दिल कहता है की बांसुरी पर होंट रख मस्जिद में बैठ जाओ और वहीं अपने कान्हा से बतयाओ । मंदिर में बैठ नमाज़ पढ़ो । चर्च में बैठकर गुरु नानक के पांव पर सर रख लेट जाओ और गुरुद्वारे में बाइबिल को इतनी बार दोहराओ की ज़बान पहले से चढ़ी मजहब की लज़्ज़त खो दे । गौतम के साथ बैठकर सुजाता की मुश्किल हल की जाएँ,चलो उठो महावीर पर एक शाल तो डाल आएँ,कितनी ठंड है । पता है मेरी यह हर सोच पागलपन ही तो है ।
मैं चाहता हूँ की तरतीब टूटें और आप चाहते हैं की तरतीब चलती रहें। आप तरतीब से एक दुसरे के पीछे चलती चीटियों से सीखना चाहते हैं और हम इधर उधर बिखरी चीटियों से बात करना चाहते हैं । हमे स्कुल में बच्चों की एक के पीछे एक खड़े होकर लगी लाइन किसी शैतान की शरारत लगती है । जो बच्चों के बिखर जाने वाले दिल और असमान तक उड़ जाने वाले दिमाग को बाँधकर एक परेड के मैदान में खड़ा कर देता है । कितना अच्छा हो यह बिखरे बिखरे एक दूसरे से लड़ते झगड़ते,चुटकियाँ और बाल नोचते,एक दूसरे पर मिटटी और घांस फेकते हुए प्रार्थना करते । यह ऐसी प्रार्थना है जिसे ईश्वर पसंद करता मगर शैतान ने इन्हें एक रेखा में हाथ जोड़कर,सर झुकाकर,रटे हुए शब्दों को दोहरवा कर खड़ा कर दिया है ठीक वैसे ही जैसे अनारकली अकबर के दरबार में खड़ी सलीम के इश्क़ की सज़ा पाने को बेताब थी ।
यह मेरा पागलपन है,मुझे पता है सदियों से जिन आँखों को जो भी दिखाया गया है वह ही उनका सच है । वह कभी नही मानेंगी की अनुशासनहीन औलाद भी माँ बाप की उतनी ही मोहब्बत दिल में रखता है जितनी की सादतमंद औलाद । यह तरतीब के पीछे पगलाई दुनिया कभी नही मानेगी की लापरवाह बच्चे बड़े मोहब्बती हुआ करते है । यह कभी नहीं जान पाएगी की खुदा के सामने सजदे में झुका सर असल में कान्हा के कंधे पर रखा हुआ सर भी हो सकता है । पता नही कब वह दौर आएगा जब बदतमीज़ के दिल में छिपी तमीज दिखाई देगी । बदमाश के दिल में धड़कती मासूमियत कोई चेहरा पहनकर सामने उतरेगी ।
यह कब जानेंगे की हर अंगुलिमाल इंतज़ार कर रहा है किसी बुद्ध का । यह कब जानेंगे की खड्ग सिंह के बगैर बाबा भारती अधूरे हैं । यह कब जानेंगे की रावण की मौत के बाद राम की आँखों में उलटे भीतर बहते आंसू कौन थे । मोहम्मद की राह में कांटे बिछाने वालों की मोहम्मद के आने की बेकरारी और बेसब्री को भला कौन दिल समझेगा । यह एक पागलपन है,जो हमारी बनाई तरतीब से अलग चलेगा वह पागल ही तो कहलाएगा । वह यह भूल रहें की जो आज तरतीब है,उसे जो लेकर आया था,कल वह भी पागल कहलाया था । आज जो इससे हटेगा,वह भी पागल कहलाएगा,मगर एक दिन इस पागलपन के सामने सब सर झुक जाएँगे और तुम देखना मस्जिद से राम,मन्दिर से मोहम्मद,चर्च से नानक,गुरूद्वारे से जीसस,और सुजाता संग बुद्ध मुस्कराते हुए निकल जाएँगे...
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