तुम्हें देखकर गुस्सा नहीं आता बल्कि तरस आता है,मायूसी आती है।सोचता हूँ इतनी घिनौनी ज़हेनियत कैसे हो सकती है।कोई कैसे इतनी नफरत कर सकता है।मालूम है तुम्हारा धर्म अलग है।तुम्हारे विश्वास अलग हैं मगर वह कौन सी सोच है जो तुम्हें इतना खूंखार बना देती है।तुम्हें दूसरों के खानें ,पहनने ,चलने ,उठने बैठने सबमें कमी नज़र आती है।तुम जब अपने से अलग किसी को देखते हो तो तुम भूल जाते हो की तुम इंसान हो।दोस्त ।हालांकि तुम इस लफ़्ज के माइने भी नहीं समझोगे फिर भी दोस्त एक बार आइने मे अपनी सूरत देखिएगा।कुछ देर देखिएगा।आंखों में आंखें डाल कर देखिएगा।शायद आपको आपके अन्दर का इंसान नज़र आ जाए और आप का दिल रो दे।यह रक्षा,वह रक्षा के नाम पर जो आप इंसान से कुछ और बनें जा रहें शायद रूक जाए।इतना ध्यान से समझ लीजिए आपका किरदार ही आपके धर्म का चेहरा है।मै दावे से कहूंगा की आपका धर्म सही है आप गलत हैं ।आइये मेरे साथ मै आपके साथ रक्षा के स्थान पर सेवा करूंगा ।यह जो आपने रक्षा संगठन बनाए हैं अगर यह सेवा संगठन हो जाएँ तो आपका धर्म निखर आए।ज़रा भी अपनें धर्म और देश से सच्ची मोहब्बत है तो अपने नागरिकों,पड़ोसियों ,भाइयों से भी मोहब्बत कीजिये ।नफ़रत से सिर्फ बरबादी होगी।सिर्फ बरबादी ,इसके गवाह बहुत से देश हैं ।सीखिए उनसे और एक मोहब्बत से लबरेज़ हिंदुस्तान बनाइये।जहाँ सब मुस्कुराएं,ठहाका मारकर हस सकें बिना डर और दहशत के।यह हमारा और आपका कर्तव्य है और कर्तव्य से हटना अधर्म और आप अधर्म होने नहीं देंगे इसका भरोसा तो है। #हैशटैग #hashtag
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Saturday, January 16, 2016
Tuesday, January 12, 2016
कैफी
कल क्या है? १४जनवरी और क्या।हां और क्या कुछ भी तो नही सिवाय इसके की इसमें एक इंसान पैदा हुआ था।आपकी नज़र में वह शायर होगा ,नेता होगा ,समाजसेवी होगा या फिर कामरेड होगा।मेरी नज़र में वह था इंसान जो होना बेहद कठिन काम है या कहें साधना है।जी वह इंसान थे कैफी आज़मी ।उनका दिल मासूम था।हर दर्द पर आसूं थे।वह आसूं आगे चलकर गज़ल बनते और उनकी टीस बनती नज़्म ।जब हम सब ख्वाब देखते की मुम्बई जैसी चकाचौंध मिले तब उस ऊचाई को और सारी शान ओ शौकत को छोड़ कर वह गांव आ गए।उस गांव जिसे हम सब तरक्की के नाम पर कब का छोड़ चुके हैं ।अपनें मिजवां गांव की तरक्की के लिए इस इंसान नें ज़मीन और आसमान एक कर दिया।कैफी तुम्हें लिखें तो कितना लिखें ,महसूस करें तो कितना महसूस करें ।बस दोस्त तुम मुझे इतना आईना दिखाओ की मुझे अपना चेहरा भी अच्छा लगने लगे तभी तो मै भी इंसान बन पाऊगा।कैफी वादा है तुम्हारे ख्वाबों का हिंदुस्तान बनाएंगे।तुम ऊपर से मुस्कुराना मै नीचे खुशी खुशी पसीना बहाकर मुस्कुराता हुआ हिंदुस्तान बनाएंगे।वादा। ॥#हैशटैग #hashtag
Subscribe to:
Posts (Atom)