तमाम खुशियों को भेज दिया हमने दुसरो के घर. ताकि उनके कहकहों की आवाज़े हमारे कानो में रास घोल सके। हमें हर वो मुस्कान बेहतरीन लगती है जो दूसरों के होंटो पर होती है. हमें हर उस आंसू से प्यार है जो हमारी आँखों में है. हाँ अगर ये आंसू हमारी आँखों को छोड़कर किसी और आँखों में जाने लगे तो मनो कोई दर्द सा उठता है। सीने में दर्द जिसके बाद मनो लगता है जिस्म ठंडा सा हो जाएगा। हम मारना चाहते है जल्द ही मारना। मगर दोस्त मारना इतना आसान तो नहीं। जब तक दूसरों की आाँखे नाम है तब तक ये आँखे बंद होने का इलज़ाम कैसे ले। कैसे मुह फेरे। मरेंगे मगर एक अदद मुस्कान बिखेरने के बाद।
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