Wednesday, October 14, 2015

हां मै सेकॅलर हूं !

हां मै सेकॅलर हूं,कोई भी रोये मुझे तो सिर्फ आंसू दिखते है,उन आसूंओ के रंग नही | जब कोई परेशान होता हैं तो उसकी परेशानी दिखती है सोच नही | तड़प उठता हूं रोते हुए बच्चो और सिसकती हुई औरतों के लियें । मचल उठता हूं मायूस नौजवानो को देखकर | जितना जी में आये गाली दे लों मगर यह सेकूलरिज्म कभी भी एक रंग में नही रंगेगा । मेरे मां बांप ने मोहब्बत की वह घूटी दी है, जिसमें एक मजहब और एक सोच का कोई जायका नही। मेरी परवरिश खालिश हिन्दुस्तानी है,जो कभी किसी का मुंह न काला करेगी और न ही अपनी जबान गन्दी । तुमने सेकुलरिज्म को सियासती चश्में से देखा और तंग सोच से समझाा इसिलिये तो तुम्हे हिन्दुस्तान के बेहतरीन रंगों खुश्बुओ और जायको से महरुम होना पड़ा । हमें पता है इस खुबसूरती को कभी न पाओगे, तो खीजों गें चिल्लाओगें और अपने वजुद से लड़ोगें । क्यूंकि तुम्हारा खमीर सेकूलर है। और तुम बन कुछ और रहे हो ।

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