कुछ लोग हमसे बेहद नाराज़ थे । मेरा अनुशासन उन्हें गले का फंदा लगता था ।वह मेरे साथ बैठना भी नही चाहते ।उनके खिलाफ मोहल्ले के बड़े क़ाज़ी ने एक फ़ैसला दे दिया,हालाँकि उन नाराज़ लोगों के ख़िलाफ़ मोहल्ले के कुछ लोग भी लामबंद थे और वह मेरे साथ थे ।यह सब आम लोग थे और मैं सियासी ।
मैने अपनी ताक़त का इस्तेमाल करके क़ाज़ी के फैसले को पलट दिया ताकि नाराज़ लोग मेरे साथ आ जाएँ मगर यह क़दम बहुत कारगर नही हुआ क्योंकि उन नाराज़ लोगों की फ़ेहरिस्त में मैं था ही नही,उन्हें हमपर ज़रा भी भरोसा नही था । ऊपर से मेरे साथ वाले भी हमसे उलझ गए ।
उसी रात मैने अपने मोहल्ले के खास चम्मच को कहा कल सुबह तुम मेरे खिलाफ नारे बाज़ी करते हुए मोहल्ले भर में जुलूस निकालना ।वह चम्मच बोला हुज़ूर हमेशा आपका नमक खाया अब आपके खिलाफ हरगिज़ नही ।तब मैंने कहा कल जब तुम मोहल्ले वालों के साथ मिलकर मेरे खिलाफ नारे लगाओगे तो वह नाराज़ बिरादरी मुझमे मसीहा देखने लगेगी और मेरे साथ हो लेगी ।
चम्मच बोला मगर हुज़ूर जो मोहल्ले के लोग आपके खिलाफ हो जाएँगे,तब मैं मुस्कुराया और बोला अबे मोहल्ले भर को मालूम है की भला मैंने कभी क़ाज़ी की सुनी है ।जब मैं उसके फैसले को उलट सकता हूँ,तो उसे अपनी ऊँगली पर भी नचा सकता हूँ ।सबको पता है क़ाज़ी का फैसला भले ही पलट दिया है मगर मैं अपनी बिरादरी को इस फैसले की चपेट में आने ही नही दूँगा ।पूरा मोहल्ला मुझपर इसीलिए तो भरोसा करता है ।और हाँ यह चाहे जितना उछले कूदें ,बिरादरी की रक्षा के नामपर यह लाइन सीधी करते हुए मेरे ही पास आएँगे,जाओ और
मेरे खिलाफ लड़कर मेरे जीतने का मार्ग प्रशस्त करो...
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