मै कोई प्लंबर तो नहीं
की उसके बहते आंसू रोक दू
मै कोई संगतराश तो नहीं
की उसके वजूद को तराश दू
मै कोई दर्जी तो नहीं
की उसके ज़ख्मो को सिल दू
मै कोई मोची तो नहीं
की उसके टूटे दिल को जोड़ दू
मै कोई चित्रकार तो नहीं
की उसके जिस्म को उकेर दू
मै कोई फ़िल्मकार तो नहीं
की उसको ही उभार दू
मै कोई संगीतकार तो नहीं
की उसके लफ्ज़ को झंकार दू
मै कोई इतिहासकार तो नहीं
की उसके एहसास को एक नाम दू
मै कोई कलमकार तो नहीं
की उसको सरस्वती का मक़ाम दू
मै तो एक अदना सा आदिम हूँ
कहो तुम्हे साथ रखूं
या कहो तो बिछाड़ दू
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