Saturday, August 8, 2020

अगस्त क्रांति और आजका समय

जब मन टूटने लगे,यह लगने लगे कि समाज बर्बादी की तरफ निकल चुका है । सत्ता बेशर्मी का चोला ओढ़ चुकी है । अन्याय और अधर्म अहंकार के हाथ पैर बनकर आमजन पर टूट पड़े हों । आपको सच बात कहने पर ही खींच कर मार दिया जाए । आपके विरोध के स्वर को सलाखों के पीछे सड़ने के लिए भेज दिया जाए,तब भी मेरा एक मंत्र याद रखना,निराश मत होना,क्योंकि तुम्हारी निराशा और हताश सूरत ही तो किसी भी आक्रांता की विजय है । यह बात तुम आज के दिन यानि अगस्त क्रांति दिवस से सीखना ।

जब बड़े बड़े राजा महाराजा,जिनके पास सेनाएं थीं,दौलत थी,लोग थे और दस दस आदमियों से ऊँची दीवारों के महल कोठियाँ थीं,उन्हें भी लगता था कि वह अंग्रेज़ों को हटा नही पाएँगे । वह मन से हारे और हताश बड़े बड़े लोग थे । उनके पास जीतने की इच्छाशक्ति ही नही थी ।

दूसरी तरफ थे वह जिनके पास महल नही थे,सेनाएँ नही थीं,इतनी दौलत नही थी की बेतहाशा बहा सकें,मगर इसी के साथ उनके पास न निराशा थी और न ही उनके चेहरे पर हताशा का डेरा था,उन्हें खुदपर यक़ीन था कि वह अंग्रेज़ों को अपनी चौखट से हटा देंगे ।

यह लोग थे गांधी,कस्तूरबा,नेहरू,सुभाष,मौलाना आज़ाद जैसे जिनको जेल में सड़ना तो मंज़ूर था मगर हताश होना कतई नही मंज़ूर था । नारे हवा में उछाल दिए गए,"अंग्रेज़ों भारत छोड़ो" और लोग बोल उठे "करेंगे या मरेंगे" । जन जन सन 42 के इस आंदोलन में जुट गया और अहंकारी सत्ता ने भरपूर सितम ढाना शुरू किया मगर इन स्वतंत्रता सेनानियों पर पड़ने वाली हर लाठी अंग्रेज़ सत्ता के पैरों पर ही पड़ती,यह चोट थी तो गाँधी की काँग्रेस के सेनानियों की पीठ पर मगर खाल उतर रही थी अंग्रेज़ी हुक़ूमत की और देखते देखते कुछ ही सालों में वह अहंकारी सत्ता डूब गई,जिसके राज में सूरज नही डूबा करता था ।

अगस्त क्रांति में चोटी के सारे कांग्रेसी और समाजवादी नेता जेल की सलाखों में थे । दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं ने आंदोलन की डोर संभाली और जनता के सहयोग से क्रांति आंदोलकारियों के अड्डो से घर घर पहुँच गई । आम किसान,नौजवान,मज़दूर, ज़मींदार सब जुट गए और भिड़ पड़े उस सत्ता से जो ताक़त में हज़ार गुना ज्यादा थी उनसे ।

इन सब दिनों का इतिहास आखिर हम क्यों पढ़ाते हैं । आखिर हम क्यों बताते हैं कि देखो हमारे बुजुर्गों ने कितना संघर्ष किया है । हम आपको इतिहास का विद्यार्थी नही बनाना चाहते,बस कहना चाहते हैं कि जब आप अन्याय और अधर्म देखेंगे,संविधान पर चोट होते देखेंगे,तब आपमें इसके विरोध का साहस होना चाहिए । बिना यह सोचे कि सामने वाला अंग्रेज़ हुक़ूमत की तरह अभेद्य है ।

अगर हमारे पूर्वज उस हुक़ूमत की ताकत,ज़ुल्म और खुद मिट जाने से डरते तो यकीन जानो अगस्त क्रांति होती ही नही । लोग जेल गए,उनके घरों की कुर्की हुईं,उन्हें सख्त सज़ाएँ मिली,घर परिवार वाले बर्बाद हुए,बच्चों के सर बाप का साया छीना गया,खाने का अनाज छीनकर जला दिया गया,कपड़ों को आग में झोंक दिया गया,दीवारें चिटखा दी गईं,मगर वह न डिगे,न रुके,न निराश हुए,न ही हताश हुए और आखिर अहंकारी सत्ता ख़ुद घुटनो के बल आई ।

अगस्त क्रांति और उसके नेतृत्व को ज़रूर देखिये,उनको भी खोजकर पढ़िए जिन्होंने उस समय इस क्रांति के विरुद्ध अंग्रेज़ों के दरवाजे के ब्रेड एंड बटर को तरजीह दी थी । जो जेल की सख्तियों के विरुद्ध आराम देह ज़िन्दगी के लिए क्रांति से धोखा कर रहे थे ।

यह भी जानिएगा की इसी क्रांति में जेल जाने के बाद किसने अपने परिवार को जेल में मरते हुए देखा था । सदी की सबसे खूबसूरत पति पत्नी की जोड़ी में कस्तूरबा को बिछड़ते देखा था । सबसे समर्पित सहायक महादेव देसाई को ज़िन्दगी से पिछड़ते देखा था । पढ़िए,तब जानिएगा आज बेलौस दहाड़ने के लिए कल कितना संघर्ष किया गया और इसके लिए किसने कुर्बानियां दिया ।

अगस्त क्रांति की देशवासियों को बधाई । बस इससे सीखियेगा की असत्य,अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध बोलते वक़्त घबराइयेगा नही और विपरीत से विपरीत माहौल में निराश मत होइएगा वरना हमारे बुजुर्ग मायूस होंगे,जो तमाम सख्तियाँ झेलते हुए नही टूटे वह हम जैसों को टूटा हुआ देखकर ज़रूर टूट जाएँगे । हिम्मत रखिये,हर अन्याय,हर अहंकार का एक ही परिणाम हुआ है कि उसका नामलेवा कोई नही रहा । अगस्त क्रांति अमर है ।

No comments:

Post a Comment