Tuesday, October 13, 2015

sirf tum

मै कोई प्लंबर तो नहीं 
की उसके बहते आंसू रोक दू
मै कोई संगतराश तो नहीं 
की उसके वजूद को तराश दू 
मै कोई दर्जी तो नहीं 
की उसके ज़ख्मो को सिल दू 
मै कोई मोची तो नहीं
की उसके टूटे दिल को जोड़ दू 
मै कोई चित्रकार तो नहीं 
की उसके जिस्म को उकेर दू 
मै कोई फ़िल्मकार तो नहीं 
की उसको ही उभार  दू
मै कोई संगीतकार तो नहीं 
की उसके लफ्ज़ को झंकार दू 
मै कोई इतिहासकार तो नहीं 
की उसके एहसास को एक नाम दू 
मै कोई कलमकार तो नहीं 
की उसको सरस्वती का मक़ाम दू 
मै तो एक अदना सा आदिम हूँ  
कहो  तुम्हे साथ रखूं
या कहो तो बिछाड़ दू 
 

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