हैप्पी मदर्स डे । अक्सर जब भी मदर्स डे आता तो हम इमोशनल हों जाते हैं, मां में संसार,ईश्वर,देवी सब देखने लगते हैं, हमें तो साक्षात देवी के अस्त्र शस्त्र भी दिखने लगते हैं । जैसे ही फूल से झड़ते शब्द लिखने बैठते हैं, लगता है कोई बहुत ही चपटी चीज़ पीठ में चट सी चिपकी है, जब तक इसको पहचानने की कोशिश करें,तब तक गिनती दहाई छूने लगती और जब अपने बहुत से निशान छोड़ देती,तब एहसास होता कि चप्पल है, जिसने अपनी जगह को दगा देकर,हाथों से अपने हुनर को दिखाने को हमारी पीठ चुनी है ।
मां है तो तमाम एहसासों का नाम मगर जिसने हैंगर की मार ही न खाई हो,वह कैसे भला माँ को याद कर पाएगा । सर पर हाथ तो तब फिरते थे,जब बुरे दिन होते मगर अच्छे दिनों में अगर झाड़ू,वाइपर,बेलन,पँखा हमारे जिस्म को न छू लें,तो लगता मां हैं ही नही क्या,इनके बिना मां का तसव्वुर बेईमानी लगता है ।
पिता जी पर रखा गुस्सा हो या दादी की ज़ुबान को ज़ब्त करते हुए अपने दर्द को रास्ता देना हो,जो सबसे आसान शिकार मिलता,उसपर बरसने वाले इन हाथों को आज याद करना चाहिए । हम हमेशा संवेदनाओं से लदे पेड़ की तरह मां को याद नही करना चाहते,हम उन्हें देवी की तरह एक कमरे में बैठाकर पूजना नही चाहते । हम उनकी मार से बचते हुए ज़िन्दगी गुजारना चाहते हैं, उनकी घूरती हुई आंखों के डर के साय में निडर होना चाहते हैं ।
हमारी पीठें,हमारे सर,हमारे कूल्हे,हमारी फीलियां गवाह होनी चाहिए कि जब इन्होंने अपनी सीमाएं लांघी थीं, तो इन्हें छाँट दिया गया था । मुझे मां का वही रूप पसन्द है, जो बच्चों को बच्चा बनाए रखती थीं । मुझे वह बड़ी होती औलाद की माँ नही पसन्द,जिसे अपनी खुशी को गले मे घोटना पड़े । मुझे अपने बेटे के सामने संकोच में मुँह न खोलने वाली मां नही पसन्द,बल्कि बेटे के कनपटी लाल करके उसकी गलती को सुधार देने वाली मां पसन्द है ।
मुझे मां की मूरत नही पसन्द बल्कि गलती करके मां के सामने मूरत बनी औलाद वाली मां पसन्द है । हममें से अधिकतर को ऐसी ही मां मिली हैं, जिन्होंने हमे छाँट कर बड़ा किया है । तो क्या हमारी मोहब्बत में कोई कमी आ गई,हरगिज़ नही,बल्कि बनावटीपन के हर पर्दे हमने उतार दिए ।
आज मदर्स डे है, तबियत से याद कीजिये मगर बदन के उस हिस्से को भी सहला लीजिये, जिसपर माँ ने तराश लगाई थी । वह बड़े ही फीकी औलादें हैं, जिनको मां के हाथ के अस्त्र का स्पर्श नही हुआ है, खैर हम लोगों को तबियत से स्पर्श हुआ है । मुनव्वर राना के शेर तो श्रद्धा लाते हैं मगर मां के हाथ का बटा प्रसाद भी याद आता है, यही मिश्रण तो हमारा जीवन है, जिसे हम कम नही करना चाहते,मदर्स डे की शुभकामनाएं💐♥️
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