हम सबने CAB से CAA तक संघर्ष किया,NRC के ख़िलाफ़ बिगुल फूके, NPR पर शंकाएँ जताई यानि हर वह चीज़ जो सँविधान को नुकसान पहुँचाता, देशवासियों को परेशान करता,उसकी मुख़ालफ़त की गई है । यह लड़ाई सबकी थी,सबने लड़ी,इसपर भले ही एक धर्म की छाँव डाली गई हो मगर यह सच है इसकी बुनियाद से आजतक के सफ़र में हर धर्म और जाति के लोग शामिल रहें हैं । बस कुछ कट्टर धार्मिक लोग ही इसे अपने अपने धर्म के हिसाब से जामा पहनाना चाहते हैं । कोई कहता है यह मुसलमानों का आंदोलन कहता है, तो कोई चीखकर कहना चाहता है कि, हाँ यह हम मुसलमानों का आंदोलन है, यह बातें अधूरी हैं, इस आंदोलन का चेहरा भले ही कैसा दिखता हो,इसकी सोच गाँधीयन है, तरीका गाँधीयन है, इसलिए यह एक मज़हब का तो कतई ही नही हो सकता है ।
हम इसपर वक़्त भी नही बर्बाद करना चाहते,बस इतना कहना चाहते हैं,हमारी लड़ाई मोदी जी के विचार से है नाकि उनसे । मैं कतई नही चाहता कि मोदी जी का कोई व्यक्तिगत नुकसान हो, न ही उनको जिस्मानी या ज़हनी तक़लीफ़ हो,हाँ मैं यह सौ प्रतिशत चाहता हूँ कि उनको,उनके ही मैदान में यानी चुनाव में लोकतांत्रिक तरीकों से हराया जाए । जिस जनता से वह जीतकर आए हैं, वही जनता ही उन्हें हराकर दिखाए । मैं न उनसे चिढ़ता हूँ न ही घृणा करता हूँ,मैं चाहता हूँ कि कट्टरपन का कोई भी विचार हो,वह हारे,मगर लोकतांत्रिक तरीकों से नाकि कोई और तरह से,इसलिए जो आंदोलन हो रहें,उसे मेरा सहयोग हमेशा है,यह पूरी तरह अहिंसात्मक लोकतांत्रिक तरीका है ।
दूसरी बात नरेंद्र मोदी चुटकी बजाने से पीएम नही बने हैं, बड़ी मेहनत और सधे हुए तरीके से चलकर बने हैं । हमें उनका मुकाबला इसी मैदान मे करना है । बिना थके अटूट और लम्बी मेहनत करनी होगी । यह कहना कि लोग कट्टर हो गए हैं, लोग भक्त बना दिये गए हैं, लोगों की विचारशक्ति छीन ली गई है, सही नही है, क्योंकि हम लोगों को साध नही पा रहें हैं, उन्हें अपनी बातों पर भरोसा नही दिला पा रहें हैं, उन्हें एहसास नही करवा पा रहें हैं, यह हमारी कमी है, लोगों के सर मढ़कर हम अपनी कमियों से भाग नही सकते हैं ।
भाजपा हर चुनाव आक्रामक और गन्दी ज़ुबान इस्तेमाल करके लड़ती है, उसकी कोशिश सारे चुनाव को हिन्दू मुसलमान के मैदान पर लाने की ही होती है । सब पार्टी उसके सामने बेबस नज़र आती हैं । यह कितनी शर्म की बात है, खासकर उनके लिए,जिनके पूर्वज महात्मा गाँधी रहें हों । हमारे तरीकों में ही कमी है, हम गाँधी को मानते हैं मगर जानते नही हैं । सत्य,अहिंसा और न्याय को धारण करने वाला बेबस और लाचार हो ही नही सकता , उसे खुद पर भरोसा करके जूझना चाहिए,सब कुछ जनता पर छोड़ दें कि वह अपने लिए असत्य चुनती है या सत्य,अन्याय या न्याय,अहिंसा या हिंसा,मेहनत कीजिये लोगों में,लोग जगेंगे,सोए हुए को जगाना पड़ता है ना कि यह कहकर निकलना होता है कि वह तो सो रहें,उठेंगे ही नही ।
इतिहास में हिटलर के आने के तमाम किस्से भरे पड़े हैं, हिटलरशाही के संकेत और शंकाएँ हमें दिखने ही लगते हैं, तो इन्हें रोकने के भी नियम-तरीके हैं । अब जब आंदोलन की चाभी आप सबके पास है, सरकार के असंवेदनशील अविवेकीपन से अब लोगों की भी आंदोलनों में कमी नही है,तब इन्हे समझाइए,इनको तैयार कीजिये ताकि यह आगे बढ़कर लीडर बन सकें । इतनी भीड़ को अगर भीड़ ही रहने दिया गया,तो यह हमारा फेलियर होगा,अब निकले हुए क़दम मज़बूत कदम बने,इसमे लगना होगा । जहाँ कहीं भी आन्दोलन पर पुलिस हिंसक रवैय्या अपना रही है, उसका मुकाबला बिना घबराए,बिना उत्तेजित हुए,धैर्य और साहस से देना है, साहस यह कि हम हर हिंसा का मुकाबला अहिंसा से करेंगे,कोई लाठी हमे कमज़ोर नही कर पाएगी,हर चोट हमे और मज़बूत करेगी । बस इन मौकों पर सँगठित हों और खुद को तमाम कमियों से छुटकारा दिलाएं,सुधार करें और नई तारीख़ की बुनियाद रखें ।
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