Thursday, May 6, 2021

कहानी यम और मलकुल

आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर बड़ी अफरा तफरीह थी । दो अजीब सी शक्ल वाले लोग पसीने से तर बतर मेहनत में लगे हुए थे । दोनों अपने कामों को इस क़दर मुस्तैदी से अंजाम दे रहे थे कि एक से एक मेहनती इंसान भी उनके सामने शर्मिंदा हो जाए,हालांकि इंसान शर्मिंदा होने के सिवा कर भी क्या सकता है ।

दोनों आजकल ओवरटाइम कर रहे थे,ओवरटाइम क्यों कहे,बल्कि टाइम जैसी चीज़ गायब हो चुकी थी, बस काम ही काम था । यह दोनों आपस मे पहले परिचित थे या नही,पता नही,मगर आजकल दोनों लगातार भागदौड़ कर रहे थे,अपने नीचे की कलीग को निर्देश देते और ख़ुद बिना उनकी तरफ देखें, अगले बिस्तर की तरफ बढ़ जाते,हाँ बिस्तर, उनके काम की वजह आज बिस्तर पर ही तो थी ।

यह दोनों अपने अपने मानने वालों के घर जाते और इतनी तेज़ी से उस घर से निकल जाते की घर के लोग कुछ समझ पाते,उससे पहले यह दूसरे घर घुस जाते,यूँ इनका आना जाना कोहराम मचाए था,मगर यह सब चीज़ों से कान ढके,बस बढ़ते ही चले जा रहे थे ।

अब तक अपने अपने हिस्से के घरों में दाख़िल होने वाले यह दोनों,अचानक एक ऐसे घर में पहुँच गए,जहाँ इनके पैर ठिठक गए । एक को एक महिला को लेकर जाना था, दूसरे को उस महिला के पुरुष को ले जाना था,दोनों के जाने का वक़्त एक था,इसलिए यह दोनों अचानक एक घर पहुँच गए ।
दोनों ने पहली बार नज़र भरकर एक दूसरे को देखा, फिर बिस्तर पर पड़े दो इंसान देखे और उनके सीने पर हाथ रखे एक चार साल के बच्चे को देखा । बच्चा अपने हाथों से दोनों को जिलाने की नाकाम कोशिश कर रहा था । बिस्तर पर पड़े उसके मां बाप सांस उखड़ने और चलने के बीच दम लेकर बच्चे को देखते और कसमसा कर रह जाते ।
दूर खड़े यह दोनों पहली बार शंका में थे कि कौन पहले अपना काम करे,जब दोनों बच्चे को देखते तो ठहर जाते,इनकीं आंखों में शर्म थी,यह शर्म पहले भी तमाम बच्चों को अनाथ करते आ जानी थी मगर सबको पता है, हम अकेले बहुत बेशर्म होते हैं, किसी के सामने बड़े शर्मदार,तो आज मौका था कि यह दोनों आमने सामने थे,तो एक दूसरे की आंख में शर्म भी टपकने लगी ।

एक ने पूछा,तुम कौन हो,उसने कहा मलकुल मौत और सवालिया नज़रे पहले वाले कि तरफ गड़ाई,वह बोला मैं यमराज । मलकुल मौत ने अपने समकक्ष यमराज को देख कहा,आजकल आपपर बहुत काम पड़ रहा होगा,यमराज ने हाँ में सर हिलाया और बोले,आप को भी लगातार लगे रहना पड़ रहा होगा,इन इंसानों को थोक में ढोना मुश्किल हो रहा,खैर अपनी सुनाए, यह दोनों अपनी बातचीत में लग गए और उधर बिस्तर पर पड़े दोनों अपने बच्चे को सांसों के सहारे आखरी गिनती सिखाने लगे ।

जब दोनों की बात खत्म हुई,तो यमराज बोले,इसका क्या करें,एक तुम्हारा है, रक हमारा,यह बच्चे का क्या होगा,इसे लेने किसे आना पड़ेगा । मलकुल मौत बोली हो सकता है, बच्चे को हम सबकी ज़रूरत ही नही पड़े,वह खुद ही चला आए,जहाँ उसकी मर्जी हो,हमे तो इनमें से अदला बदली कर लेनी चाहिए । यमराज बोले हाँ, यह दोनों ज़िन्दगी भर गंगा जमुनी तहज़ीब ज़ुबान पर लाते रहे हैं, चलो आज इंसानों की गंगा जमुनी तहजीब अपनाकर देखी जाए,तुम मेरे वाले को लो जाओ और हम तुम्हारे वाले को लेकर चलते हैं ।

दोनों ने ऐसा ही किया और जैसे ही घर से बाहर निकले,मलकुल मौत के कंधे पर यमराज का हाथ था,दोनों कहकहे लगा रहे थे ,मलकुल मौत ने कहा,भाई,आपके पास आजकल हमसे ज्यादा काम है, कहिए तो हम भी हाथ बंटा लिया करें । आप अकेले पपरेशान होते हैं । यमराज की आंख में आंसू आ गए और मलकुल मौत से कहा, यह कोरोनाकाल निकल जाए,तो हम मिलकर साथ खाना खाएँगे, हम भाई ही तो है, अगर मिलकर काम करते,तो इतनी बोरियत नही लगती,कभी तुम मेरे आंसू पोछते तो कभी हम तुम्हारे,ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत होती यार । बच्चा बिस्तर पर पड़े जिस्म देख रहा था और देख रहा था गंगा जमुनी तहज़ीब को दूर आसमान और ज़मीन के दरमियान गुम होते हुए भी....
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