यह क्या मीर बगल में जानमाज़ दबाए,सर झुकाए चले जा रहें हैं।कल तक तो बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे की धर्म यह है, वह है, वाहियात चीज़ है, बेड़ियाँ हैं अल्लम् गल्लम्।मीर को तेज़ी से मस्जिद की तरफ जाते देख पण्डित विद्याधर मन ही मन कुढ़ रहे थे।आखिर अपने मज़बूत साथी को यूँ अल्लाह मियाँ के सामने टूटता देख उनसे देखा नही गया।मस्जिद की सीढ़ियाँ चढ़ते मीर को आवाज़ दी विद्याधर ने,मीर रुक जाओ,यह कौन सा गुनाह करने जा रहे हो।
मीर ठिठक कर रुक गए,विद्याधर ने नज़दीक़ जाकर मीर के कानों में अपना कलमा पढ़ा "ऐ मीर,धर्म एक अफीम है।"मीर के हाथ से जानमाज़ और तस्बीह छूट गई।तस्बीह सीढ़ियों पर टूट कर बिखर गई,एक मोती यहाँ तो एक वहाँ।कायदे से गुंथे सौ मोती, बेकायदे से सौ तरफ बिखर गए।मीर खामोश सीढ़ियों पर बैठ गए बगल में विद्याधर भी।
मीर ने विद्याधर का हाथ अपने हाथ में लिया और बोले।धर्म एक अफीम है।विद्याधर ने हाँ में सर हिलाया।मीर बोले यानि धर्म एक नशा है,विद्याधर ने हाँ कहा।मीर फिर बोले यानि नशा बुरा चीज़ है।विद्याधर हाँ में सर हिलाए।फिर मीर ने कहा तो कल रात हम तुम जो शराब की बोतलों के साथ लुढ़क रहे थे वह क्या है।अगर बीती रात शराब का नशा जायज़ है विद्याधर तो आज सुबह की नमाज़ का नशा भी जायज़ है।विद्याधर तुम्हे पता है की मार्क्स बड़े चालाक थे।अगर वह अफीम का नशा कर रहे होते तो धर्म को कभी अफीम नही बताते बल्कि कोकीन बताते।कोकीन का नशा करते तो धर्म को हीरोइन बताते।अगर चाय का नशा करते तो धर्म को पुरानी शराब बताते।
विद्याधर मुँह खोले हैरत से मीर को देख रहे थे।मीर ने वापिस सारे मोती बीने,जानमाज़ उठाई और कहा जिस दिन हर नशे से दूर हो जाना उस दिन धर्म के नशे से भी दूरी रखना।हम आज रात भी शराब पियेंगे और सुबह यहाँ सीढ़ियों पर भी मिलेंगे।नशा हर तरह का बुरा है साथी।अब जब नशा छूटेगा तो सारा छूटेगा।अफीम,शराब,सिगरेट सब वरना सब तरह का नशा मीर को चलाता रहेगा।
विद्याधर ने मायूसी से मीर को जाते हुए देखा और लौटते में दो बोतल शराब की लीं और बड़बड़ाता हुआ कहा जाओ,देखते हैं किस नशे में ज़्यादा मज़ा है।रास्ते में गुड़हल के पेड़ से एक ताज़ा गुड़हल का फूल तोड़ता हुआ विद्याधर आगे बढ़ता है।दो क़दम बाद फूल को कान्हा के मन्दिर की तरफ उछालता हुआ कहता है, यहलो रख लो,जब तक मैं नशे में हूँ,तब तक तुम भी हो,जैसे मीर का ख़ुदा है।तुम मनाओ की हमारा नशा न उतरे,हम दोहरे चरित्र से बाहर न आ जाएँ।
तुम सब भगवान लोग मिले हुए हो।तुमने साजिश से मीर को तोड़ा है, अब मुझे भी तोड़ लिया।मैं खुद से वादा करता हूँ जिस दिन सारा नशा छोड़ दूँगा उस दिन तुम्हारे धर्म के नशे का आखरी दिन होगा।खैर घबराओ नही,अभी मेरा लीवर दो सौ लीटर शराब और सोख सकता है।तब तक तुम धूब बत्ती में मॉक्स लगाकर मीर के ख़ुदा के साथ हमे बोतलों के साथ लुढ़कता पुढकता देखो।गुड बाय।रेड सैल्यूट कान्हा।
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