आज भारत में एक जूनून सा दिख रहा है.लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रहे है.सवाल हैएक की एक अरब लोग अगर इसके खिलाफ है तो कैसे भ्रष्टाचार फलफूल रहा है.अगर हम इतने ही इमानदार है तो जन्लोक्पल की ज़रूरत ही क्या है
अन्ना के इर्दगिर्द नाचने वालो में सब इमानदार है इसपर शक है.भारत का हर तबका आज एक हो गया है तो क्यों न दिल से भ्रष्टाचार ख़त्म किया जाए.कब तक कानून के सहारे हके जाएँगे.सड़क पर चिल्लाने से अच्छा है की खुद
सुधरा जाए.गाँधी को मानने वालो में काफी लोग खुद इमानदार थे.अन्ना की इस भीड़ में इसकी ख़ास कमी है
मेरी समझ में एक अरब आबादी को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए किसी खास कानून से ज्यादा इमानदार नियत की
ज़रूरत है
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