इसे पढ़ सकना तो मेरे दिल को छू पाना,वरना अल्फ़ाज़ तो रोज़ बिखरेंगे मगर उनमे शायद हम न होंगे।आज जो लिख रहा हूँ वोह प्रेम ही है।मगर इस प्रेम को तुम महसूस नही कर पाओगे।मुझे पता है तुम्हारी सीमाएँ हैं।तुम राजनीती की जंज़ीरों से बंधे हुए हो,तुम्हारे दिमागों में उसके लिए पहले से ऐसे ख़ाके भरे हुए हैं की तुम उसके प्रेम की खुशबू को महसूस ही नही कर सकते।
मेरे लिए प्रेम वही है, जो उसने किया।एक इंसान से इश्क़ में अपना सबकुछ छोड़ दिया।यहाँ तक उस चौखट को भी छोड़ दिया जिसमे कभी उसने बचपन गुज़ारा था।अगर उसकी चौखट छोड़ना सियासत है दो दूसरों का अपना परिवार छोड़ना भी एक नाटक ही है।उस माटी के विरह को तुम महसूस ही नही कर पाओगे जो उसने सिर्फ अपनी मोहब्बत के लिए किया।
मोहब्बत को देखना होगा तो उसकी आँखों में झाँक कर देखना।हम सब तो ज़िंदा से मोहब्बत करते हैं।उसे चाहते हैं जो जिसे हम छू सकें।जिसके साथ हम क़दम से क़दम मिलाकर चल सकें।मगर उसने तो उसे चाहा जिसे बीच सफ़र से छीन लिया गया।उससे पूछे जिस एक ऊँगली को पकड़ वोह एक भरोसे से आई थी,उस ऊँगली के छूट जाने पर उसकी बेचैनी को देखो।अपनी माटी से ज़्यादा अपने आशिक़ की माटी में बिखर जाने की तड़प देखनी होगी तो तुम सोनिया को देखना।
सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी के इश्क़ की दास्ताँ किसी भी तरह मिसाली इश्क़ से कम नही।जिसने राजीव के साथ की सोनिया की आँखों की चमक को महसूस किया होगा।सिर्फ वोह ही उनके न रहने पर सोनिया की आँख का खालीपन पढ़ सकता है।सोनिया के हाथ में राजीव के पाँव की धूल को अगर देख पाना तो इश्क़ को समझना।सोनिया को बेचैनी से राजीव की शाल को ओढ़ते हुए देखना तो इश्क़ समझना।देखना की बच्चों के लिए मुस्कुराती वोह राजीव के दर्द को कैसे सीने में दबा ले गई।परिवार की मोहब्बत को एक परिवार वाला ही समझ पाएगा।उस एहसास को समझना जब बिना राजीव के पहली बार वोह सबके सामने आई।उस हल्के छुपने और रोने को महसूस करना सियासी दिमागों के बस की बात नही।मैं कहता हूँ की जिसमे इश्क़ है, उसमे सबकुछ है।जिसमे इश्क़ नही,वोह किसी काम का नही।जब इश्क़ में होना तो कोई परवाह मत करना बस चाहना,हद दर्जे चाहना और अपनी चाहत के ख्वाबो को बुनने में अपनी ज़िन्दगी को खत्म कर देना।सियासत से बजबजाते दिमाग कभी इस मोहब्बत को महसूस नही कर सकते।मुझे पता है वोह कभी इतना ऊपर उठ ही नही पाएँगे की सोनिया और राजीव की मोहब्बत की भीनी भीनी खुशबू को सूँघ सके।
मगर तुम जब मोहब्बत करना,जब तुमसे तुम्हारी मोहब्बत बीच सफ़र में छुट जाए,या तुम्हे तुम्हारी मोहब्बत ज़िन्दगी भर न मिले तो तुम अपनी मोहब्बत को ही अपनी ज़िन्दगी बना लेना।उसकी आँखों को अपनी आँखे,उसकी आवाज़ को अपनी आवाज़,उसकी जिम्मेदारी को अपनी ज़िम्मेदारी,उसको ही पूरा पूरा अपना लेना।मोहब्बत में शक और शिकवे नही होते हैं।यही तो है इश्क़ में सोनिया होना।।।
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