आखिर मीडिया के लोग इतने अख्खर क्यों होते है................क्यों उन्हें इतना घमंड होता है........आसुतोष हो या रजत ....माना की आप एक बार नाम है लेकिन.............क्यों.......मई भी मीडिया में एक नाम तलाश रहा हु ...........लेकिन अपने चैनल से दुसरे चैनल तक सब एक जैसी जमात बिची हुई है..........
भाई भतीजावाद पर सबसे ज्यादा ऊँगली हम ही युथाते है......लेकिन क्या मीडिया से ज्यादा कहीं और है ऐसा................बहुत अफ़सोस होता है देख कर ये सब..............लेकिन मन में तगर विश्वास है की ये सब सुधर जाएगा......................थोरी सी या बहुत सख्त मेहनत की ज़रुरय्त है................
हम काम दिखने वाला तो अच्छा करते ही है लेकिन हमारे आफिस में क्या चलता रहता है जग ज़ाहिर है...................शराब और शबाब आम है...................
No comments:
Post a Comment