तुम्हारे पास क्या है? कड़ककर डाकू नें एक बच्चे से पूछा ।मासूम से बच्चे नें अपने गिरोह को लुटते पिटते साथियों को देखा और कहा यह थोड़ी सी अशर्फ़ी हैं ।डाकू नें झपट्टा मारकर अशर्फियाँ लेली और फिर खौफ़नाक आवाज़ में पूछा और क्या है ? बच्चे नें उसकी आंखों में आंखें डाल कर,रोते बिलखते साथियों को देख बिना डरे सहमे कहा कि मेरी सदरी में भी कुछ और अशर्फियाँ हैं अम्मी नें डाकुओं से इन्हें बचाने के लिए हमारी सदरी में छुपा कर सिल दीं थीं।
डाकू नें हैरत से बच्चे पर नज़र डाली और पूछा।अगर तुम सदरी की अशर्फियों के बारे में ना बताते तो हम कभी ना जान पाते।हममे से कोई तुम्हारी सदरी उतार कर हरगिज़ न देखता । तुम्हे हमसे डर नहीं लगा।तुमने अशर्फियों के बारे में हमे क्यों बता दिया ।
तब मासूम सा बच्चा चहक कर बोल उठा मेरी अम्मी ने कहा था कभी भी झूठ मत बोलना । हर हालात में सच को मज़बूती से पकड़े रखना । मै अपनी अम्मी का कहा नही टाल सकता था। इसलिए वह बोल दिया जो सच था ।डाकू की आंखें भर आईं।शर्म से सर झुक गया, घुटनों के बल बैठ आंसुओं के साथ उस नन्हे बच्चे से माफी मांगने लगा।वही मासूम बच्चा आगे चलकर अब्दुल क़ादिर जीलानी के नाम से महान सूफ़ी सन्त बना।
कभी यह किस्सा कोर्स की किताबों में "सच्चा बालक" के नाम से पढ़ा था मगर अब नहीं है।अब किताबों में बांटने वाले किस्सों की भरमार है,बिना सिर पैर की लन्तरानियां हैं मगर ऐसे किस्से ग़ायब हो गए।इन्हें थोड़ा सा याद करने में कुछ चला नही जाएगा बल्कि हां इतना ज़रूर हो जाएगा कि हम माँ का कहना शायद मानने लग जाएँ।
शायद बिना डरे और घबराए सच बोलने की हिम्मत आ जाए ।
सच्चे बालक ही एक खुशबूदार मुस्कुराती दुनिया बना सकते हैं ।हम सब ऐसा बनकर खुशहाल हिंदुस्तान बनाए जो दुनिया को खूबसूरत राह दिखाए।जो सच कहने से न डरे।जो माँ की दिखाई राह से दूसरों की माँ की मुश्किलें दूर करे।जो एक माँ के आँचल की छाँव में दूसरी माँओं के लिए फूल चुने।आज ग्यारहवीं है,अब्दुल क़ादिर जीलानी का दिन।सच्चे बालक का दिन।मेरी ज़िन्दगी में बचपन में ही गहरी छाप छोड़ने वाले सच्चे बालक का दिन ।
एक चीज़ फिर कहता हूँ वह इंसान समझदार हैं जो चाहे किसी भी तरह अपने बुज़ुर्गों को याद करते हों,याद तो करते हैं । ग्यारहीं है आज,ज़ाहिर है दिलों को बाँटने वालों और नफ़रत को बढ़ाने वालों के लिए एक और मौके का दिन है । फ़िरक़ा परस्ती की मशाल लेकर तमाम सतही बातें करने का भी दिन है । इन सबसे अलग अब्दुल क़ादिर जीलानी की ज़िन्दगी को देखिये और इल्म केलिए अपने को तैयार कीजिये । उनकी ज़िन्दगी को रौशनी बनाइये और आजके दिन अपने बच्चों को ज़रूर बताईये की कौन थे अब्दुल क़ादिर जीलानी । जिस चैप्टर को वक़्त का बादशाह तंग नज़र होकर हटा दे,उस चैप्टर को याद करके बच्चों को सुना जाइये । सच्चा बालक घर घर पहुँचा दें ताकि दुनिया को संवारने वाले लाखों सच्चे बालक पैदा हो सकें...
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