वह घर में अपने गिरते कद से परेशान थे ।घर के लोगों को उन्होंने पहले भरोसा दिलाया था की उनके हाथ में कमान रहेगी तो राशन,बिलों का भुगतान,बच्चों की फ़ीस और घर के दूसरे लोगों की ज़रूरते हमेशा वक़्त पर पूरी होंगी ।यह वादे और घर की लगाम लिए हुए उनके कई बरस गुज़र गए मगर घर में रोज़ ही कोई न कोई कमी निकलती और उनपर सवाल उठते ।पूरे घर का हर हिसाब किताब गड़बड़,हर एक छोटी छोटी चीजों से परेशान होने लगा,अब इन साहब को कुछ समझ नही आए ।अब सवाल उनकी घर की हुकूमत पर उठने लगे ।यहाँ तक माँ और पत्नी भी ताने देनी लगी ।उनकी तमाम लफ्फाज़ी उनके ही बच्चों के सवाल के आगे बिखर जाती ।
एक रोज़ छत पर खड़े अपने पड़ोसी को यह दिक्कत बता रहे थे,उनसे सलाह ली की बताओ घर का निज़ाम कैसे अपने हाथों में बरकरार रखें ।पड़ोसी तजुर्बेकार था,उसने कहा यार तुम हमसे लड़ लो ।वह हैरान से पड़ोसी का मुँह देखने लगे,तभी वह बताता है की कल सुबह तुम हमसे लड़ना,लड़ाई इतनी हो की तुम्हारे घर वाले सब कुछ भूलकर तुम्हारे पीछे खड़े होंगे ।घरों के बेवक़ूफ़ लोग तमाम आँसू और जज़्बात के साथ तुम्हारी मदद भी करेंगे ।अपने हिस्से की रोटी और दौलत भी तुम्हारे कदमो में डाल देंगे और कहेंगे,पड़ोसी को हराना ही हमारा सबका एकमात्र ध्येय है ।तुम्हारी सारी कमी नज़रअंदाज़ करके वह हमे हराने लग जाएँगे और मेरे हारते ही तुम्हारे सारे पाप धुल जाएँगे और घर में अगले कई साल तक तुम्हारी वाह वाह भी रहेगी ।जो थोड़ी बहुत उठा पठक हो,तो इन्हें हल्का फुल्का आपस में लड़वाकर मज़े करते रहना ।
सब बात समझकर उन्होंने अपने पड़ोसी से कहा की यह तो अचूक मन्त्र दिया मगर इससे तुम्हे क्या लाभ ।पड़ोसी ने मुस्कुराकर कहा, यही तो पड़ोसी धर्म है, जब हमे ज़रूरत हो तब तुम भी यही करना ।दोनों ठहाके मारकर हँसते हैं की तभी पड़ोसी के घर से बर्तन फेंकने की आवाज़ आती है ।तब पड़ोसी बोलता है,सुबह एक भाई को कँजूस और दूसरे को बेवकूफ कहलवाया था ।आपस में लड़ रहें हैं, अभी जाकर दोनों को डाँटेंगे,पुचकारेंगे और मज़े से दोनों के कँधे पर चैन की नींद लेंगे और राज करेंगे ।यह याद रखना हुक़ूमत का कोई भाई,बहन या रिश्तेदार,दोस्त नही होता ।मज़े करो दोस्त ।दोनों पड़ोसी हँसते हुए अपनी अपनी छत से उतरते हैं ।दोनों की छतों के बीच रात में जो महीन लकीर होती,वह रौशनी फैलते फैलते चौड़ी होती होती कुछ कुछ सरहद सी लगने लगती है...
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