी तरफ मुँह भी करना नही पसन्द करता जिन्हें इन सैकड़ो किलोमीटर पैदल भागते लोगों पर अफसोस नही हो रहा । ज़रा एक बार कल्पना करो कि तुम्हारे घर का सारा राशन खत्म हो गया,न पैसे हैं और न पैसों का कोई जुगाड़,तो भय्या पलायन ही करोगे । उस जगह पलायन करोगे जहाँ मरने का ही भले सुक़ून हो ।

सरकार जो मिनटो में बड़े बड़े इवेंट कर लेती है । डिफेंस एक्सपो जैसे खर्चीले काम करने में झिझकती नही है । वह फौरन सड़क के किनारे वही टेंट लगाए ,जिसमे लोग ठहर सकें । आप अपने लोगों से हमदर्दी कीजिये । उनकी तक़लीफ़ को समझें,मुश्किल वक़्त है, यह सभी को पता है मगर इसे और मुश्किल मत बनाएँ ।

इन सब मुश्किल हालात पर पैदल भागते लोगों पर वह ज्ञान देने मत उतरें प्लीज़,जिनके घरों में 20 दिन का राशन और दो महीने का पैसा इकट्ठा है ।

सरकार और प्रभावी लोगों इस महामारी और त्रासदी दोनों को रोकने में लगिये । न बन सके तो विपक्ष के लीडर्स को सलाहकार बनाइये । सब मिलकर हल निकालिए,रास्ता ज़रूर निकलेगा ।

घर मे रह रहे लोग अच्छे पकवान मत खाओ । ज़रूरत से ज़्यादा मत खाओ । बहुत लोग भूखे भाग रहें हैं, उनके दुःख में अपने निवाले कम कर दो ताकि तुम्हारा राशन भी दस की जगह बीस दिन चले । 

कोरोनो पर बात ही क्या करें,जब जाँच तक नही हो पा रहीं । बस प्रार्थना कीजिये कि सब बचे रहें,बने रहें । सरकार को सहयोग दीजिये,सवाल तो बाद में होंगे मगर अभी सिर्फ और सिर्फ सहयोग । सरकार भी हर एक से सहयोग ले,यहाँ अपनी घिनौनी राजनीति न ठेले,हो सके तो आर्थिक त्रासदी से निपटने के लिए,अभी से ही मनमोहन सिंह,चिदम्बरम,ज्योंड्रेंज़ जैसों की मदद लें । बचा लीजिये मिलकर लोगों को,बाकी जिनके हाथ मे कुछ नही है, वह घर पर रहकर आप अपना कर्तव्य पूरा करें । घरों में रहें,सुरक्षित रहें ।
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Thursday, March 26, 2020

कोरोना और विपक्षी दल

देश भर में विपक्षी दलों की तारीफ़ करनी ही चाहिए,इन्होंने इस आपदा की घड़ी में रचनात्मक भूमिका निभाई है । उत्तर प्रदेश में अखिलेश जी के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने आर्थिक और सामाजिक मदद की झड़ी लगा दी और रही बात देश की मुख्य विपक्षी दल कॉंग्रेस की तो उसने जता दिया कि 52 सांसदों की छोटी सी संख्या के बाद भी कितना बेहतर विपक्ष बना जा सकता है । राहुल जी की सक्रियता ने देर से ही सही सरकार को जागरूक तो किया है ।

राहुल गाँधी के जनवरी से किये बीसों ट्वीट,सलाह से जो दबाव बना,उसका असर हमे तबाही से पहले जगाने के लिए ज़रूरी था । अखिलेश यादव,तेजस्वी यादव,तेज प्रताप यादव,ममता बनर्जी,अरविन्द केजरीवाल,उद्धव ठाकरे,उमर अब्दुल्लाह  हर एक ने केंद्र सरकार के साथ तालमेल बिठाया । यह भी नही देखा कि वह सरकार में हैं भी या नही,बस जो जहाँ है, वहीं से अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी पूरा कर रहा ।

हमारे ज़्यादातर राजनेता अपनी ज़िम्मेदारी समझ रहें । समाजवादी पार्टी के तमाम एमएलसी,विधायक,सांसद ने अपनी आर्थिक सहायता सरकारों को दी है । अपने स्तर से खाने पीने की मदद भी कर रहें हैं ।

आज विपक्ष का भी हमे सम्मान करना ही होगा क्योंकि सबको पता है, व्यवस्थाओं में कितनी कमियां रह गई हैं । मगर विपक्ष इसपर घेरने की जगह सहयोग की भूमिका में है । कल जब आपदा निकल जाएगी,तब अगर विपक्ष आक्रामक और रचनात्मक भूमिका निभाएगा तो उसको गालियाँ मत दीजिएगा,सहयोग दीजिएगा । विपक्ष का ही दबाव है जो राहत पैकेज और जनता की ज़िम्मेदारी पर बार बार ध्यान लाया जा रहा है ।

हम सरकार की भी तारीफ करते हैं कि इस समय वह तेज़ी से काम कर रही है । अब कम से कम सलाहें दरकिनार नही की जा रही हैं । सरकार और विपक्ष मिलकर जनता को इस त्रासदी से निकाल ले जाए,बस यही प्रार्थना ।

नौकरशाही कुछ जगह बेहतर काम कर रही तो कुछ जगह कमियाँ हैं । ऐसी हालत में नौकरशाही पर ही सारा दारोमदार है कि वह अपनी ज़िम्मेदारी को खूबी से निपटाती है या बदसूरती से,यह उसके ही हाथों में है । सब मिलकर त्रासदी से निपट लेंगे,बस घरों में रहिए,यह समझिये बहुत कम में बहुत ज़्यादा दिन काटने हैं । अपनी आदतें बदले,किफायत से रहना सीखें,हर परेशानी निकल जाएगी,हम सब इससे निपट लेंगे ।

जो हर वक़्त विपक्ष को कोसा करते हैं, वह कोसते रहेंगे मगर जिन्हें लगता है कि विपक्षी दल रचनात्मक भूमिका निभा रहें, वह उनकी खुलकर तारीफ़ भी करें । हर इंसान अपने काम से अपनी जगह बनाता है, विपक्ष ऐसे ही जनता का ध्यान रखे,जनता उसको सहयोग देगी । जनता अपने लिए तोलमोल कर नेतृत्व चुनती है, यह समय वही है, अच्छे काम कीजिये,काम दर्ज होंगे और भरोसा रखिये यह काम किसी मंदिर मस्जिद हिन्दू मुस्लिम की राजनीति से अब प्रभावित नही होंगे,मूर्ख ही इन मुद्दों पर नेतृत्व चुनेगा,जिसके रत्तीभर अक़्ल होगी,वह उन्हें ही अपनाएगा,जिसके पास जनता के स्वास्थ्य,शिक्षा और आर्थिक विकास का सम्पूर्ण मॉडल हो । इस समय बस सेवा कीजिये,दिल खोलकर सेवा कीजिये,भले नकार ही दिये जाएँ,मगर खुद से संतोष रहेगा कि अपने भरपूर सेवा और सहयोग दिया,काम की कोई काट नही,कोई मोल नही,यह रँग दिखाएगा,सैल्यूट विपक्ष ।

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Tuesday, March 24, 2020

21 दिन का आपातकाल

परेशान मत हों,प्लीज़,सबकी समझाएं, यह एक दिन का मसला नही है,21 दिन की बात है । जो धैर्य से ही कटेंगे । अपनी आदतों को कल से थोड़ा बदल लें,21 दिन हल्की दिक्कतों से कट जाएँगे,यह दिक्कतें कोरोना महामारी से संक्रमित होने से यक़ीनन कम हैं,समझिये ।

सामान पर टूट मत पड़िये, जो है उसे किफायत से इस्तेमाल कीजिये,जब सरकार इंतज़ाम करेगी,उससे लीजिएगा,हर सरकार आपकी फिक्र में है अभी,भरोसा रखिये ।

बड़े बूढ़ों को हौसला दें कि दवा अस्पताल खुले हैं, उन्हें कोई परेशानी नही होगी,बस परेशान होकर तबियत न बिगाड़ें ।

अभी फौरन ताबड़तोड़ किसान,गरीब,मज़दूर की फिक्र की जगह,खुद संयम बरतें । सरकार अगले दो दिन में इनपर भी सक्रिय हो जाएगी ।।यह आखरी घोषणाएं नही हैं, होते होते सब सुधरेगा, बस परेशान मत हों ।

फ़सल, मज़दूरी सब बड़े विषय हैं । जर सरकार को इनकी अहमियत पता है । इनका रास्ता निकलेगा ।

अस्पताल में जांच और कोरोना से निपटने में तेज़ी लानी है । सब यही पर काम कर रहें ।

आप बस परेशान मत हों । हंसे बोले । खाए पिये । जिसकी मदद हो सके मदद करें । बस पैनिक मत हों,सिविल सोसायटी अपनी ज़िम्मेदारी समझ रही है । अफरा तफरी मत मचाएं,रास्ते निकलेंगे ।

जो रास्तों में फंसे हैं, अगर आपकी पहुँच में हैं, तो मदद कीजिये । उनको सम्बंधित ज़िला अधिकारियों के नम्बर दीजिये । लोकल स्तर पर रास्ता निकल आएगा ।

हम सब मिलकर यह मुश्किल भरे दिन काट लेंगे । महामारियों से ऐसे ही लड़ा जाता है । तक़लीफ़ तो होगी ही बस बर्दाश्त कीजिये और मुस्कुराइए की यह उन तक़लीफ़ से कम है, जो हो सकती थी ।

घर मे रहें,यह प्राथमिकता में है । बाकी सरकारी नम्बर जो ज़िला स्तर पर दिए जा रहें,उनपर बात करके समस्याओं का निदान करें । हम मिलकर इन हालातों से निपट लेंगे,यकीन है, पूरा यक़ीन । 

गरीबों और ज़रूरतमंदों की आवाज़ सरकार तक पहुचाइए,सम्बंधित अधिकारी तक,समस्याएं हल करने से हल होंगी,परेशान होने से नही । 

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कोरोना और हमारे पाप

बिल्कुल ऐसे ही तो माहौल था,दिमाग पर ज़ोर डालें,सब याद आएगा । बस इस माहौल में थोड़ा कुछ और ऐड कर लें,जैसे इंटरनेट बैन था और घरों में कैद लोगों के तमाम रिश्तेदार जेल में थे और इस क़ैद पर लोग उनके समर्थन की जगह उनपर हँस रहे थे । उनको सबक सिखा रहे थे,उनकी रोती हुई आंखों में अवसर तलाश रहे थे,उनकी ज़मीनों पर दांत गड़ाए थे ।

वह कश्मीर था । अभी तीन दिन ही हुए हैं और हम घर मे रुकने में परेशान हैं । वह महीनों घरों में कैद थे । हमारे पास इंटरनेट है, उनके पास नही था । हमारे पास बात करने को फोन हैं, उनके यहाँ यह भी बन्द था । उन्होंने यह सब अकेले झेला, हम तो पूरे संसार के साथ झेल रहें । जो दुख अकेले पड़ता है, वह बहुत दर्द देता है, जो दुख सबके साथ पड़ता है, वह कट जाता है ।

कुछ संवेदनशील लोग उस दर्द को महसूस करके उसवक्त ही बेचैन थे । कुछ को आज समझ आ रहा होगा । अभी तीन दिन हुए हैं, अभी लम्बा झेलना है, ईश्वर हम सबको धैर्य दे ।

दूसरों की स्थिति का मज़ाक मत उड़ाया कीजिये । बहुत लोग चीन पर हँस रहे थे । इटली के मज़ाक उड़ा रहे थे,अब हम सब वहीं खड़े हैं, जहां चीन,इटली,ईरान खड़ा है । हम उनकी बात नही करते जिन्हें नफरत फैलाने के पैसे या मानसिक संतोष मिलता है । हम उनकी बात कर रहें,जिनमे संवेदना हो,जिनके मां बाप ने लोगों की तक़लीफ़ का मज़ाक बनाना बुरा बतलाया हो,हम अच्छी परवरिश के लोगों से कह रहे,लोगों से हमदर्दी रखो,उनसे मोहब्बत रखो ।

सीरिया में समंदर के किनारे मरे बच्चे हों या म्यांमार के भागते रोहिंग्या हों,तालिबानियों,आईसिस के हाथों मारे मासूम हों,अपने यहाँ लिंचिंग और दंगो में मारे गए लोग हों,आतंकवाद में मरने वाले मासूम हों, आदिवासियों के क़त्ल हों या कोई भी ज़ुल्म जो निर्दोष पर किसी ने भी,कभी किया हो,सब सामने घूम रहा है । उस वक़्त की हमारी खामोशी,हमारा मौन समर्थन,हमे आज उस दहलीज़ पर ले आया,जहाँ हम सब बेचारे हैं ।

सब दर्द भूलकर फिर कह रहा हूँ,घर मे रहिए । जब यह महामारी गुज़र जाएगी तब इसके साथ दिलों का और मन का मैल भी धो डालना । कुछ वक्त के लिए ही ज़मीन पर हो,इंसान बनकर रह लो,हैवान बनोगे तो नस्लें झेलेंगी । कितना दर्दनाक है, घरों में कैद रहना,सब कुछ है, बस इंसान को देख पाने,मिल पाने की आज़ादी नही है । इसकी अहमियत को समझो दोस्त,अब से कम से कम बंटना बन्द कर दें,नफरत को भूल जाएँ । ज़ुल्म और जुल्मी से पीछा छुड़ा लें,कम से कम अपने ईश्वर के सामने खड़े होकर सर न झुकाना पड़े की हम ज़ुल्म के पैरोकार थे ।

घर पर रहें । संयम और धैर्य बरतें । कोरोना से निपटने को शासन को सहयोग दें । 
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Monday, March 23, 2020

कोरोना में सहयोग

हमें सरकार से कोई सवाल नही करना । उनसे कोरोना टेस्टिंग किट विट की कमी के बारे में ज़रा भी नही पूछना । हम तो उनकी महामारी से लड़ने की किसी तैयारियों की तफ्तीश भी नही करना चाहते । यह भी नही जानना चाहते कि जब स्वस्थ्य के बाद अर्थव्यवस्था दरकेगी,तब किसी मंत्री से कोई सवाल करना है । यह भी नही पूछेंगे जब दुनिया इससे लड़ रही थी,तब आप अपने देश के एक राज्य में चुनी हुई सरकार गिराने में क्यों लगे थे ।  मेरे पास सवाल ही नही हैं,न कोई सवाल हमे करना है ।

सरकार को जिन्होंने चुना है, कुछ सोचकर चुना होगा,ईश्वर उनका साथ दे । हम अपनी मृत्यु पर भी इनके लिए सदकामना करते आए हैं । मैं अव्यवस्थाओं पर अब न सवाल करता हूँ न ही आलोचना करता हूँ,बस जितना सहयोग दे सकता हूँ उतना सहयोग देने को तैयार हूँ । 

आपका जी चाहे प्रश्न कीजिये,चाहे भक्ति कीजिये,हमारी सेहत पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ता । मेरे लिए मेरा देश प्राथमिकता है, उसके लोग प्राथमिकता हैं, उनके संकट को हमे दूर करना है बस,इनके लिए ही समर्पित हूँ ।

फिर कह रहा हूँ,जितना सम्भव है, घर पर रहें । परेशान मत हों,खबरों से हौले नहीं, धैर्य रखें । सब ठीक हो जाएगा,बस बिल्कुल मत निकलें । मानवता को आपकी ज़रूरत है, आप ठहरकर उसकी सेवा कर सकते हैं,कीजिये ।

डॉक्टर,पुलिस,सेना,पैरा मेडिकल स्टॉफ, वैज्ञानिक,सफाई कर्मी और दूसरे कर्मचारी जो इस समय ड्यूटी दे रहें,उनकी मेहनत,समर्पण की इज़्ज़त कीजिये,उनके सम्मान में घर मे रहिए । सरकार आती जाती रहेंगी । लीडर बदलते रहेंगे । रह जाएगा केवल देश और उसके लोग,बस इस रह जाने वाले देश और लोगों के लिए घर से मत निकलिए ।
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कोरोना और सरकार

हमें सरकार से कोई सवाल नही करना । उनसे कोरोना टेस्टिंग किट विट की कमी के बारे में ज़रा भी नही पूछना । हम तो उनकी महामारी से लड़ने की किसी तैयारियों की तफ्तीश भी नही करना चाहते । यह भी नही जानना चाहते कि जब स्वस्थ्य के बाद अर्थव्यवस्था दरकेगी,तब किसी मंत्री से कोई सवाल करना है । यह भी नही पूछेंगे जब दुनिया इससे लड़ रही थी,तब आप अपने देश के एक राज्य में चुनी हुई सरकार गिराने में क्यों लगे थे ।  मेरे पास सवाल ही नही हैं,न कोई सवाल हमे करना है ।

सरकार को जिन्होंने चुना है, कुछ सोचकर चुना होगा,ईश्वर उनका साथ दे । हम अपनी मृत्यु पर भी इनके लिए सदकामना करते आए हैं । मैं अव्यवस्थाओं पर अब न सवाल करता हूँ न ही आलोचना करता हूँ,बस जितना सहयोग दे सकता हूँ उतना सहयोग देने को तैयार हूँ । 

आपका जी चाहे प्रश्न कीजिये,चाहे भक्ति कीजिये,हमारी सेहत पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ता । मेरे लिए मेरा देश प्राथमिकता है, उसके लोग प्राथमिकता हैं, उनके संकट को हमे दूर करना है बस,इनके लिए ही समर्पित हूँ ।

फिर कह रहा हूँ,जितना सम्भव है, घर पर रहें । परेशान मत हों,खबरों से हौले नहीं, धैर्य रखें । सब ठीक हो जाएगा,बस बिल्कुल मत निकलें । मानवता को आपकी ज़रूरत है, आप ठहरकर उसकी सेवा कर सकते हैं,कीजिये ।

डॉक्टर,पुलिस,सेना,पैरा मेडिकल स्टॉफ, वैज्ञानिक,सफाई कर्मी और दूसरे कर्मचारी जो इस समय ड्यूटी दे रहें,उनकी मेहनत,समर्पण की इज़्ज़त कीजिये,उनके सम्मान में घर मे रहिए । सरकार आती जाती रहेंगी । लीडर बदलते रहेंगे । रह जाएगा केवल देश और उसके लोग,बस इस रह जाने वाले देश और लोगों के लिए घर से मत निकलिए ।
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कोरोना को सीरियस लें

आप डॉक्टर नही हैं । आप वैज्ञानिक नही हैं । आप पुलिस नही हैं । आप सैनिक नही हैं । आप पैरा मेडिकल स्टॉफ नही हैं । आप नर्स नही हैं । फिर भी आप इनके इतना ही महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं ।

आपके पास मौका है अपने महत्वपूर्ण होने का सिद्ध करने का,आप घर पर रहें,पूरी तरह से सिर्फ घर पर रहे ।

जो यह कर पा रहा है, वह किसी भी हाल में सैनिक,डॉक्टर,वैज्ञानिक,नर्स,पुलिस,पैरामेडिकल पर्सन से कम नही है । वक़्त है खुद को रोक कर एक,एक से दो,दो से चार,चार से आठ की महामारी की चेन को तोड़ दें ।

जो संक्रमित हैं, उनसे बैरभाव भी मत करिए,घृणा भी मत करिए,क्योंकि कल आप भी हो सकते हैं । उनके परिवार के साथ हमदर्दी रखिये,इलाज में मदद कीजिये और हाँ प्लीज़ किसी ऐसे इंसान को जिसकी शक्ल आपसी नही है, जिसकी ज़ात आपसी नही है, जिसका मज़हब आपसा नही है,उन्हें गुनहगार मत मानिए,उनसे फ़र्क़ मत कीजिये । दूर रहिए मगर दिल से करीब रहिए । फासला रखें हर एक से मगर स्नेह भी रखें ,सबसे प्रेम कीजिये । स्नेह कीजिये,इंसान बनिये ।

घर मे रहकर पूरी मानवता की सेवा कीजिये,सृष्टि आप से रुकने को कह रही,रुक जाइये । रास्ते दो हैं केवल,कोरोना के साथ हैं या उसके ख़िलाफ़ । जो खिलाफ हैं, वह रुक गए,जो साथ हैं, वह मंडरा रहे । बहुत बहुत बहुत ज़रूरी न हो मत निकलें,अपनी सरकार की चेतावनी को सुने,माने, यह मज़ाक नही है, रुक जाइये बिल्कुल,प्लीज़ ।

Sunday, March 22, 2020

भविष्य में कोरोना

"अल्लाह का अज़ाब है और रहो ईमान से दूर । सोचो एक न दिखने वाली चीज़ से तुम अशरफ़ुल मख़लूक़ात को घर बैठा दिया । एक से एक क़ाबिल, ताक़तवर,सूरमा सब उस न दिखने वाली मख़लूक़ के सामने झुक गए । यही तो है, जब तुम ईमान से डिगोगे तो तुम्हे लाइन पर लाने का इंतज़ाम खुदा ने कर ही रखा है, सम्भल जाओ की उससे पहले मिट जाओ,मज़हब की डोर थाम लो भाई,यह अल्लाह की तरफ से दस्तक है, सुनो और ईमान पर लौटो । "

"तुमने मांसाहार अपनाया,अधर्म को सर पर चढ़ने दिया,कुकर्म को अपनाया तो भगवान ने उससे जो तुम्हे नंगी आँखों से न दिखे,तुम्हे घरों में क़ैद कर दिया । तुमने शँख से दूरी की,शँख तुम्हारी आवश्यकता हो गई । तुमने धार्मिक कर्मकांड छोड़े, उसमे तुम्हारे जीवन के सूत्र थे,भगवान ने एक झटके में तुम्हे याद दिला दिया । तुमने भगवान से मुँह मोड़ा,भक्ति से किनारा किया,भगवान ने तुम्हे एक चुटकी में अपनी शक्ति का आभास करा दिया । अब वक्त है, धर्म को मजबूती से पकड़ लो,अधर्म के नाश के लिए निकलो, धर्म की शिक्षा को मानो उससे पहले की मिट जाओ ।"

दोनों कथाएँ पढ़ लीजिये,भविष्य में यह कानों में गूँजेंगी । कोरोना से तो बच जाएँगे मगर इस रोने से नही बच पाएँगे । आपको लगता है मंदिर,मस्जिद,चर्च आज बन्द हैं और अस्पताल खुले हैं । कल फिर अस्पताल इसी हालत में रहेंगे और जिनमे आज ताला लगा है, वह चमक बिखेर रहे होंगे । इन लगे तालों में डराने का मैटेरियल तैयार हो रहा,जो जितना डरा ले जाएगा,उसके धर्म मे उतनी लम्बी लाइन लगेगी। जो कोरोना से आज डर रहे हैं, कल वह कोरोना से डराएंगे । आज जो वायरस से छिप रहे हैं, कल वह वायरस का डर लेकर अपनी भीड़ बढ़ाएंगे । दोस्त यह धर्म नही,धर्म का व्यापार है, विपत्ति व्यापार को लाभ देकर जाती है, आज नही तो कल ।

हमारा क्या,हम तो हमेशा कहते हैं कि दुनिया धर्म से खाली नही हो सकती । धर्म से भागो मत,उसे काबू में लो । जादू से डरना नही चाहिए,उसे सीखना चाहिए,मज़ेदार होता है जादू ।
कोरोना तो आज नही कल निपट जाएगा । बस सभी धर्मों के सेलिबस में शामिल हो जाएगा,डरो,उससे पहले ईश्वर तुम्हे और सबक सिखाए...आख़री बात घर मे रहो । अब तो इस पूरे जीवन कोरोना का रोना तो चलेगा ही....कोरोना वायरस से नही बल्कि ऊपर बताए प्रवचन से....
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Friday, March 20, 2020

कोरोना पर हम यह करेंगे

पगलेटों,बौखलों,बौड़मो से हमे कोई अपील नही करनी । थाली पीटो या कबूतर की झिल्ली निकालो या बगल में काफ़ूर रख के लेट रहो, जो करना है करो ।

हम तो भाई अब किसी से नही मिलेंगे । न हम डॉक्टर हैं और न ही नर्स,इसलिए हर जगह "कुद्दन मेरा नाम" लेकर टूट नही पड़ेंगे । न राय बहादुर बनकर अधकचरा ज्ञान बाटेंगे और वाट्सएप मैसेज तो शांतिकाल में नही फारवर्ड किये तो कोरोनाकाल के काल मे हरगिज़ ही नही । अनावश्यक घूमना,फिरना,मिलना पूरी तरह से बन्द ।

जी चाहे तो मानिए या टहल टहल कर भौरों की तरह कोरोना को एक जगह से दूसरी जगह फैलाइये । बौड़मो आप लोग गेंदे के फूल पर बैठे भौरे, भुंगे को देखें और तब तक मंडराए जब तक गेंदे के फूल तस्वीरों पर न पड़ जाए ।

हम न थाली पीटेंगे, न कबूतर की झिल्ली ढूंढेंगे । बस एहतियातन मिलना जुलना बन्द,सम्पर्क के सोशल मीडिया,फोन तमाम माध्यम हैं, यहीं महफ़िल जमेगी । हो सके तो अपनी तरफ से सन्नाटा पकड़िए,आत्मा के लिए भी,परमात्मा के लिए भी,जय कोरोना भय्या,नतमस्तक भए,जब चले जाना,तब बाहर निकलेंगे, काश की सद्दाम टाइप कोई बनकर बनवाए होते,मिस यू बंकर ।

एहतियात बरतें,शासन का सहयोग करें,भले वह जाँच युद्धस्तर पर न ही कर पाए, फिर भी जिस भी अवस्था मे है, उसे भरपूर सहयोग दें । अनसुना मत करें वरना गम्भीर परिणाम सृष्टि भुगतेगी,क्योंकि विश्व गुरु तक खतरा मंडराने लगा है । तो भाई मत निकलिए,घर बैठिए,मैं तो ठहर गया,तुम भी ठहर जाओ और हाँ जिन्होंने इंटर में बायो लिया था,डॉक्टर बनना था,बन सके या नही मगर हम आर्ट,कॉमर्स वालों की हिफाज़त करने केलिए कमर कस लो, थोड़ा सीखो साखो,कोरोना से लड़ो,हम तुम्हे कोरोना सेनानी का खिताब देंगे भय्या,बस जुट जाओ ।
बाकी सब छुप जाओ,मज़ाक नही,मत निकलें अनावश्यक
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Thursday, March 19, 2020

कोरोना से बचें

महामारियों से कोई भी अकेले नही निपट सकता है । इसका सामना सहयोग से ही किया जा सकता है । सरकार ईमानदारी से काम करे और लोग ईमानदारी से उसका सहयोग करें । सरकार हमारी फिक्र करे,हम सरकार की बातों को माने ।

महामारी की गम्भीरता को समझें,जितना हो सके बाहर निकलना बंद कर दें । लोगों को बताएं कि शादी-पार्टी या किसी भी तरह के लोगों के जमावड़े को कम करें । हम तेज़ी से महामारी के हाथों की तरफ बढ़ रहे हैं और उससे निपटने के असंख्य संसाधन भी हमारे पास नही है, ऐसे में बचाव ही ईलाज है ।

स्वास्थअधिकारियों WHO या डॉक्टर्स के बताए तरीकों को ईमानदारी से मानिए । मीडिया के हो हुल्लड़ में मत फँसे, बस एहतियात करें । केरल सरकार अपनी जनता के लिए बहुत बेहतर काम कर रही,कोशिश कीजिये,सभी सरकारें इसे माने और लोगों को घर मे रुकने लायक माहौल दें । धार्मिक स्थलों,सभा स्थलों या इंसानी जमावड़े के हर स्थान को अभी खाली कर दें,ताकि भविष्य में फिर जमा हो सकें ।

बुद्ध की इस लाइन को मान लीजिए,"मैं तो ठहर गया,तुम कब ठहरोगे"
अपने लिए नही दूसरों के लिए ही सही,ठहर जाइये । आजकल मत निकलिए ताकि भविष्य में आप और हम निकल सकने लायक़ रहें ।
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Wednesday, March 4, 2020

दंगे और छिपकली

छिपकली ने लपककर अधजली छिपकली को पकड़ा और मायूस अंदाज़ में पूछा,बहन बच्चे कैसे हैं । अधजली छिपकली ने आह भरी और कहा बच्चे ! बच्चे तो इंसान की नज़र हो गए । हम दीवार पर टँगी इंसान के पुरखों की तस्वीर के पीछे खुशहाल से रह रहे थे ।

रोज़ अपने बच्चों को दीवार में टँगी घड़ी तक टहलाने ले जाते,अक्सर इधर उधर जाने में कोई घर का इंसान हमे देख चीख उठता,हम डरते और लपक कर किसी झरोखे में छिप जाया करते थे । इंसान से यह लुका छिपी ही हमारी ज़िंदगी के मज़े थे । हम बच्चों को दिखाते की देखो एक ही कमरे में,एक ही बिस्तर पर दो इंसान कितना झगड़ते हैं और कितनी मोहब्बत भी करते हैं ।

फिर एक रोज़ कुछ इंसानों की भीड़ आई, वह बाहर चीखी,घर मे मौजूद इंसान को हमने डरते हुए छिपता देखा । छिपे हुए इंसान को दूसरे इंसान हमारे सामने ही घसीट कर ले गए। एक इंसान ने दूसरे इंसान को नोच नोच कर मार डाला,मारने के बाद खाया भी नही,जब खाना नही था,तब मारा ही क्यों और फिर इंसान समेत पूरे घर में आग लगा दी ।

आग लगी,तो इंसान चीख चीख कर जला,उसकी खाल उन दीवारों में चिपक गई,जो हमारे टहलने की जगह हुआ करती थी,इंसान भरभरा कर जला, घर का साज ओ सामान जला,गर्मी से दीवारें चिटखने लगी और हम और हमारे बच्चे इस तस्वीर से उस तस्वीर में छिपने को भागते रहे । कभी रॉड,कभी घड़ी तो कभी पँखे की दराज़ में छिपे मगर सब जगह आग ने लेली,हम हंसते खेलते घर को भरभरा कर जलता देख दहल गए और इसे छोड़ते की उससे पहले इंसान की लगाई लपटों ने हमारी ज़िंदगी को अपने हाथों में ले लिया ।  मेरे सभी बच्चे और कुनबे के लोग और साथी इंसान की लगाई आग में झुलस कर खत्म हो गए ।

जली हुई छिपकली ने रुँधे गले से कहा कि यह मनहूस इंसान आपस मे लड़ते क्यों हैं । इन कम्बख्तों को यह नही पता कि इनके लड़ने से हमारी जान पर बन आती है । यह आग लगाते हैं और बच्चे हमारे जल मरते हैं । इन इंसानों से तो हम छिपकली बेहतर हैं कि आपस मे भले ही कितना लड़ें मगर कभी किसी छिपकली की रिहाइश नही जलाते,कभी दूसरी छिपकली के बच्चों को निशाना नही बनाते,हम सब कितना ही लड़ लें मगर इंसान की ज़िंदगी मे ज़रा भी ज़हर की छींट नही पड़ने देते,हम छिपकलियों की लड़ाई से कभी भी तीसरी छिपकली को दर्द नही देते । एक जैसी सूरत वाले यह इंसान इतने बंटे हुए ज़हरीले हैं, इनके बीच रहना ही नही चाहिए था । हमे देखकर इंसान चीखता था जबकि इंसान को देखकर हम सबको चीखना चाहिये था,अधजली छिपकली यह कहती कहती दुनिया से रुखसत हो,अपने बच्चों से जा मिली...
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