मुझे अछे से याद है जब मई रो रहा था तब उसने मुझे चुप करवाया था। उसका एहसास ही हमें हमेशा ज़िंदा रखता है। जब पहली बार दिल खोलकर मुस्कराया था तब भी वो साथ थी। जिस दिन सबसे रूत कर जान देने चला था तब भी उसने ही रोक थंऐ हमेशा उसका कहा मानता रहा हु। शायद ही किसी को इतना चाहा हो। मेरे परिवार और दोस्तों ने भी उसे हमेशा हमारे साथ रखने की कोशिश कि. सबने मन की उसके बगैर मे अधूरा हु। हमारे हर सफर,हर कामयाबी,हर न उम्मीदी में थी। आखरी सांस लू और हमारे हाथ में उसका साथ हो ........ तुम्हे.... बहुत याद करता हु मेरी प्यारी चाय
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Monday, August 10, 2015
meri rooh
तमाम खुशियों को भेज दिया हमने दुसरो के घर. ताकि उनके कहकहों की आवाज़े हमारे कानो में रास घोल सके। हमें हर वो मुस्कान बेहतरीन लगती है जो दूसरों के होंटो पर होती है. हमें हर उस आंसू से प्यार है जो हमारी आँखों में है. हाँ अगर ये आंसू हमारी आँखों को छोड़कर किसी और आँखों में जाने लगे तो मनो कोई दर्द सा उठता है। सीने में दर्द जिसके बाद मनो लगता है जिस्म ठंडा सा हो जाएगा। हम मारना चाहते है जल्द ही मारना। मगर दोस्त मारना इतना आसान तो नहीं। जब तक दूसरों की आाँखे नाम है तब तक ये आँखे बंद होने का इलज़ाम कैसे ले। कैसे मुह फेरे। मरेंगे मगर एक अदद मुस्कान बिखेरने के बाद।
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