अजब मुल्क़ है मेरा। एक तरफ दंगा होता है।भीड़ एक नौजवान को निगल जाती है।तो दूसरे धर्म की भीड़ दूसरे धर्म के नौजवान को निगलने निकलती है।उसकी आँख फोड़ देती है की तभी भीड़ में से बहुतों को दिल पिघलता है और उसे जाने देते हैं।ज़िंदा जाने देना बताता है की अभी भी गाँधी बुद्ध इस देश के ज़र्रे ज़र्रे में हैं।
अब देखिये जिसकी आँख फोड़ते हैं वह अस्पताल में बिस्तर पर अथाह तकलुफ में भी उस भीड़ को माफ़ करता है।उनके लिए कोई तकलीफ़देह अल्फ़ाज़ नही निकालता बल्कि उनके सीधे राह पर आने की दुआ करता है।तब लगता है इसी ज़मीन पर हज़रत मोहम्मद और हज़रत ईसा के पाँव की धूल भी है।
अब देखिये,यह हमारे भारत में ही मिलेगा और कहीं नही,वही भीड़ जो आँख फोड़ती है, उस धर्म के बीच से एक खड़ा होता है को भाई,तुम्हे मैं अपनी आँख दान देता हूँ।तुम मेरी आँख से यह खूबसूरत ज़मीन देखना।तब लगता है की वाक़ई इस ज़मीन में अभी भी कर्ण और श्री कृष्ण के पाँव की महक है।
मुझे मेरा देश हमेशा चमत्कृत करता है।दँगे होते हैं।कुछ लड़ते हैं।कुछ जोड़ते हैं।उन्ही में से कोई आग लगाता है।कोई आग बुझाता है।कोई चीखकर ज़हर उगलता है तो कोई कँधे पर हाथ रख करता है, यह पागल लोग हैं, अभी हम सब हैं न।
हमने अपनी ज़मीन पर उबलती हुई नफ़रत को बेतहाशा मोहब्बत के आगे हारते हुए बहुत बार देखा है।हो सके तो नफ़रत को फैलाने से ज़्यादा उन किस्सों को फैलाव जो मोहब्बत से भरे पड़े हैं।जिनमे प्रेम,त्याग,समर्पण है।सच जानो इन किस्सों से नफ़रत और नफ़रत पालने वाले लोग बेहद घबराते हैं।डरते हैं।बेचैन होते हैं।