एक भेड़िया था ।उससे जँगल में लोग आतंकित तो थे मगर अपने राजा शेर के भरोसे वह इत्मिनान में भी थे ।वक़्त गुज़रता गया शेर बूढ़ा होता गया और उसका कुनबा टूटता हुआ छोटा होता गया ।भेड़ियों में ज़बरदस्त एका था ।वह ख़ून करते तो साथ,गोश्त खाते तो साथ,बाहर निकलते तो साथ,शिकार दौड़ाते तो साथ,उनमे गज़ब का अनुशासन था ।
एक दिन जँगल में राजा शेर पर इलज़ाम लगा की वह सबसे ज़्यादा गोश्त खाता है, यही नही वह जँगल की सीमाओं तक भी नही जाता,ऊपर से उसकी बिरादरी के दूसरे शेर जगह जगह उसके नाम से वसूली करते हैं ।जँगल में ज़बरदस्त असन्तोष था मगर शेर उन्हें समझा नही सका की यह आरोप मनगढ़ंत हैं ।उसने एक दहाड़ मारी सब जानवर सहम गए ।तब वह मुस्कुराया की डरो मत। हम तुम्हे नुकसान नही पहुँचा सकते ।यह आख़री आवाज़ मेरे जाने की है आप सबने बहुत साल हमे अपना राजा चुना इसका शुक्रिया ।आइंदा कभी ज़रूरत लगे तो मांद में बेख़ौफ़ आ जाइयेगा और कहता हुआ शेर चला गया।
फिर जँगल ने अपने लिए भेड़ियों को चुना क्योंकि वह बहुत ज़्यादा थे,जिससे सुरक्षा का एहसास होता ।इसलिए भी चुना क्योंकि वह अनुशासित थे,साथ आते और साथ जाते।वह एक थे,एक साथ झपटता मारते थे ।जँगल के लिए एक अच्छा ख्वाब थे वह मगर धीरे धीरे जँगल भर में भेड़ियों का कुनबा फैल गया ।जिस शेर के एक आध रिश्तेदारों को जँगल बर्दाश्त नही कर सका वह भेड़ियों के पूरे परिवार को हर एक चोटी पर,हर एक तालाब पर,हर नदी के किनारे पर,हर फलदार पेड़ के नीचे बैठाकर खुश थे ।
जँगल में भेड़ियों की शिकायत बाहर ना जाए इसके लिए भी शेर की मांद के बाहर कुछ भेड़िये थे ।जँगल ने अपने लिए बेतरतीब बेहरहमी से बेज़रूरत चीड़ फाड़कर फेकने वाले को चुन लिया था ।अब जँगल में हर ओर से चीखने की तो आवाज़ आती थी मगर भेड़ियों की हुवा हुवा हुवा के आगे सब शाँत हो जाता ।
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