चोट उँगली में थी और दोष पूरे शरीर को देते रहे । उँगली नीतीश थे और शरीर लालू । कितनी आसानी से लालू को खलनायक बना दिया और खलनायक को नायक बनाकर पूजते रहे । पन्द्रह साल में क्या हासिल किया बिहार ने,मीडिया ने बनाया बीमारू और मीडिया ने ही कहा नीतीश को विकास पुरुष,खैर हमे नीतीश से कोई लेना देना नही क्योंकि इमरतीबुद्धि लोगों से क्या ही उलझें,आज कुछ,कल कुछ,परसो कुछ,न ज़ुबान का ठिकाना और न ही किरदार का कोई ठिकाना । कुर्सी के लिए किसी को भी पाया बना लेने वालों पर बात ही बेईमानी है ।
आते हैं लालू यादव पर,उनके ऊपर चवन्नी छाप भी उठकर भृष्टाचारी का आरोप लगा देते हैं । वह भी चारा चोर कहकर खी खीखी करते हैं जिनमें राजनैतिक अक़्ल एक रत्ती से भी कम है । यह मासूम लोग हैं, इन्हें टीवी में बैठा एंकर बता देता है फलाने चोर हैं, यह चोर चोर बकने लगते हैं, टीवी का एंकर कह देता है कि फलाने महान हैं, विकास पुरुष हैं, यह उसके नाम ले लेकर लहालोट होते हैं । यह कभी भी पलट कर अपने इर्द गिर्द नही देखते हैं ।
लालू के ज़माने में हुए अपराध को देखते वक़्त सूक्ष्मदर्शी इस्तेमाल करते हैं और वर्तमान के अपराध झाँकने में अपनी मटर ऐसी आँखे इस्तेमाल करते हैं ।
अगल बगल के मुख्यमंत्री को भी देखें,उन्होंने अपने राज्यों में बिहार से ज़्यादा काम किया है, जबकि वह आते जाते रहे हैं । यूपी को ही ले लें,नीतीश के समकक्ष मुलायम सिंह यादव,मायावती या राजनाथ सिंह,सबने इनसे बेहतर काम कम वक्त में किया है । अखिलेश यादव के पाँच साल के काम तो नीतीश अगले पचास साल में भी नहीं कर पाएँगे और योगी आदित्यनाथ की तरह नीतीश कभी इतने सख्त प्रशासक भी नही हों पाएँगे की लोग इनकी चर्चा करें । नीतीश एक ढोल थी जो सिर्फ लालू लालू लालू कहकर बज रही थी । लालू को गरियाओ और सत्ता पाओ । लालू को गले लगाओ और सत्ता पाओ । यानी सत्ता सिर्फ एक नाम से मिलती,लालू ।
लालू कभी नैतिकता में नीचे नही गिरे,कभी घिनौनी राजनीति नही की,गलतियाँ उतनी ही कि जितनी हमारे देश के तमाम विख्यात नेता करते रहे और काम भी उतना ही किया ।
क्या समझते हैं कि लालू के वक़्त जज मॉर्निंग वॉक पर नही जाते थे । क्या समझते हैं कि लालू फ़ैसले मैनेज नही कर सकते थे,सब कर सकते थे मगर नही किया गया । आज सलाखों में हैं, तभी न्यायालय पर आपको भरोसा है । हमने बहुत से गुंडों को बहुत ऊंचे पद पर बैठे देखा है, आप भी देख रहे हैं, तब भी आपको लगता है कि लालू गलत थे ।
एक बार लालू के सर लगे इल्ज़ाम को देखिएगा,रुपयों की गिनती कर लीजिएगा और यह भी देखिएगा उतने रुपये में आज सर्वशक्तिमान खरीदार कितने विधायक खरीदकर चुनी हुई सरकार गिराता है ।
वह बेहिया लोग लालू पर सवाल उठाते हैं, जो विधायक खरीदने वाले के सामने सर झुकाया करते हैं । ईमानदार हो तो सर उठाकर उसको भी इतना ही कोसो जो लालू के सर मढ़े भ्रष्टाचार की कीमत में एक या डेढ़ विधायक ही खरीद पाता, जबकि उसने बीसों को खरीदा है, सोचो कितना खर्च किया होगा ।
लालू का जेल मे रहना और लालू को बदनाम करना, दोनों से किसी की चुनावी दुकान चलती है । लालू जेल में हैं, यह भी उनकी ईमानदारी है । मैं राहुल गाँधी से जो थोड़ा नाराज़ हूँ, उसकी वजह लालू प्रसाद यादव हैं । राहुल गाँधी को इस भारत मे अगर आज किसी से राजनीतिक दीक्षा लेनी चाहिए, वह सिर्फ लालू प्रसाद यादव हैं, वह भी बिना अगर मगर लगाए,क्योंकि लालू देश की मिट्टी की नब्ज पहचानते हैं ।
मैं खुद हमेशा ख़ुद को कोसता हूँ कि लालू को मापने में हमने इतना अगर मगर क्यों किया । क्यों लालू को जाँचने में हमने उनकी सुनी जो अपनी जुबान कहीं से उधार लाए थे । लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन है, हम इसका प्रायश्चित करते हैं कि हमने उस समय मुँह नही खोला जब खोलना चाहिए था । लालू का सलाखों में जाना हमारा खुद का क़ैद हो जाना था,एक ही तो आवाज़ थी,जो बिना तराज़ू लिए बोलती थी ।
बस ख़ुशी इतनी है कि लालू प्रसाद यादव को हमने कभी खलनायक नही माना । कभी उनकी लीडरशिप में खामी नही देखी और कभी उन्हें कमज़ोर, मजाकिया या फ़िज़ूल नही जाना,हमेशा यह तो माना कि वह अद्वितीय हैं ।
अन्ना के झाँसे के वक़्त लालू ही एक आवाज़ थे जो संसद से सड़क तक बोल रहे थे कि यह आंदोलन सही नही है । लालू उस वक़्त ही नब्ज़ पकड़ चुके थे मगर सरकार मदमस्त थी लालू को ही घेरने में,उनकी आवाज़ अनसुनी की गई । संसद में लालू के वह भाषण आज भी ऐतिहासिक है, जो बता रहा है कि संसद सर्वोच्च है,क्योंकि जनता ने उसे चुना है । लालू एक दौर की राजनीति का पर्याय हैं और अपने विरोधी की ऑक्सीजन हैं, बिना लालू नाम लिए,वह आज भी क्लास मॉनिटर तक का चुनाव नही लड़ सकते...
लालू प्रसाद को जन्मदिन की मुबारकबाद और प्रार्थना की वह अभी मज़बूती से और रहें,क्योंकि देश को उनकी जरूरत हैं । जिन्हें लालू के आरोप,सज़ा या परिवारवाद से दिक्कत है, वह हमें उस पार्टी का नाम बताएँ जिनमें यह अवगुण न हों,कम या ज़्यादा तराज़ू लेकर वह बैठे,हमने यह मान लिया है कि कुछ कमियों के साथ अच्छी चीजें फेंक नही दी जाती हैं । लालू प्रसाद यादव इस माटी का हमको प्रसाद है, हम उनकी इज़्ज़त करते हैं, लालू कुछ भी हों,धोखेबाज़,चालबाज़,मक्कार नही हो सकते और लाशों पर राजनीति नही करते,बस इतना काफी है, उनके प्रति प्रेम के लिए,हाँ हम लालू से प्रेम करने लगे हैं... जन्मदिन मुबारक,प्रभु कृष्ण आपको सफलता और सरलता दोनों दें जैसे देते रहे हैं ।
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