आप सबने कंकर कंकर जोड़कर जिस मुल्क़ की बुनयाद धरी थी उसमे हम सब बहुत दिन ख़ुशी ख़ुशी जी लिए।जिस आज़ादी के लिए सलाखों में आज आपने आखरी साँस ली थी उसका पूरा मज़ा हम लोगों ने पिछले बहुत से सालों में ले लिया।
अब हमारा दिल भर गया है।अब आप सबकी कुर्बानियाँ पीले पन्नों में दीमक का इंतज़ार कर रही हैं।
हमने नए रास्ते चुन लिए हैं, उन रास्तों में कहीं आप नही हैं।होना भी नही चाहिए वरना आपका दम घुटेगा।खैर हम पागल,बोझिल,पुराने,फ़ालतू के लोगों की तरफ से श्रद्धांजलि।।नए लोग अपने नए हीरो को याद करेंगे । अभी हमारे जिस्म से पुराने ख़ून के क़तरे नही गए हैं, इसलिए याद आ गए।
देश के एक हिस्से के मज़दूर,आदिवासी और किसानों को एक करके अपने सुनहरे भारत के लिए जो क़ुर्बानी दी थी ।उसने इस मुल्क़ को बहुत सालों तक मिलजुलकर चलने की सलाहियत दी ।हम ही गलत थे,अपनी तरक्की के रास्तों में आपको भूलते गए और बढ़ते गए ।आज जब पता नही कहाँ पहुँच चुके हैं, तब हम सब आपस में बहुत बंटे, बिखरे हुए हैं ।हमारे दिलों में मोहब्बत दम तोड़ चुकी है ।अब एहसास होता है बिरसा,की आप सब क्या करके गए थे ।किस शिद्दत से सबके दिल जोड़कर जंज़ीरों से मुकाबला किया था ।आज यह सीने में मुट्ठी भर गोश्त का टुकड़ा,जिसे कुछ लोग दिल कहते हैं, वह आपको बेहद याद कर रहा है।
।बिरसा मुंडा को याद कीजिये और संघर्ष के रास्ते बुनिये,सुक़ून इनके ही साथ आएगा,शाँति इनकी ही चादर से बिखरेगी ।सलाम बिरसा मुंडा
(9 जून,जेल में वह आखरी साँस,हमारी खुली साँसों का रास्ता थी)
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