जब तुम किसी सरकारी स्कूल में शिक्षक बने बैठे होगे और एक भीड़ आएगी तुम्हे पीट पीट मार डालेगी ।चिल्लाएगी की हमारे टैक्स से तनख्वाह पाते हो और पढ़ाते भी नही हो,तब सब तुम्हे मरता हुआ देखेंगे ।
जब तुम सरकारी अस्पताल में डॉक्टर होगे,तो एक भीड़ आएगी और तुम्हे दौड़ा दौड़ा पिटेगी की क्या तुम सही से इलाज भी नही कर सकते,वक़्त पर अस्पताल भी नही आ सकते,तुम सरिया डंडो से पिटते हुए दम तोड़ोगे और कोई उफ़्फ़ भी नही करेगा ।
बाइक पर मस्त तुम बिना हेलमेट के चले जा रहे होगे,पीछे से पन्द्रह बीस लड़को की भीड़ लाठी डंडे से तुम्हारा सर फोड़ देगी,वह भीड़ कहेगी की तुम मेरे देश का कानून भो नही मानते,बिना हेलमेट के चलते हो,तुम्हारी फूटी खोपड़ी से बहते ख़ून को कोई नही देखेगा ।
जब तुम यहाँ वहाँ चलते हुए सड़क पर कूड़ा फेकोगे तो उसी वक़्त एक भीड़ तुम्हारा हाथ काट लेगी और कहेगी की तुम देश को गन्दा कर रहे हो,जब तुम यहाँ वहाँ पेशाब करते देखे जाओगे,तो एक भीड़ तुम्हारा लिंग काटकर हवा में उछालती हुई चीखेगी की यह दीवार गन्दी कर रहा था,हमने इसे शुद्ध कर दिया,लोग तुम्हारे तड़पने पर तालियाँ बजाएँगे ।थानो के बाहर पुलिस पीटी जाएगी,न्यूज़ रूम में ऐंकर और उसके गुर्गे अपने मन के विपरीत बात सुनकर मेहमानो को पीटेंगे ।
आपको लगता है, यह नही होगा,तो आप मूर्ख हैं ।जब भीड़ शासन,सुप्रीम कोर्ट,सरकार को निकम्मा मानकर खुद न्याय करने निकल चुकी है, तो यह भी होगा ।तैयार हो जाइये पिटने के लिए,वह भी अपने ही घरों के बच्चों से,जिन्हें आपने दूसरों को पीटने के लिए तैयार होने दिया है ।
अफसोस यह है की देश किसी की प्राथमिकता में है ही नही ।देश के नामपर केवल भोगौलिक सीमाएँ ही रह गई हैं ।नियम ,कानून,संविधान,प्रशासन सब पंगु बना हुआ है।भीड़ को पुलिस पर भरोसा नही है ।भीड़ को अपनी ही चुनी हुई सरकार पर भरोसा नही है ।भीड़ अपने ही प्रधान सेवक की बात को नकार कर गाय के नामपर किसी को भी खींचकर मार डाल रही है ।तो ऐसी भीड़ जिसके मुँह में ख़ून लग चुका हो,वह जल्द ही पलटेगी और तुम सब,जो ख़ामोशी से हत्याओं का आनंद ले रहे हो,पीटे जाओगे ।
आने वाले वक़्त में लाठी,डंडो,तलवारों,चेन,चाकू और बम से लैस भीड़ ही सिस्टम को चलाएगी ।यह सब होगा,इसे हर उसने होने दिया,जिसने अपने घरों के बच्चों को हत्याओं,हिँसा और बदले को लेकर प्रोत्साहित किया या ऐसा करने वालों को चुनकर प्रोत्साहित किया ।हम सब एक लम्बी प्रार्थना में जा रहें की हे ईश्वर!अगर हम सब गले तक अधर्म में डूबे हैं, फिर भी धरती से आपका अब भी रत्ती भर प्रेम बचा हो,तो हम सबके हृदय को साफ़ करदें,जिससे नफ़रत निकल जाए,वरना अंत बड़ा ही बुरा होने वाला है...
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